त्योहारों को देखते हुए अगले दो माह आंदोलन के साथ उपभोक्ता सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता:निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी प्रदर्शन जारी: निजीकरण को लेकर संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे पांच सवाल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे त्योहारों के मद्देनजर अगले दो माह तक बिजली आपूर्ति और उपभोक्ताओं सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड करें। संघर्ष समिति ने कहा है कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन में हम शुरू से ही किसानों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर चल रहे हैं अतः त्योहारों में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। ध्यान रहे अगले दो माह पितृ पक्ष, नवरात्र, रामलीला, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे अति महत्वपूर्ण पर्व हैं।
इस बीच विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज लगातार 283 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
संघर्ष समिति ने आज सप्ताहांत में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से निजीकरण पर पांच प्रश्न पूछे हैं।
संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से आज पांच प्रश्न पूछे जो निम्नवत है।
पहला प्रश्न है कि ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी ने यूपी ट्रांस्को को स्टेट ट्रांसमिशन कंपनी ऑफ द ईयर का पुरस्कार मिलने पर इसे प्रदेश का गौरव बताया है जो उचित ही है । तो सवाल यह है कि जब सरकारी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की ट्रांसमिशन बिजली व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम हो गई है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगातार हो रहे सुधार के बाद भी इनका निजीकरण क्यों किया जा रहा है ? ट्रांसमिशन की तरह वितरण कंपनियां भी लगातार सुधार कर रही हैं ऐसे में इनका निजीकरण क्यों ?
दूसरा प्रश्न है कि यदि घाटे के नाम पर निजीकरण किया जा रहा है तो चंडीगढ़ और दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव जहां ए टी एंड सी हानियां क्रमशः तीन प्रतिशत और 8% थी, और इन दोनों स्थानों पर विद्युत विभाग मुनाफे में था तो दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव और चंडीगढ़ का बिजली का निजीकरण क्यों किया गया ?
तीसरा प्रश्न है कि दिल्ली में निजीकरण के 23 साल बाद भी दिल्ली विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए उपभोक्ताओं के बिजली बिल में निजी कंपनियां 07% की दर से पेंशन का सरचार्ज वसूलती है तो सवाल है कि निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पेंशन देने के एवज में निजी कंपनियां उपभोक्ताओं से कितने प्रतिशत सरचार्ज वसूलेंगी ?
चौथा प्रश्न है कि निजीकरण के बाद बिजली कनेक्शन देने के लिए क्या निजी कंपनियों को उपभोक्ताओं से मनमाना बिल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा ? उदाहरण के तौर पर 12 फरवरी 2025 को आगरा में टोरेंट पावर के एक बिल की कॉपी संलग्न की जा रही है जिसमें 02 किलो वाट का कनेक्शन देने के लिए उपभोक्ता से 09 लख रुपए वसूल गया है । उपभोक्ता द्वारा 09 लाख रुपए के भुगतान की रसीद भी संलग्न है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। क्या निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल की गरीब जनता के साथ यही होने जा रहा है ?
और पांचवा प्रश्न यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण होने के बाद गरीब किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी या नहीं ? उदाहरण के तौर पर ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के 32 साल बाद भी किसानों को सब्सिडी नहीं मिलती जबकि पूरे प्रदेश में किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों के बारे में प्रत्येक सप्ताहांत संघर्ष समिति पांच - पांच प्रश्न पूछेगी।
राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष डी के मिश्रा जी के आकस्मिक निधन पर आज सभी जनपदों में बिजली कर्मचारियों ने सभा में 2 मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय डी के मिश्रा जी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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उप्र पॉवर कॉरपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों ने डिस्कॉम एसोशिएशन को एक करोड़ 30 लाख 80 हजार का भुगतान किया:घाटे के नाम पर निजीकरण की दलील देने वाले किस मद में डिस्कॉम एसोशिएशन को कर रहे हैं भुगतान-संघर्ष समिति
