कांग्रेस के शासन में परियोजनाएं कैसे रुकती थीं और मायावती जी को कैसे असफल बनाने की साजिश हुई.
बहन मायावती ने 2008 में ग्रेटर नोएडा के पास जेवर में एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा.
मनमोहन सिंह ने मंत्रियों की एक समिति बना कर कहा कि विचार कीजिए. इस समिति में अलग अलग समय में पी. चिदंबरम, कपिल सिब्बल और योजनाएं रोकने के लिए सबसे बदनाम जयराम रमेश भी थे.
समिति ने 2012 तक अपनी रिपोर्ट नहीं दी. चार साल निकाल दिए.
2012 में मायावती के बाद शासन में आए अखिलेश यादव ने योजना वापस ले ली.
मंत्रियों की समिति की रिपोर्ट 2014 तक नहीं आई.
केंद्र और यूपी में बीजेपी के आने के बाद ये योजना फिर से जिंदा की गई.
अब एयरपोर्ट बनकर तैयार है.
बहनजी के समय की हर योजना पर केंद्र की यूपीए सरकार ने अड़गा डाला. ताज कोरिडोर बनने नहीं दिया. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे को मंजूरी नहीं दी. हर परियोजना पर पर्यावरण या किसी ने किसी बहाने से रोड़ा अटकाया गया.
यमुना एक्सप्रेस वे रुकवाने के लिए तो खुद राहुल गांधी पहुंच गए.
कांग्रेस का गुस्सा था कि दलित वोट बीएसपी ले गई है, इसी कारण यूपी में उसकी दुर्दशा है.
बीएसपी और सपा गठबन्धन 2019 : क्यों और कैसे टूटा?
बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का जब 2019 में गठबन्धन हुआ था,तो इसका प्रमुख उद्देश्य सत्तारूढ़ भाजपा को यूपी एवं केन्द्र की सत्ता से बेदखल करना था।
यहाँ तक कि इस गठबन्धन ने यूपी विधानसभा, लोकसभा चुनाव और स्थानीय चुनाव एक साथ लड़ने का एलान किया था।
अफसोस शिवपाल सिंह यादव नहीं चाहते थे कि भाजपा केन्द्र की सत्ता से बेदखल हो।
शिवपाल सिंह यादव नहीं चाहते थे कि बीएसपी और सपा एक साथ मिलकर चुनाव लड़ें और जातिवादी मानसिकता वाली भाजपा को मुँह की खानी पड़े।
जब सन 2019 में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी में गठबन्धन हुआ था,तो मैंने दोनों दलों के लिए जमीनी स्तर पर काफी मेहनत की और सोशल मीडिया पर खूब प्रचार-प्रसार किया।
श्रीमती डिम्पल यादव द्वारा आदरणीया बहन कु0 मायावती जी के पैर छूने के बाद शिवपाल सिंह यादव ने यादव समाज को भड़का दिया।
शिवपाल सिंह यादव ने कहा था कि डिम्पल यादव को मायावती जी के पैर नहीं छूने चाहिए थे। डिम्पल यादव ने मायावती जी के पैर छूकर यादव समाज का अपमान किया है।
शिवपाल सिंह यादव क्षेत्रों में घूमते वक़्त कहते थे कि भले ही भाजपा को वोट दे देना,लेकिन बीएसपी-सपा गठबन्धन को वोट मत देना।
शिवपाल सिंह यादव की तीखी टिप्पणियों की वजह से यादव समाज के लोगों ने बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों को वोट नहीं दिया था,तब भाजपा को दे दिया।
यहाँ तक कि यादव समाज के लोगों ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों को भी वोट देना उचित नहीं समझा और भाजपा को वोट दे आए।
पूर्वांचल की यादव बाहुल्य लोकसभा सीटों पर भाजपा का एकतरफा कमल खिला। यह अपने आप में बड़ा आश्चर्य था।
एससी वर्ग और मुस्लिम वोटों के दम पर बीएसपी के दस लोकसभा सांसद जीते और समाजवादी के पाँच।
लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम में बीएसपी अट्ठाइस सीटों पर दूसरे नम्बर पर रही और दो सीटों पर नम्बर तीन पर।
अगर यादव समाज अपना एकमुश्त वोट बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के गठबन्धन को दे देता,तो यकीकन यह गठबन्धन 70 सीटें जीतता।
बीएसपी द्वारा लोकसभा की दस सीटें जीतने और समाजवादी पार्टी द्वारा पाँच सीटें जीतने के बाद अखिलेश यादव से बर्दाश्त नहीं हुआ।
