व्यावसायिक शिक्षा- 12वर्षों से राजकीय विद्यालयों में कौशल शिक्षा दे रहें शिक्षकों ने मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी को खून से पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत करवाया लेकिन कोई सुधार नहीं- स्थाई जॉब पॉलिसी लागू करे
5 से 14माह से बकाया वेतन दिया जाए @sharatjpr@pantlp@ApoorvJaipur
माननीय मुख्यमंत्री जी, राजस्थान के हजारों व्यावसायिक प्रशिक्षक वर्षों से स्थायी जॉब पॉलिसी, VTP टेंडर प्रथा समाप्त कर विभाग के अधीन करने, हरियाणा मॉडल की तर्ज पर नियमित सेवा व्यवस्था एवं लंबित वेतन भुगतान की मांग कर रहे हैं।
सरकार से बार-बार संवाद के बावजूद समाधान नहीं हुआ। अब यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी नगर निकाय एवं पंचायत चुनावों का लोकतांत्रिक बहिष्कार करने को मजबूर होंगे।
न्याय चाहिए, आश्वासन नहीं।
जागो राजस्थान सरकार
#स्थाई_जॉब_पालिसी_लागू_करो
#CSR_2022
@rajeduofficial@RajCMO@RajGovOfficial@BhajanlalBjp@madandilawar
🎗️ रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🎗️
भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास, संरक्षण और जिम्मेदारी का बंधन होता है।
काश! विभाग भी वर्षों से कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों के साथ ऐसा ही रिश्ता निभाता—समय पर मानदेय, रोजगार की सुरक्षा और स्थायी जॉब पॉलिसी का उपहार देता।
राखी का बंधन तो निभाइए विभाग, अब प्रशिक्षकों से किया वादा भी निभाइए।
— व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति, राजस्थान
#रक्षाबंधन #VocationalTrainers #स्थायी_जॉब_पॉलिसी #राजस्थान
जागो राजस्थान सरकार
#स्थाई_जॉब_पालिसी_लागू_करो
#CSR_2022
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रक्षाबंधन पर भी खाली रही व्यावसायिक प्रशिक्षकों की जेब, विभाग मौन—कंपनियों की मनमानी से बढ़ा आक्रोश
जयपुर। दीपावली और होली के बाद अब रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर भी राजस्थान के राजकीय विद्यालयों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों को मानदेय का इंतजार ही करना पड़ा। कई प्रशिक्षकों का कहना है कि त्योहार बीतते जा रहे हैं, लेकिन उनकी मेहनत का भुगतान समय पर नहीं हो रहा। इससे प्रशिक्षकों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
व्यावसायिक प्रशिक्षकों का आरोप है कि विभाग की ओर से कंपनियों को समय-समय पर मानदेय भुगतान के निर्देश जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद कुछ कंपनियां विभागीय आदेशों की पालना नहीं कर रही हैं। प्रशिक्षकों का सवाल है कि जब विभाग आदेश जारी कर चुका है तो उन आदेशों की पालना नहीं कराने पर जिम्मेदारी किसकी है?
एक तरफ अनिवार्य व्यावसायिक शिक्षा की बात, दूसरी तरफ प्रशिक्षकों का शोषण
प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करने और विद्यार्थियों को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की बात लगातार की जा रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री द्वारा भी व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य विषय के रूप में बढ़ावा देने को लेकर सार्वजनिक रूप से जोर दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इसी व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षक मानदेय और नौकरी की अस्थिरता से जूझ रहे हैं।
प्रशिक्षकों का कहना है कि केंद्र सरकार के ‘स्किल इंडिया—कुशल भारत’ जैसे महत्वपूर्ण उद्देश्य के तहत चलने वाली व्यावसायिक शिक्षा व्यवस्था को राजस्थान में डबल इंजन सरकार का समर्थन होने के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रशिक्षकों को समय पर मानदेय तक नहीं मिल पा रहा है।
शिक्षा मंत्री कहते हैं ‘आप हमारे नहीं’, कंपनियां कहती हैं ‘विभाग से पेमेंट नहीं आया’
प्रशिक्षकों ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी समस्या लेकर विभागीय अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के पास जाते हैं तो उन्हें यह कहकर जिम्मेदारी से अलग कर दिया जाता है कि वे विभाग के प्रत्यक्ष कर्मचारी नहीं हैं। दूसरी ओर संबंधित कंपनियों से भुगतान को लेकर संपर्क करने पर कई बार यह जवाब मिलता है कि विभाग की ओर से भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है।
ऐसे में व्यावसायिक प्रशिक्षकों का सवाल है—“आखिर हम जाएं तो जाएं कहां?”