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज खुलासा किया कि विगत 03 जून 2025 को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन और उप्र के पांचो विद्युत वितरण निगमों ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को एक करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान किया है। संघर्ष समिति ने सवाल किया है कि एक ओर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन घाटे के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की दलील दे रहा है और दूसरी ओर एक निजी संस्था ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को करोड़ों रुपए का चंदा दे रहा है, यह बहुत गम्भीर मामला है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन से लेकर उप्र पॉवर कॉरपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों द्वारा डिस्कॉम एसोशिएशन को चंदा देने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाय।साथ ही हितों के टकराव को देखते हुए उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल को निर्देश दिया जाय कि वे या ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री का पद छोड़ दें या पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद से उन्हें हटा दिया जाय।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन और चंदे की ऊपर से दिखाई दे रही रकम "टिप ऑफ द आईस बर्ग" है। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे मेगा घोटाला है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों को बहुत बड़े घोटाले से बचाने के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाय।
संघर्ष समिति ने यह आरोप पुनः लगाया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन विद्युत वितरण निगमों में समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन कर रही है और विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण में पूरी मदद कर रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन के पीछे देश के बड़े कॉर्पोरेट घरानों का हाथ है और इस एसोसिएशन का गठन विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण हेतु किया गया है।आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर इसीलिए निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि को नियुक्त किया गया है। इस एसोसिएशन में निजी क्षेत्र की कई विद्युत वितरण कंपनियां सम्मिलित हैं और उप्र सहित अन्य प्रांतों में निजीकरण हेतु दस्तावेज तैयार कराने में उनकी अहम भूमिका है।
संघर्ष समिति ने बताया कि उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सदस्यता लेने के लिये 10 लाख रुपए और 01.80 लाख रुपए जी एस टी मिलाकर 11.80 लाख रुपए का भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त इनीशियल कॉन्ट्रिब्यूशन के रूप में 10 लाख रुपए का अलग भुगतान किया है।इस प्रकार उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को कुल 21.80 लाख रुपए का भुगतान विगत 03 जून 2025 को किया।
उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के निर्देश पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम,दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम,पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम,मध्यांचल विद्युत वितरण निगम और केस्को ने इसी प्रकार ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को अलग-अलग 21 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान 03 जून 2025 को किया है।
इस प्रकार उप्र पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड और उप्र के विद्युत वितरण निगमों ने कुल मिलाकर एक करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को किया।
संघर्ष समिति ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन यह बताये कि एक करोड़ तीस लाख अस्सी हजार रुपए के भुगतान हेतु पॉवर कारपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों ने उप्र राज्य विद्युत नियामक आयोग से पूर्व अनुमति ली है या नहीं।और यदि अनुमति नहीं ली है तो इस चंदे की धनराशि को खर्च में जोड़कर उपभोक्ताओं पर भार डालने का आधार क्या है ? संघर्ष समिति ने कहा कि घाटे के नाम पर एक निजी संस्था को करोड़ों रुपए का चंदा देना और उसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर डालना कितनी नैतिकता है?
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संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग से मांग की कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा भेजे गए निजीकरण के दस्तावेज को निरस्त किया जाए : निजी घरानों की मिली भगत से तैयार किए गए दस्तावेज को अनुमति दी तो नियामक आयोग कार्यालय पर मौन प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष से मांग की है कि वह पावर कॉरपोरेशन द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को मंजूरी न दें और उसे निरस्त कर दें। संघर्ष समिति ने कहा है कि निजी घरानों की मिली भगत से तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को निरस्त न किया गया तो मजबूरन बिजली कर्मियों को नियामक आयोग के कार्यालय पर मौन प्रदर्शन करना पड़ेगा।
संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को याद दिलाया है कि 05 अक्टूबर 2020 को जब वह उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष थे तब उन्होंने संघर्ष समिति के साथ एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसमें लिखा है कि बिजली कर्मियों को विश्वास में लिए बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी क्षेत्र में बिजली का निजीकरण नहीं किया जाएगा। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के दस्तावेज को मंजूरी देना इस समझौते का खुला उल्लंघन होगा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां जारी बयान में कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा बनाया गया आरएफपी डॉक्यूमेंट निजीकरण की आड़ में एक बड़ा घोटाला है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह आरएफपी डॉक्यूमेंट पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष और निदेशक वित्त निधि नारंग ने कुछ चुनिंदा निजी घरानों की मदद करने के लिए उनके साथ मिलीभगत में तैयार किया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि इस आरएफपी डॉक्यूमेंट के अनुसार पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की एक लाख करोड रुपए की परिसंपत्तियों को बेचने के लिए रिजर्व प्राइस मात्र 6500 करोड रुपए निर्धारित की गई है । इस प्रकार यह लूट का दस्तावेज है।
संघर्ष समिति ने मांग की कि विद्युत नियामक आयोग को निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर बिजली कर्मियों का अभिमत जानने के लिए संघर्ष समिति से तत्काल वार्ता करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि पूरा का पूरा आरएफपी डॉक्यूमेंट एक मेगा घोटाले का दस्तावेज है।
संघर्ष समिति ने कहा कि जैसे पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों को बेचने के लिए रिजर्व प्राइस नगण्य कर दी गई है इसी प्रकार ए टी एंड सी हानियां बहुत अधिक दिखाकर आगरा शहर की बिजली व्यवस्था अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के तहत टोरेंट पावर को दे दी गई थी। इसका परिणाम यह है कि टोरेंट पावर कंपनी प्रतिवर्ष 800 करोड रुपए का मुनाफा कमा रही है और पावर कारपोरेशन को लगभग 1000 करोड़ का घाटा हो रहा है। एक बार फिर मात्र 6500 करोड रुपए की रिजर्व प्राइस पर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को बेचकर एक बड़े घोटाले की पृष्ठभूमि तैयार की गई है।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग ने निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट को निरस्त न किया तो विरोध दर्ज करने के लिए बिजली कर्मी नियामक आयोग पर मौन प्रदर्शन करने हेतु विवश होंगे।
संघर्ष समिति ने बताया कि पता चला है कि निदेशक वित्त श्री निधि नारंग ने निजीकरण से सम्बंधित 10 से अधिक फाइलों की छाया प्रति कराकर उसे अपने पास रख लिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि यह सच है तो यह बहुत ही गंभीर बात है। संघर्ष समिति जुलाई से ही आरोप लगाती रही है कि निदेशक वित्त का कमरा सील किया जाए अन्यथा श्री निधि नारंग गोपनील दस्तावेज बाहर लेजाएंगे।
आज अवकाश के दिन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के पदाधिकारियों ने आपस में विचार विमर्श किया और सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक जन संपर्क कर निजीकरण के नाम पर हो रहे घोटाले और लूट से लोगों को अवगत कराया।
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पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा श्री निधि नारंग के सेवा विस्तार हेतु भेजे गए पत्र से बिजली कर्मचारियों में भारी गुस्सा व्याप्त : निजीकरण के नाम पर हो रही लूट को रोकने की मुख्य सचिव से अपील : निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के नए मुख्य सचिव श्री शशि प्रकाश गोयल से अपील की है कि वह पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा निदेशक वित्त निधि नारंग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी न दें और उत्तर प्रदेश में निजीकरण के नाम पर हो रही है भारी लूट को रोकने की कृपा करें।
संघर्ष समिति ने निधि नारंग को सेवा विस्तार देने का पत्र भेजने के मामले में डॉक्टर आशीष गोयल पर गंभीर आरोप लगाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसा लगता है कि पॉवर कारपोरेशन का अध्यक्ष रहते हुए डॉक्टर आशीष गोयल ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम कर रहे हैं और निजी घरानों का हित देख रहे हैं। संघर्ष समिति ने सवाल किया कि आखिर डॉक्टर आशीष गोयल एक व्यक्ति विशेष को बार-बार सेवा विस्तार देने के लिए क्यों लालायित हैं । कहीं यह सब निजी घरानों से मिली भगत का परिणाम तो नहीं है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि यह पता चला है कि पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल ने शासन को एक पत्र भेज कर पावर कॉरपोरेशन के निदेशक वित्त श्री निधि नारंग का कार्यकाल छह माह और बढ़ाए जाने का प्रस्ताव किया है।