अखिलेश यादव ने बीएसपी के शीर्ष नेतृत्व से दूरी बनाना शुरू कर दिया। बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव और बीएसपी कार्यालय का फोन उठाना तक उचित नहीं समझा।
उसके बाद बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्षा आदरणीया बहन जी ने बहुजन समाज के आत्मसम्मान की ख़ातिर समाजवादी पार्टी से गठबन्धन तोड़ने का एलान कर दिया था।
देश में न्यायप्रिय, धर्मनिर्पेक्ष एवं लोक कल्याणकारी महान शासक के रूप में प्रसिद्ध अहिल्याबाई होलकर जी की जयन्ती पर शत्-शत् नमन एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित।
भारतीय इतिहास की महान शासक अहिल्याबाई होलकर जी ने अपने आदर्शों, सेवा-भाव और जनहितकारी कार्यों से समाज को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन नारी शक्ति, सुशासन, सामाजिक समरसता एवं जनसेवा का प्रेरणा स्त्रोत है। आज उनकी जयन्ती के पावन अवसर पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं उनके अनुयायियों को शुभकामनाए।
देश में कमर्शियल सिलिण्डर की भारी क़िल्लत के बीच उसकी क़ीमत में एक मुश्त 993 रुपयों की फिर की गयी वृद्धि व उसका आम जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव से जुडी ख़बरें इलेक्ट्रानिक सहित सभी मीडिया जगत की सुर्ख़ियों में हैं और इस आशंका से कि जल्द ही रसोई गैस, पेट्रोल व डीज़ल सहित अन्य पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतें भी ज़रूर बढ़ेंगी, लोगों में बेचैनी व्याप्त है।
इसका वास्तविक कारण चाहे अमेरिका-इजराइल का ईरान पर युद्ध हो या अन्य कुछ और, सरकार ने जिस प्रकार से राज्यों के विधानसभा आमचुनाव के मद्देनज़र ख़ासकर पेट्रोलियम पदार्थों आदि की क़ीमत को काफी कुछ नियंत्रण में रखा, उस नीति को वर्तमान में भी व्यापक जनहित व जनकल्याण के तहत् जारी रखना चाहिये तो यह देशहित में उचित होगा।
दिल्ली में भी नई दर पर कमर्शियल सिलेण्डर की कीमत अब लगभग तीन हजार से अधिक हो जायेगी। पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों के इस प्रकार से बढ़ने से पहले से ही महंगाई से त्रस्त देश के अधिकतर ग़रीब व मध्यम वर्गों के लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका ऑकलन करके ही सरकार अपनी नीतियों का निर्धारण करे तो यह बेहतर।
@GauravPalRaj लोगों का ध्यान बहुजन समाज पार्टी से भटकाने के लिए सपा और आसपा को सस्ती पब्लिसिटी के लिए जो प्लान चल रहा है वो जनता जान चूकी है । इनको महापुरुषों की विचारधारा और समाज परिवर्तन से कुछ लेना - देना नही है। इनकी स्वार्थ की राजनिती को लोग जान गये है।
देश में सामाजिक परिवर्तन के पितामह के रूप में प्रसिद्ध ’बहुजन समाज’ में अति-पिछड़े वर्ग में जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले को आज उनकी जयंती पर मेरे व बी.एस.पी. की ओर से भी शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित।
ख़ासकर शिक्षा के माध्यम से स्त्री/नारी शक्ति के प्रणेता के रूप में महात्मा ज्योतिबा फुले व उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। महात्मा ज्योतिबा फुले के शब्दों में ’’विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी। नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया। वित्त बिना शुद्र हताश हेये, और गुलाम बनकर रह गये।’’ अर्थात यह सब कुछ शिक्षा के अभाव में हुआ और इसीलिये आगे चलकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनसे प्रेरित होकर शिक्षा की तरफ विशेष ध्यान दिया।
