2 साल पहले जो मुख्यमंत्री जी कह रहे थे कि नौकरियाँ हैं पर उप्र में क़ाबिल युवा नहीं हैं, आज वही कह रहे हैं हमारे युवाओं में प्रतिभा, क्षमता और मेधा है.
आज जब हम सब ‘बेरोज़गार युवाओं’ के साथ खड़े हैं, तो सरकार के बोल बदल गये हैं. सच है ‘जिधर जवानी चलती है, उधर ज़माना चलता है’.
सरकारी नौकरी के स्थान पर #संविदा पर भर्ती का मैं कभी समर्थक नहीं रहा -- यूपी में पहले 5 वर्ष तक संविदा पर ,फिर मूल्याङ्कन के आधार पर सरकारी नौकरी का प्रस्ताव भी व्यावहारिक नहीं लगता -- बेहतर हो की सरकारी नौकरियों को ही सतत मूल्याङ्कन से जोड़ा जाए --