जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा को आप सब तो जानते ही होंगे। अरे वही जिनकी बेंच ने मीनाक्षी नटराजन के केस में पहले नामांकन की प्रक्रिया खत्म होने के बाद सुनवाई की फिर निचली अदालत में चुनाव याचिका के तहत जाने को कहा। खबर यह नहीं है।
खबर यह है कि इनके बेटे पद्मेश मिश्रा को महज पांच साल के अनुभव पर 2024 में राजस्थान का अतिरिक्त एडवोकेट जनरल बना दिया था।
राज्य सरकार की वाद नीति, 2018 के अनुसार, 10 साल का वकालत अनुभव रखने वाले अधिवक्ता को ही एएजी नियुक्त कर सकते हैं, लेकिन राज्य सरकार ने इसमें संशोधन कर विशेषज्ञता के आधार पर किसी भी अधिवक्ता को एएजी बनाने का प्रावधान कर दिया।
इसके तहत ही राज्य सरकार ने वकील के तौर पर 2019 में पंजीकृत पदमेश मिश्रा को 23 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पैनल एडवोकेट नियुक्त किया। बात यहीं खत्म नहीं हो इसके तीन दिन बाद ही उसे सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार का एएजी बना दिया दिया। खबर यही खत्म नहीं होती।
यह मामला जब हाईकोर्ट गया और इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से एएजी पद पर की गई नियुक्ति विधिसम्मत है और लॉ ऑफिसर की नियुक्ति करना राज्य सरकार का प्रशासनिक व वैधानिक अधिकार है।
हाईकोर्ट ने पदमेश मिश्रा की एएजी पद पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता किसी भी तरह की राहत प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है।
तो अब खबर फिर से पढ़ें कि मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली।
İtalya Başbakanı Meloni:
"İsrail'i kırmızı çizgiyi aşmakla suçluyorum, Filistinli sivillerin katliamını kınıyorum ve İtalya'nın İsrail'e karşı Avrupa yaptırımlarını destekleyeceğini açıklıyorum."
कोटा, आप कमाल थे।
यकीन मानिए, कल हमने मिलकर इतिहास की शुरुआत की।
हज़ारों छात्र मैदान में थे, लाखों लोगों ने ऑनलाइन देखा - और देश को पहली बार खुलकर पता चला कि शिक्षा के नाम पर कितनी बड़ी वसूली चल रही है।
लेकिन यह तो सिर्फ़ शुरुआत है। कोटा में जो लौ जली है, उसे अब पूरे देश में बदलाव की मशाल बनाना है। और इस सफ़र में आपकी जगह तय है।
अपने सुझाव भेजिए। Petition पर अभी Sign कीजिए।
#ChhatronKiGoonj
IMPORTANT: In this season of political splits and mergers, the Supreme Court’s questionable role has largely escaped scrutiny.
1) The SC is yet to deliver a final ruling on the Shiv Sena (UBT) appeal filed in January 2024 challenging the Maharashtra Assembly Speaker’s decision on the party split. That’s 30 months, four CJIs and counting.
2) The SC is also yet to rule on a petition filed by Goa Congress leader Girish Chodankar in March 2022 challenging a Bombay High Court order related to defections. More than four years have passed.
When the history of this period is written, the Supreme Court’s performance as a constitutional guardian must come under serious examination.🙏
🚨SON DAKİKA:
Vladimir Putin: "Eğer Rusya, İsrail'in Gazze'de yaptıklarının sadece %10'unu yapmış olsaydı, NATO şu anda Moskova'nın kapısında olurdu."
Batı bize insan haklarının İsrail'in çıkarlarının sınırlarında başlayıp bittiğini öğretti."
अदृश्य साम्राज्य: वह सवाल जिसका जवाब सरकार के पास नहीं है
आज एक RTI लगाइए।
गृह मंत्रालय को एक सीधा सवाल भेजिए — "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किस कानून के तहत रजिस्टर्ड है? इसका PAN नंबर क्या है?"
सरकार का जवाब आएगा: "हमारे पास कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।"
रुकिए।
जो संस्था इस देश के प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और दर्जनों मुख्यमंत्री तय करती है — वह कागज़ों पर exists ही नहीं करती?