साथ ही, उन्नीसवीं सदी के मध्य में दलितों व शोषितों की मुक्ति के लिये महात्मा ज्योतिबा फुले के ज़बरदस्त प्रयासों के कारण अकेले पुणे में ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सामाजिक परिवर्तन की नई अलख जगी और विशेषकर नारी मुक्ति व सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कार्य शुरू हुआ, जिस संघर्षों के लिये उनकी जितनी भी सराहना व प्रशंसा की जाये वह कम है।
ऐसे अति-पिछड़े/ओबीसी समाज के महापुरुष की स्मृति व उनके सम्मान में मेरी बी.एस.पी. सरकार द्वारा अनेकों कार्य यहाँ यूपी में किये गये जिनमें अमरोहा को नया ज्योतिबा फुले नगर ज़िला बनाना शामिल है, किन्तु सपा सरकार ने इसे भी अपनी संकीर्ण राजनीति व जातिवादी द्वेष आदि के कारण इसका नाम भी बदल डाला।
उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी की सरकार द्वारा कासगंज को कांशीराम नगर ज़िला बनाने के साथ-साथ कानपुर देहात को रमाबाई नगर, संभल को भीमनगर, शामली को प्रबुद्ध नगर व हापुड़ को भी पंचशील नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था, जिसे सपा सरकार ने ज़िला तो बनाये रखा लेकिन इन सभी ज़िलों के नामों को बदल डाला, यह है इनके पीडीए का अति-दुखद चाल, चरित्र व चेहरा।
रमज़ान के मुबारक/पवित्र महीने में एक महीना का रोज़ा और तरावीह आदि की इबादतों के बाद आज ईद-उल-फ़ित्र त्योहार के ख़ुशी की उत्तर प्रदेश व समस्त देशवासियों में भी ख़ासकर देश एवं दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय मुसलमान परिवारों को मेरी दिली मुबारकबाद तथा अन्य भारतीयों के साथ-साथ उन सभी के लिए भी अच्छी ज़िन्दगी की शुभकामनायें, जिसकी गारण्टी परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को दी है।
सभी लोग आपसी मेलजोल, भाईचारा, सौहार्द, संयम व सहनशीलता की परम्परा को बनाए रखने में अपना पूरा योगदान दें, ताकि देश में समतामूलक विकास की बात आगे बढ़े और यहाँ देश की ख़ुशी एवं ख़ुशहाली में सभी लोग उसके हिस्सेदार बनकर उस पर गर्व करें।
भारतीय संविधान के आदर्श व मान-मर्यादा के मुताबिक़ सभी को मा. राष्ट्रपति पद का सम्मान करना एवं इनके प्रोटोकाल का भी ध्यान रखना ज़रूरी तथा इस पद का किसी भी रूप में राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है।
वर्तमान में देश की राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ वे आदिवासी समाज से भी हैं। लेकिन अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल में उनके दौरे के लेकर जो कुछ भी हुआ वह नहीं होना चाहिये था। यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण।
इसी प्रकार, पिछले कुछ समय से संसद में भी ख़ासकर लोकसभा अध्यक्ष के पद का भी जो राजनीतिकरण कर दिया गया है, यह भी उचित नहीं है। सभी को संवैधानिक पदों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आदर-सम्मान व उनकी गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिये तो यह बेहतर होगा।
इसी क्रम में संसद का कल से शुरू हो रहा सत्र देश व जनहित में पूरी तरह से सही से चले, यही लोगों की अपेक्षा व समय की भी माँग।
जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से ही दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं बी.एस.पी.-विरोधी तथा ’बहुजन समाज’ में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान का नहीं बल्कि जग-ज़ाहिर तौर पर इनके अनादर, अपमान व तिरस्कार का ही रहा है, इस बारे में मीडिया सहित इनका पीडीए (PDA) भी अच्छी तरह से जानता है।