उल्लेखनीय है कि 30 जुलाई को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा श्री निधि नारंग के कार्यकाल को बढ़ाए जाने के पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल के 14 जुलाई के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया गया है।
संघर्ष समिति ने बताया कि यह पता चला है कि श्री निधि नारंग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के प्रस्ताव में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल ने लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया अभी अधूरी है और श्री निधि नारंग निजीकरण हेतु बनाई गई टेंडर मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष है। अतः उनका कार्यकाल 06 महीने के लिए और बढ़ा दिया जाए जिससे निजीकरण की प्रक्रिया सुगमता से पूरी हो सके।
संघर्ष समिति ने नव नियुक्त मुख्य सचिव श्री शशि प्रकाश गोयल को प्रेषित पत्र में कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया में निदेशक वित्त श्री निधि नारंग की भूमिका प्रारंभ से ही बहुत विवादास्पद रही है।
संघर्ष समिति ने पत्र में लिखा है कि श्री निधि नारंग की निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसलटेंट नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया में हितों के टकराव का प्राविधान हटवाने में बड़ी भूमिका रही है। निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को झूठा शपथ पत्र देने के मामले में भी श्री निधि नारंग ने ही क्लीन चिट दी है।
संघर्ष समिति ने लिखा है कि निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन की निदेशक वित्त श्री निधि नारंग से बहुत व्यक्तिगत निकटता है। यह आम चर्चा रही है कि ग्रांट थॉर्टन के लोग अधिकांश समय श्री निधि नारंग के कमरे में ही बैठकर काम करते थे और श्री निधि नारंग उन्हें गोपनीय पत्रावली भी दिखते थे।
संघर्ष समिति ने कहा कि श्री निधि नारंग को तीसरी बार सेवा विस्तार देने का पत्र भेज कर पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल घोटाले के केंद्र बिंदु में आ गए हैं। निधि नारंग को निजीकरण के नाम पर पहले ही दो बार आशीष गोयल की अनुशंसा पर सेवा विस्तार दिया जा चुका है। अब एक बार फिर निजीकरण के नाम पर श्री निधि नारंग को छह माह का सेवा विस्तार देना सर्वथा अनुपयुक्त होगा। विशेषतया तब जब श्री निधि नारंग की कॉर्पोरेट घरानों के साथ निकटता जग जाहिर है और ट्रांजैक्शन कंसलटेंट, कॉर्पोरेट घराने, निधि नारंग और डॉ आशीष गोयल की निजीकरण की प्रक्रिया में मिली भगत है।
संघर्ष समिति ने मुख्य सचिव से मांग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए श्री निधि नारंग को किसी भी कीमत पर सेवा विस्तार न दिया जाय।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 246 वें दिन बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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जो मंत्री अपने कर्मचारियों से नहीं मिल सकता, जो मंत्री जनता से नहीं मिल सकता है, जो मंत्री अपने समझौते का पालन नहीं करा सकता है, जो मंत्री लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे कर्मचारियों का दमन और उत्पीड़न कर पुलिस की दम पर अपने ऊर्जा विभाग का निजीकरण करने पर तुला है उसे लोकतंत्र में मंत्री के पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है, उन्हें तत्काल व्यापक जनहित में अपना इस्तीफा देना चाहिए।
जब से ऊर्जा मंत्री जी आए हैं तब से प्रदेश की गरीब जनता परेशान है, बिजली कर्मचारी परेशान है, किसान परेशान है, युवा परेशान है, छात्र परेशान है, आरक्षण खतरे में है।
माननीय ऊर्जा मंत्री जी का एकमात्र उद्देश्य है कि कितनी जल्दी सरकारी संपत्तियों और सरकारी जमीनों को कौड़ियों के भाव अपने पूंजीपति मित्रों को सौंप दें, फिर ना रहेगा विभाग, ना रहेगी नौकरी, और ना रहेगा आरक्षण।
लेकिन ऊर्जा मंत्री जी बिजली कर्मचारी प्रदेश की सरकारी संपत्तियों को नहीं बिकने देंगे, ऊर्जा विभाग नहीं बिकने देंगे, जनता को लालटेन युग में नहीं जाने देंगे और बाबा साहब द्वारा दिया गया आरक्षण समाप्त नहीं होने देंगे।
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चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में फर्जी आंकड़ों के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री जी को गुमराह कर किए जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में आज राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश भर में हुए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन। बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के गांव-गांव घर-घर तक बिजली पहुंचाने का काम किया है अब बिजली के निजीकरण के बाद यह सारे गांव लालटेन युग में पहुंचने वाले हैं।