त्योहारों पर भी भुगतान का इंतजार
प्रशिक्षकों का कहना है कि प्रदेश में कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं, जिनके अधीन कार्यरत प्रशिक्षकों को दीपावली, होली और अब रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर भी समय पर मानदेय नहीं मिल पाया। परिवार की जरूरतों और त्योहारों के खर्च के बीच मानदेय का इंतजार प्रशिक्षकों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है।
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति का कहना है कि यदि विभाग ने कंपनियों को भुगतान के स्पष्ट निर्देश दिए हैं तो उनकी पालना नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ जिम्मेदारी तय करते हुए उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही आगामी टेंडर प्रक्रिया में उन कंपनियों के रिकॉर्ड और प्रशिक्षकों के बकाया भुगतान को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के ट्वीट और जमीनी हकीकत में अंतर का सवाल
प्रशिक्षकों का कहना है कि सरकार एक ओर राजस्थान में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने और इसे अनिवार्य विषय बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रही है, लेकिन दूसरी ओर व्यावसायिक शिक्षा को विद्यालयों तक पहुंचाने वाले प्रशिक्षक ही आर्थिक असुरक्षा और ठेका प्रथा का सामना कर रहे हैं।
प्रशिक्षकों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग से मांग की है कि व्यावसायिक प्रशिक्षकों के मानदेय भुगतान की स्थायी व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान और ठेका प्रथा से मुक्ति के लिए स्थायी नीति बनाई जाए।
प्रशिक्षकों का कहना है कि सरकार यदि वास्तव में ‘कुशल भारत’ और रोजगारपरक शिक्षा के लक्ष्य को धरातल पर उतारना चाहती है तो सबसे पहले उन प्रशिक्षकों के हितों की सुरक्षा करनी होगी, जो वर्षों से विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण दे रहे हैं।
अब प्रशिक्षकों की नजर सरकार और शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर है। सवाल यही है कि रक्षाबंधन भी इंतजार में बीत गया—क्या आने वाले त्योहार पर भी व्यावसायिक प्रशिक्षकों को अपने मानदेय के लिए इंतजार करना पड़ेगा?
जागो राजस्थान सरकार
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शिक्षा विभाग की स्थिति समझे /गेस्ट फैकल्टी प्लान समझे -
कथनी-बीजेपी द्वारा विपक्ष 2021 में गेस्ट फैकल्टी का विरोध किया गया ,दो माह पहले शिक्षा मंत्री जी द्वारा सम्पूर्ण रिक्त पदों को नियमित भर्ती से भरने का वादा किया है
करनी-
(1) सरकार बनते ही फर्स्ट ग्रेड भर्ती विज्ञापन =2202 पदों पर जबकि रिक्त पदों की संख्या थी 2024 तक 17500 (11 साल में सबसे कम पदों पर भर्ती जानबूझकर गेस्ट फैकल्टी लागू करने की मंशा से निकाली गई )
(2)सेकंड ग्रेड भर्ती विज्ञापन =2129 पदों पर जबकि रिक्त पदों की संख्या थी 2024 में 25351 (13 साल में सबसे कम पदों पर भर्ती जानबूझकर मंशा गेस्ट फैकल्टी लागू करने की )
(3)अध्यापक भर्ती निकाली = 7759 पदों पर (विशेष शिक्षा जीरो पद ,सामान्य शिक्षा लेवल 2 जीरो पद जबकि रिक्त पद 10 हज़ार थे ) इतिहास में सबसे कम पदों पर
विशेष- भर्ती कैलेंडर पॉइंट 9 में घोषणा थी शिक्षा विभाग में 10 हज़ार विविध पदों पर मार्च तक भर्ती करेंगे आज दिनांक तक कोई अता पता नहीं
बजट घोषणा 25 हज़ार का कोई अता पता नहीं
शिक्षा विभाग में सरकार ने नियमित स्थाई भर्ती का वादा करके धोखा दिया है
आने वाले चुनाव में वोट की चोट से जवाब जरूर देवे
#हनुमान_किसान
@News18Rajasthan@hemantkumarnews
जब गेस्ट टीचर की भर्ती खुद सरकार अपने स्तर पर कर सकती है ओर सैलरी खुद सरकार देगी तो वोकेशनल टीचर की भर्ती सरकार खुद अपने स्तर पर स्थाई पॉलिसी से क्यों नहीं ले रही है
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