साथ ही, ’बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की जयंती पर सपा पीडीए दिवस मनायेगी’, जो कि यह सपा की समय-समय पर की जाने वाली विशुद्ध राजनीतिक नाटकबाज़ी के सिवाय कुछ भी नहीं है अर्थात् सपा का इस प्रकार का व्यवहार शुद्ध रूप से इन उपेक्षित वर्गों के वोटों का स्वार्थ हेतु केवल छलावा व दिखावा है, जैसाकि अन्य विरोधी पार्टियाँ भी इन वर्गों के वोटों के स्वार्थ की ख़ातिर अक्सर कई मौकों पर ऐसे ही दिखावा व छलावा आदि करती हुईं नज़र आती हैं।
वास्तव में दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग व बी.एस.पी.-विरोधी रवैये के साथ-साथ बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये तथा इन वर्गों के शोषण, अत्याचार व जुल्म-ज़्यादती आदि का लम्बा इतिहास है, जिसे कभी भी भुलाया जाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव लगता है।
वैसे सपा के इस जातिवादी इतिहास की शुरूआत ख़ासकर सन 1993 में सपा व बी.एस.पी. की गठबंधन से होती है जब गठबंधन सरकार तथा दलित एवं अन्य कमजोर वर्गों के लोगों पर अन्याय-अत्याचार रोकने की पहली शर्त के बावजूद तत्कालीन सीएम श्री मुलायम सिंह यादव ने अपना रवैया नहीं बदला और जिसके फलस्वरूप अन्ततः बी.एस.पी. को दिनांक 1 जून सन 1995 को सपा सरकार से अपना समर्थन वापस लेना पड़ा था और फिर उसके बाद दिनांक 2 जून सन् 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस काण्ड कराकर मेरे ऊपर जो जानलेवा हमला कराया गया वह सब काली क्रूरता सरकारी रिकार्ड के साथ-साथ इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है।
इसी प्रकार, बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये की भी काफी लम्बी श्रंखला है, जिसमें सपा को सत्ता में बैठाने वाले ख़ासकर मान्यवर श्री कांशीराम जी के आदर-सम्मान से जुड़े मामले में उनके नाम पर नया ज़िला बनाने को सपा सरकार द्वारा बदल दिया गया था।
और जब बी.एस.पी. की सरकार ने कासगंज को ज़िला मुख्यालय का दर्जा व सम्मान देते हुये कांशीराम नगर नाम से नया ज़िला बनाया, तो यह वर्तमान सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव के भी गले के नीचे से नहीं उतरा जिसे फिर सपा ने अपनी सरकार बनते ही अपनी घोर जातिवादी व द्वेषपूर्ण नीति एवं दलित विरोधी रवैया अपनाते हुये अन्य ज़िलों व संस्थानों आदि के नामों की तरह इसका नाम भी बदल दिया, जो कि बहुजन समाज के साथ विश्वासघात नहीं तो और क्या है?
इतना ही नहीं बल्कि सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, अन्य पिछड़े वर्गों एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों आदि को साथ मिलाकर इन्हें सत्ता की मास्टर चाबी दिलाकर इन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के मिशन के लिये अपना पूरा जीवन इसी संघर्ष में लगा देने वाले मान्यवर श्री कांशीराम जी की दिली ख़्वाहिश के मुताबिक बी.एस.पी. की सरकार ने जब पूर्वांचल में वाराणसी के पास भदोही में महान संतगुरु के नाम पर संत रविदास नगर नाम से नया ज़िला बनाया, तो उसे भी सपा सरकार ने अपनी जातिवादी व बी.एस.पी. विरोधी रवैया अपनाते हुये बदल दिया था।
साथ ही, मुस्लिम समाज को दिये गये वादे के मुताबिक मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम से नया उर्दू-फारसी अरबी यूनिवर्सिटी लखनऊ में आईआईएम के पास बनाया गया, जिसका भी नाम सपा सरकार ने बदल डाला और अब जिसे भाजपा सरकार ’लैंगवेज यूनिवर्सिटी’ के रूप में प्रचारित करती है।
सहारनपुर में भी मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम पर बनाये गये सरकारी अस्पताल का नाम भी सपा सरकार ने बदल दिया। क्या यही सब है सपा का मान्यवर श्री कांशीराम जी के प्रति आदर व सम्मान?