कुछ ब्यूरोक्रेट्स, राजनेता, बड़े पूंजीपतियों के साथ मिलकर बिजली के निजीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला करने की फिराक में है।
माननीय मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि निजीकरण के नाम पर हो रहे घोटाले को रोके तथा गरीबों के हित में, किसानो के हित में, छोटे व्यापारियों के हित में, कर्मचारियों के हित में, छात्रों के हित में, बेरोजगार के हित में, सरकारी विभागों में पिछड़ों एवं दलितों का आरक्षण बचाने के लिए व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त करने की कृपा करें।
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निजीकरण हेतु बढ़ा चढ़ा कर घाटा दिखाने पर संघर्ष समिति ने उठाया सवाल : निजी घरानों को बेजा मुनाफा पहुंचाने की साजिश की जांच की मांग : 22 जून की महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं ट्रांसपेरेन्सी इंटरनेशलन के कार्यकारी निदेशक सम्मिलित होंगे : 22 जून को बिजली महापंचायत में व्यापक जन आन्दोलन का फैसला लिया जायेगा :
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने आरोप लगाया है कि निजी घरानों को बेजा मुनाफा पहुंचाने के लिए पॉवर कारपोरेशन ने आर एफ पी डाक्यूमेंट में बढ़ा चढ़ा कर घाटा दिखाया है। संघर्ष समिति ने इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। 22 जून की महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं ट्रांसपेरेन्सी इंटरनेशलन के कार्यकारी निदेशक सम्मिलित होंगे। 22 जून को बिजली महापंचायत में व्यापक जन आन्दोलन का फैसला लिया जायेगा।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन द्वारा विद्युत नियामक आयोग को निजीकरण हेतु सौंपे गये आर एफ पी डॉक्यूमेंट में 45 हजार करोड़ रूपये का घाटा दिखाया गया है जो पूर्णतया निराधार और भ्रामक है। दरअसल निजी घरानों को बेजा मदद पहुंचाने के लिए पॉवर कारपोरेशन ने बढ़ा चढ़ा कर घाटा दिखाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे के उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सब्सिडी को पॉवर कारपोरेशन घाटे में जोड़ कर दिखा रहा है। जबकि इस सब्सिडी की धनराशि को देना सरकार का दायित्व होता है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के आर एफ पी डाक्यूमेंट में निजीकरण के बाद पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद 9102 करोड़ रूपये की सब्सिडी देने की बात कही गयी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में सब्सिडी को पॉवर कारपोरेशन घाटे में जोड़ रहा है वहीं दूसरी ओर निजी घरानों के लिए सब्सिडी की धनराशि का अग्रिम भुगतान करने को तैयार है। इससे साफ होता है कि बढ़ा कर दिखाया गया घाटा गलत और भ्रामक है तथा आकड़ों की यह कलाबाजी केवल निजी घरानों को मुनाफा देने के लिए की जा रही है।
22 जून को लखनऊ में होने वाली बिजली महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दर्शन पाल और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इण्डिया के कार्यकारी निदेशक रमानाथ झा ने आने की सहमति दे दी है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष श्री अवधेश कुमार वर्मा भी महापंचायत में सम्मिलित होंगे। अन्य प्रान्तों के बिजली कर्मचारियों और अभियन्ताओं के संगठनों के कई पदाधिकरी महापंचायत में सम्मिलित होने आ रहे हैं। इसके अतिरिक्त बड़े पैमाने पर किसान, मजदूर, अधिवक्ता, मजदूर नेता, छात्र नेता, बुद्धिजीवी, उपभोक्ता संगठनों के पदाधिकारी और बिजली कर्मी बड़ी संख्या में सम्मिलित होंगे।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दर्शन पाल ने कहा है कि बिजली के निजीकरण के विरोध में हमेशा से ही किसान वर्ग रहा है। डॉ दर्शन पाल ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले उत्तर प्रदेश के लाखों किसान बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आन्दोलन का न केवल समर्थन करेंगे अपितु उसमें सक्रिय रूप से सम्मिलित होंगे।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन इण्डिया के कार्यकारी निदेशक और मा. सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता रमानाथ झा ने कहा है कि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन ने अवैध ढंग से नियुक्त किये गये ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रान्ट थॉर्टन के झूठा शपथ पत्र देने और फर्जीवाड़ा करने के मामले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक माह पूर्व पत्र लिखकर जांच की मांग की थी। ऐसा लगता है कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन और शासन में बैठे उच्च अधिकारियों ने निहित स्वार्थ के चलते ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन का पत्र दबा दिया है। बिजली महापंचायत में निजीकरण के पीछे हो रहे मेगा घोटाले को ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन उठायेगी।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि बिजली महापंचायत में भारी संख्या में उपभोक्ता सम्मिलित होंगे और किसी भी कीमत पर निजीकरण के बाद प्रदेश को लालटेन युग में नहीं जाने देंगे।