यह षड्यंत्र सिद्धांत नहीं है। यह भारत सरकार का आधिकारिक जवाब है। और यहीं से शुरू होती है इस देश की सबसे बड़ी कानूनी पहेली।
वह दोहरा मापदंड जो आपको जानना चाहिए
आपका बेटा कल एक छोटी-सी दुकान खोले — सरकार उसके पीछे पड़ जाएगी। GST रजिस्ट्रेशन, CA से ऑडिट, समय पर रिटर्न। एक तारीख चूकी नहीं कि खाता फ्रीज।
विपक्षी दल के अकाउंट में 15 साल पुराने रिटर्न की एक लाइन गड़बड़ हो — खाता सील।
लेकिन एक ऐसा नेटवर्क है जो चला रहा है —
12,000 से ज़्यादा स्कूल। हज़ारों अस्पताल। लाखों कार्यकर्ता।
और इस पूरे साम्राज्य का एक भी केंद्रीय बैंक खाता नहीं — जिसे कोई सरकार कभी फ्रीज कर सके। यह संयोग नहीं है। यह सोची-समझी प्रणालीगत छूट है।
1948 का वह फैसला — जिसने इतिहास बदल दिया
गांधी जी की हत्या के बाद सरदार पटेल ने RSS पर प्रतिबंध लगाया। शर्त रखी — लिखित संविधान बनाओ, तभी बैन हटेगा।
संघ ने संविधान बनाया। लेकिन साथ ही उसके रणनीतिकारों ने भारतीय कानून के इतिहास का सबसे चतुर दांव खेला।
उन्होंने सोचा — अगर दिल्ली में एक केंद्रीय संस्था बनाई, तो कल कोई भी विरोधी सरकार एक झटके में खाते फ्रीज करके संगठन खत्म कर सकती है।
इसलिए उन्होंने अपना ढांचा स्टारफिश की तरह बनाया।
स्टारफिश की एक भुजा काट दो — वह मरती नहीं। उस कटी भुजा से नई स्टारफिश जन्म लेती है।
संघ ने पूरे देश में हज़ारों स्वतंत्र स्थानीय ट्रस्ट बना दिए — नागपुर विकास समिति, दिल्ली सेवा ट्रस्ट और ऐसे सैकड़ों नाम। किसी एक पर कार्रवाई हो, बाकी सब चलते रहते हैं।
और "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ" नाम की कोई केंद्रीय संस्था कागज़ों पर है ही नहीं।
जो दिखता है — और जो नहीं दिखता
जो दिखता है: सुबह पार्क में शाखा, खाकी पैंट, व्यायाम। एक सांस्कृतिक दृश्य — जिस पर कोई कानून लागू नहीं होता।
जो नहीं दिखता: हर साल व्यास पूर्णिमा को लाखों स्वयंसेवक भगवा ध्वज के सामने बंद लिफाफों में करोड़ों रुपये समर्पित करते हैं। इसे 'गुरु दक्षिणा' कहते हैं।
यह पैसा किसी केंद्रीय खाते में नहीं जाता।
जाता है उन्हीं हज़ारों स्थानीय ट्रस्टों में — जो कानूनी हैं, रिटर्न भरते हैं, 80G की छूट लेते हैं।
जांच हो तो एक ट्रस्ट पकड़ में आए — लेकिन "संघ" पर हाथ नहीं पड़ सकता, क्योंकि "संघ" कागज़ों पर है ही नहीं।
इसे कहते हैं 'शैडो बैंकिंग ऑफ आइडियोलॉजी' — विचारधारा की शैडो बैंकिंग।
वह सवाल जो संघ कभी नहीं पूछने देता
जब यह सवाल उठाओ, तो जवाब मिलता है — "संघ कोई कंपनी नहीं, परिवार है। गुरु दक्षिणा कोई फीस नहीं, आध्यात्मिक समर्पण है। क्या परिवार का ऑडिट होता है?"
भावनात्मक रूप से यह तर्क काम करता है।
लेकिन तथ्यों की कसौटी पर?
जब इसी 'परिवार' के सदस्य देश के प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री बन जाते हैं — तब क्या यह सिर्फ परिवार है?
जब यही 'परिवार' राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समितियों में बैठता है — तब क्या यह सिर्फ संस्कृति है?
जब इससे जुड़े ट्रस्टों को हज़ारों करोड़ के CSR फंड और सरकारी ज़मीनें मिलती हैं — तब क्या यह सिर्फ सेवा है?
राजनीतिक विश्लेषक वाल्टर एंडरसन ने लिखा था — "आप उसे कानूनी तौर पर नष्ट नहीं कर सकते, जो कानूनी रूप से अस्तित्व में ही नहीं है।"
यह 'परिवार' वाला तर्क दरअसल भारत के वित्तीय पारदर्शिता कानूनों से बचने का सबसे शानदार बौद्धिक चोर रास्ता है।
अंत में — एक असुविधाजनक प्रश्न
विद्या भारती के 12,000 स्कूल, सेवा भारती के 1 लाख सेवा कार्य, वनवासी कल्याण आश्रम के हज़ारों प्रोजेक्ट — इन सबका सम्मिलित टर्नओवर कई राज्यों के बजट से बड़ा बताया जाता है।
लेकिन इसकी कोई consolidated balance sheet नहीं है।
क्योंकि जो होल्डिंग कंपनी कागज़ों पर है ही नहीं — उसे हिसाब देना नहीं पड़ता।
100% नियंत्रण। 0% जवाबदेही।
सवाल संघ के काम का नहीं है।
सवाल यह है — क्या इस देश में कानून सबके लिए बराबर है?
जहाँ आम नागरिक के खाते में 5 लाख आएं तो नोटिस आ जाए — और दशकों से चलती सबसे बड़ी राजनीतिक मशीनरी बिना किसी केंद्रीय रजिस्ट्रेशन के चलती रहे?