इसके अलावा, अपने इस दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग व बहुजन समाज विरोधी कृत्यों के साथ-साथ सपा का रवैया मुस्लिम विरोधी भी रहा है। कांग्रेस पार्टी की तरह ही सपा की सरकारों में भी काफी घातक साम्प्रदायिक दंगों में भारी जान-माल की हानि के साथ-साथ लाखों परिवार प्रभावित हुये हैं।
हक़ीक़त में सपा के भड़काऊ आचरण आदि के कारण बीजेपी को राजनीतिक रोटी सेंकने का भरपूर मौक़ा मिलता रहा और इस प्रकार सपा व भाजपा दोनों एक-दूसरे की ज़रूरत बनकर यहाँ जातिवादी व साम्प्रदायिक राजनीति करते रहे और जिसका परिणाम है यूपी में भाजपा का राज और उससे पीड़ित मुस्लिम व बहुजन समाज तथा साथ ही हर प्रकार से त्रस्त प्रदेश की करोड़ों आमजनता है।
कुल मिलाकर, सपा का दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम व बहुजन समाज विरोधी जो जातिवादी व साम्प्रदायिक रवैया शुरू से अभी तक भी रहा है तो यह किसी से छिपा नहीं है।
इसके साथ ही सपा, लोगों को इस बात का भी जवाब दे कि बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी को उनके जीते-जी आदर-सम्मान देना तथा बहुजन एकता के लिये उनके योगदान की सराहना करना तो बहुत दूर, बल्कि उनके देहान्त के बाद एक दिन का भी राजकीय शोक घोषित करके उन्हें श्रद्धांजलि आदि क्यों नहीं अर्पित की गयी थी? सपा बहुजन समाज को जवाब दे।
अतः सपा के इन सब दलित विरोधी व जातिवादी कृत्यों को ध्यान में रखकर बहुजन समाज के लोगों को हमेशा सावधान रहना चाहिये, यही बी.एस.पी. की अपील है। धन्यवाद। जय भीम, जय भारत।
बी.एस.पी. के विधायक श्री उमाशंकर सिंह जबसे बी.एस.पी. में आये हैं उन्होंने पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अपनी ज़िम्मेवारी निभाई है और आजतक इनके क्षेत्र से इनके बारे में किसी भी प्रकार की अवैध तरीके़ से सम्पत्ति अर्जित करने या अन्य कोई भी ग़लत कार्य करने की शिकायत नहीं आई है।
हालाँकि पिछले लगभग दो वर्षों से वे काफी गंभीर बीमारी से जूझ रहें हैं, ऐसी स्थिति में आयकर विभाग को अगर इनके सम्बन्ध में कोई शिकायत मिली थी तो वे इनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर इनके ठीक हो जाने के उपरान्त इनसे पूछताछ कर सकते थे। हम कोई इस विभाग के कार्य में दख़ल नहीं दे रहें, लेकिन आज जिस तरह से इन पर अति-गंभीर बीमारी के दौरान कार्रवाई की गयी है वह अति-दुर्भाग्यपूर्ण है और मानवता के ख़िलाफ है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज माननीया राज्यपाल द्वारा विधानमण्डल के संयुक्त अधिवेशन को सम्बोधन की संसदीय परम्परा से शुरू हुआ, किन्तु उनका यह भाषण परम्परा से हटकर प्रदेश के विकास व सर्वसमाज के उत्थान सहित व्यापक जनहित में वास्तविक व थोड़ा उत्साही होता तो यह बेहतर होता।
वास्तव में पूरे उत्तर प्रदेश में सर्वसमाज के करोड़ों लोग सरकार की ग़लत नीतियों व कार्यकलापों आदि से दुखी व त्रस्त हैं तथा उन्हें ग़रीबी व बेरोज़गारी आदि के कारण अनेकों प्रकार की कठिन पारिवारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, किन्तु इन सबसे ज़्यादा उन्हें अपने जान, माल व मज़हब की ज़्यादा चिन्ता सता रही है, जिसके प्रति मा. राज्यपाल को सरकार का ध्यान आकर्षित कराना चाहिए था ताकि प्रदेश की जनता के साथ-साथ विपक्ष को भी थोड़ा आश्वासन मिलता, संभवतः जिसके अभाव के कारण ही मा. राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष की नारेबाज़ी होती रही तथा हंगामा भी होता रहा।
साथ ही, मा. राज्यपाल के सम्बोधन में भाजपा की सरकार द्वारा जनहित व जनकल्याण सम्बंधी बड़े-बड़े दावों, आश्वासनों, घोषणाओं व वादों आदि को पूरा करने सम्बंधी विवरणों का अभाव भी लोगों की चिन्ता का कारण रहा, जिसका आगामी बजट भाषण में समायोजन करना उचित।
भारत और अमेरिका के बीच अनेक शर्तों के साथ आपसी समझोते के बाद अमेरिका द्वारा 18 प्रतिशत टैरिफ लगाये जाने की खबर कितनी देश व जनहित में है इसके सम्बन्ध में समुचित जानकारी के अभाव में तत्काल कोई आकलन करना जल्दबाजी होगी क्योंकि इसपर जमीनी अमल होने के बाद ही यह सही से मालूम हो पायेगा कि इससे देश के खासकर बहुजनों, गरीबों, मजदूरों, किसानों व महिलाओं आदि का क्या भला होगा।