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पॉवर कारपोरेशन में स्थानांतरण में बड़े पैमाने पर लेन देन के आरोप के बीच संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच कराने की मांग की: स्थानांतरण के विरोध में पूर्वांचल डिस्काम पर 19 जून से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह: प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन जारी:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि पावर कारपोरेशन में बड़े पैमाने पर किए गए स्थानांतरण में पैसे के लेनदेन के आरोप की सीबीआई से उच्च स्तरीय जांच कराएं। स्थानांतरण में लेनदेन और स्थानांतरण के नाम पर उत्पीड़न के विरोध में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर 19 जून से बिजली कर्मचारी अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करेंगे। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 203 वें दिन प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि पावर कारपोरेशन में हजारों की तादाद में किए गए नीति विरुद्ध स्थानांतरण आदेशों की उच्च स्तरीय सीबीआई जांच कराएं। संघर्ष समिति ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन में लगभग 1500 अभियंताओं को स्थानांतरित किया गया है, इतने ही जूनियर इंजीनियरों को स्थानांतरित किया गया है और कई हजार छोटे कर्मचारियों को स्थानांतरित किया गया है। इनमें से अधिकांश स्थानांतरण बिना किसी नीति की किए गए हैं।
स्थानांतरण में बड़े पैमाने पर लेनदेन की बात भी सामने आ रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि लेनदेन को लेकर माननीय ऊर्जा मंत्री और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक का एक ऑडियो वायरल होने के बाद बिजली कर्मचारियों का गुस्सा और बढ़ गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि इस ऑडियो के वायरल होने के बाद स्थानांतरण के मामले में उच्च स्तरीय सीबीआई जांच बहुत जरूरी हो गई है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्व में भी पावर कारपोरेशन में स्थानांतरण को लेकर लगे आरोपों के चलते माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप किया था। इसके बाद से जो भी स्थानांतरण होते हैं वह माननीय सर्वोच्च न्यायालय की हाई पावर कमेटी के सामने रखे जाते हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के मौजूदा प्रबंधन द्वारा और खासकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा किए गए स्थानांतरण आदेशों में लेनदेन की बात सामने आने के बाद संघर्ष समिति माननीय सर्वोच्च न्यायालय को भी सारे घटनाक्रम से संज्ञानित कराएगी।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा निजीकरण हेतु उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए स्थानांतरण आदेशों के विरोध में 19 जून से वाराणसी के बिजली कर्मी प्रबंध निदेशक के कार्यालय पर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करेंगे। पूर्वांचल की संघर्ष समिति ने प्रबंध निदेशक को कल नोटिस दे दिया था जिसमें लिखा गया है कि यदि उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए तमाम स्थानांतरण आदेश निरस्त न किए गए तो 19 जून से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह किया जाएगा। इससे उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की सारी जिम्मेदारी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक की होगी।
संघर्ष समिति ने बताया कि स्थानांतरण के खेल में लेनदेन के आरोप तो लग ही रहे हैं । साथ ही उत्पीड़न की दृष्टि से भी बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किए गए हैं। यहां तक कि छोटे पदों पर कार्य करने वाली महिला कर्मियों को भी बड़ी संख्या में सुदूर स्थानांतरित किया गया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन में स्थानांतरण एक उद्योग बन गया है जिससे मुख्यमंत्री जी की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं।
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सप्ताहांत में संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री और प्रबंधन से पूछे पांच नये सवाल: 22 जून की बिजली महा पंचायत में बिजली कर्मियों के परिवार भी सम्मिलित होंगे: अवकाश के दिन आवासीय कालोनियों में सभाओं का दौर:
निजीकरण के विरोध में चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत संघर्ष समिति ने सप्ताहांत में निजीकरण को लेकर ऊर्जा मंत्री और पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पांच नए सवाल पूछे हैं। 22 जून को लखनऊ में हो रही बिजली महापंचायत में बिजली कर्मियों के साथ उनके परिवार माता, पिता, पत्नी और बच्चे भी सम्मिलित होंगे।