यह वह प्रश्न है जो हर जागरूक नागरिक को स्वयं से पूछना चाहिए।
और अगर यह सच आपको भी ज़रूरी लगे — तो इसे शेयर करें। क्योंकि यह सवाल किसी एक विचारधारा का नहीं, लोकतंत्र की बुनियाद का है। #Copied
For the first time in Indian History, a top opposition leader is talking about actual education reforms.
To make education affordable, job focused, less stressful and improve the overall quality of education.
A policy reform which will transform the lives of every child, every parent in the country. It is beyond politics.
If you don’t support this movement now, don’t cry for your child later.
BREAKING : Hundreds of students gathered at Kota Junction to see off Rahul Gandhi as he left for Delhi in train
Look at the energy, the vibe of the crowd. Gen-Z’s Prime Minister 🫡🔥
अगर आपने पेपर लीक, परीक्षा में धांधली, या महँगी fees का दर्द झेला है
अगर इस व्यवस्था ने आपके सपने तोड़े हैं
अगर आपके परिवार ने आपकी पढ़ाई के लिए जीवनभर की कमाई लगा दी है
तो सुनिए: ‘छात्रों की गूंज’ आपकी आवाज़ है।
यह सिर्फ़ एक अभियान नहीं, यह आपकी मांग को सरकार तक पहुँचाने का ज़रिया है। सस्ती शिक्षा। निष्पक्ष परीक्षा। सम्मानजनक रोज़गार।
और इसमें जुड़ना सिर्फ़ 30 सेकंड का काम है:
1️⃣ नीचे दिए लिंक पर जाइए
2️⃣ अपना नाम भरिए, अपने सुझाव दीजिए
3️⃣ पिटिशन sign कीजिए - बस।
आपका एक हस्ताक्षर इस लड़ाई को ताक़त देगा। जितने ज़्यादा नाम, उतनी बुलंद गूंज।
👉 अभी sign कीजिए: https://t.co/g6mbw7X5XC
#ChhatronKiGoonj
'गोदी मीडिया' ने उन 'कॉकरोचों' को बहुत ज़्यादा कवरेज दिया, जबकि उनकी संख्या सिर्फ़ 500 थी।
आज कोटा में राहुल गांधी के समर्थन में 1 लाख से ज़्यादा छात्र मौजूद हैं, फिर भी मुझे यकीन है कि उन्हें वैसी कवरेज नहीं मिलेगी।
If you've suffered because of paper leaks, exam issues, or high fees
If this education system has shattered your dreams
If your family has invested a lifetime of savings in your education
Then “Chhatron Ki Goonj” is your voice.
This isn't just a campaign - it's a platform to take your demands directly to the government.
Affordable education. Fair examinations. Dignified employment.
Join the movement:
1️⃣ Click the link below.
2️⃣ Fill in your name and share your ideas.
3️⃣ Sign the petition - that's it.
Your signature will strengthen this movement. More the signatures, louder the goonj!
👉 Sign the petition now: https://t.co/g6mbw7X5XC
#ChhatronKiGoonj
INTERESTING: the 6 MPs who are defecting from Shiv Sena (UBT) are to be provided enhanced Y plus security by the Govt . So first you defect from the party on whose symbol you were elected, then you get ‘rewarded’ with extra security. All of course on tax payers expense!! Yeh hai Bharat ki rajneeti ka kamaal!😡
भारत की शिक्षा व्यवस्था पर इससे पहले आपने इतने सटीक आंकड़ें और आंकलन नहीं सुना होगा - ज़रूर सुनिए
This address by LoP @RahulGandhi is deeply insightful with fascinating data and puts forward many thought provoking questions on India’s Education System.
Priyank Kharge cooks 'Body of Individuals' 🔥
"If you want to work in Karnataka, you have to get registered"
RSS own members say:
Ayodhya is destroyed by RSS, BJP and Gujarat Lobby.
Shankaracharya: when Sangh involved in Ram Mandir Trust, it was clear, their goal was to loot.
UBT शिवसेना के ईमानदार नेता संजय राउत ने ट्वीट कर जानकारी दी, महाराष्ट्र के एक एक सांसद को खरीदने के लिए 15 करोड़ रुपए दिया गया है.
यह काफी हैरान करने वाली जानकारी है. इसके बाद TMC की कद्दावर नेता महुआ मोइत्रा ने संजय राउत के ट्वीट को कोट करते हुए लिखा.
संजय राउत जी, इतना सस्ते दामों में कैसे बिक गए, हमारे वाले तो 4 करोड़ + 1 करोड़ हर महीने मिलेगा. संजय राउत ने फिर महुआ मोइत्रा का ट्वीट कोट का जवाब दिया.
नही नही, महुआ मोइत्रा जी 15 करोड़ तो एडवांस मिला है. एक एक MP की बेस प्राइस 50 करोड़ रुपए रखा गया है.
मित्रों, दोनों नेता अगर सच बोल रहे हैं तो लोकतंत्र, वोट और संविधान सब फेल हो चुका है. हमारे वोट की ताकत का कोई मूल्य नही है अगर इस तरह जनता का चूना हुआ प्रतिनिधि बिकने लगे.