वैसे तो यह बेहतर होता कि इसके सम्बन्ध में सरकार द्वारा संसद के सत्र के दौरान् ही इसके बारे में विस्तार से बताया जाता ताकि लोगों को सही-सही जानकारी मिल पाती।
मा. राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा संसद के संयुक्त अधिवेशन के सम्बोधन के साथ ही संसद का बजट सत्र आज से शुरू हो गया है, जो देश की ज्वलन्त समस्याओं के त्वरित समाधान तथा देश को वाकई में आत्मनिभर्रता की ओर अग्रसर कराने हेतु नई उम्मीद जगाने वाला परिष्कृत नहीं होने से यह सम्बोधन लोगों को पारम्परिक ज़्यादा तथा आमजन उपयोगी कम लगता है।
ठीक ऐसे समय में जब ख़ासकर विश्व की सबसे बड़ी शक्ति अमेरिका ’अमेरिका फ्रस्ट’ के अभियान में लगा हुआ है और जिस कारण पूरी दुनिया में हर प्रकार की उथल-पुथल मची हुई है, भारत का भी इससे काफी कुछ प्रभावित होना स्वाभाविक ही है, जिसके उपायों की उम्मीद के रूप में सरकार द्वारा निजी क्षेत्र पर अत्यधिक भरोसा भारतीय परिवेश में कितना कारगर साबित होगा, इस पर लोगों की आशंकायें एवं चिन्तायें बरक़रार होने के कारण सरकारों को अपने ऊपर भरपूर आत्मविश्वास दिखाने की ज़्यादा ज़रूरत लगती है।
सरकार राजनीतिक तौर पर जितनी तीव्रता के साथ संसद में व संसद के बाहर भी अपने विरोधियों को अपना निशाना बनाती रहती है, लोगों के आत्म-विश्वास को मज़बूत बनाने के लिये आत्मनिर्भरता एवं विदेश नीति सहित देश व जनहित के मामलों में भी सरकार को उतनी ही प्रखरता की लोगों को प्रतीक्षा है, जिसकी झलक संसद के बजट सत्र में अगर देश को मिले तो यह उचित होगा।
इस क्रम में भारत का करीब 20 साल बाद यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापारिक समझौता बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के साथ-साथ आमजन के हित व कल्याण में भी अवश्य होना चाहिये।
महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री तथा महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेताओं में से एक नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के नेता श्री अजित पवार जी का आज बारामती में विमान हादसा में हुई मौत अति-दुखद। उनके परिवार तथा उनकी पार्टी के लोगों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कुदरत उन सबको इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।
भारत के प्रधान न्यायाधीश श्री बी. आर. गवई के साथ आज कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन पर अभद्रता करने की कोशिश अति-दुखद तथा इस शर्मनाक घटना की जितनी भी निन्दा की जाये वह कम है। सभी को इसका उचित व समुचित संज्ञान ज़रूर लेना चाहिये।
1. उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद में प्रसिद्ध मान्यवर श्री कांशीराम जी नगर में स्थित तथागत गौतम बुद्ध पार्क शहर का सबसे लोकप्रिय पार्क है। जो यह बौद्ध धर्म एवं बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी व मान्यवर श्री कांशीराम जी एवं विभिन्न वर्गों, विशेषकर बहुजन समाज के अनुयायियों की आस्था का स्थल है। लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार गौतम बुद्ध पार्क में नगर निगम मुरादाबाद द्वारा सीनियर केयर सेन्टर का निर्माण किया जा रहा है जिससे लोगों में रोष व्याप्त है तथा अशान्ति का माहौल बना है। सरकार सीनियर केयर सेन्टर पर तत्काल रोक लगाये ताकि समाज में शान्ति-व्यवस्था, आपसी भाईचारा का वातावरण बिगड़ने ना पाये।
2. इसके साथ ही, भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कल्याण हेतु, स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान के तहत उत्तर प्रदेश में चार मेडिकल कालेजों की स्थापना की गयी थी, जिनमें भारत सरकार के निर्देशानुसार इन वर्गों को 70 प्रतिशत सीटें आवंटित की गयी थी। अब इन चारों मेडिकल कालेजों में माननीय न्यायालय द्वारा अन्य मेडिकल कालेजों की भाँति ही अनुसूचित जाति को 21 प्रतिशत आरक्षण व अनुसूचित जनजाति को 2 प्रतिशत का आदेश पारित किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार कमजोर वर्ग के व्यक्तियों के हित को ध्यान में रखते हुये माननीय न्यायालय के समक्ष वास्तविक तथ्य प्रस्तुत कर माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश निरस्त करवाये ताकि कमजोर लोगों का हित सुरक्षित रह सके।