घाटे के नाम पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है। पहला प्रश्न है - क्या यह सच है कि वर्ष 2024 - 25 में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ने कई निजी घरानों के उत्पादन घरों से एक भी यूनिट बिजली नहीं खरीदी और इन निजी घरानों को फिक्स कॉस्ट के एवज में 6761 करोड रुपए का भुगतान किया है ? यदि यह सच है तो इतने बड़े घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप कर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
सरकारी क्षेत्र में विद्युत उत्पादन निगम से 04 रुपए 26 पैसे प्रति यूनिट की दर पर बिजली मिलती है और जल विद्युत की बिजली मात्र 01रुपए प्रति यूनिट की दर पर मिलती है। सरकार ने बिजली उत्पादन के लिए उत्पादन निगम और जल विद्युत निगम में नए बिजली घरों की स्थापना नहीं की ।इस कारण बिजली की मांग को पूरा करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर निजी घरानों से काफी महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है । दूसरा प्रश्न है- क्या यह सच है कि के एस के महानंदी से 11 रुपए 58 पैसे प्रति यूनिट, बजाज के छोटे बिजली घरों से 10 रुपए प्रति यूनिट, ललितपुर से 06.50 रुपए प्रति यूनिट,रोजा से 06.05 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी जा रही है ? यदि यह सच है तो इससे होने वाले हजारों करोड़ रुपए के घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप कर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
ऊर्जा मंत्री कह रहे हैं कि सरकार ने पाया है कि निजी कंपनियों के पास समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर तकनीक और प्रबंध कौशल है। दिल्ली में रिलायंस बीएसईएस की दो कंपनियां बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर पिछले 23 वर्ष से काम कर रही है। 23 वर्ष काम करने के बाद रिलायंस की इन दोनों कंपनियों का बेहतर प्रबंधन कौशल यह है कि इन कंपनियों पर दिल्ली जैसे छोटे राज्य में 25000 करोड रुपए से ज्यादा का दिल्ली की पावर यूटिलिटीज का बकाया हो गया है। दिल्ली ट्रांस्को का 10000 करोड रुपए का बकाया है, प्रगति पावर जनरेशन लिमिटेड का 5600 करोड रुपए का बकाया है और इंद्रप्रस्थ पावर जेनरेशन कंपनी का 5000 करोड रुपए का बकाया है। तीसरा प्रश्न है - क्या यह सच है कि दिल्ली की भाजपा सरकार निजी क्षेत्र की विफलता को देखते हुए बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई करने जा रही है ? यदि यह सच है तो भारत की राजधानी में निजी क्षेत्र की इतनी बड़ी विफलता को देखते हुए भी उत्तर प्रदेश के बेहद गरीब 42 जनपदों पर निजीकरण क्यों थोपा जा रहा है ?
ग्रेटर नोएडा का निजीकरण 1993 में किया गया था। ग्रेटर नोएडा एक औद्योगिक और वाणिज्य क्षेत्र है। ग्रेटर नोएडा में बिजली का लगभग 84% भार औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं का है जिनसे मुनाफा मिलता है। ग्रेटर नोएडा में कार्य कर रही नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का घाटे वाले क्षेत्र मसलन किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं के प्रति बिजली आपूर्ति का व्यवहार अच्छा नहीं है। चौथा प्रश्न है - क्या यह सच है कि उत्तर प्रदेश सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में ग्रेटर नोएडा में नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कराने का मुकदमा लड़ रही है ? यदि यह सच है तो जो निजीकरण औद्योगिक और वाणिज्य क्षेत्र में विफल हो गया है उसे पूर्वांचल और बुंदेलखंड की बेहद गरीब जनता पर क्यों थोपा जा रहा है ?
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड कई निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीद रहा है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय लेने के बाद यह पता चला है कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को सबसे सस्ते बिजली क्रय करार आवंटित किए गए हैं । पांचवा प्रश्न है - यदि यह सच है तो निजीकरण के ठीक पहले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की सबसे सस्ते पावर परचेज एग्रीमेंट आवंटित करना क्या प्रस्तावित निजीकरण के बाद निजी घरानों की परोक्ष रूप से मदद करना नहीं है ?
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आज रात लगभग 9:53 बजे उत्तर प्रदेश में 31059 MW विद्युत आपूर्ति कर नया कीर्तिमान स्थापित: गत वर्ष रिकार्ड 30618 MW विद्युत आपूर्ति की गयी थी: आगे और रिकॉर्ड आपूर्ति के लिए तैयारी पूरी: माo मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी के मार्गदर्शन में प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति हेतु विद्युत अभियन्ताओं के अहर्निश प्रयास जारी है।
माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि इन ऐतिहासिक उपलब्धियो को ध्यान में रखते हुए व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त किया जाए।
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*उप्र के बिजली कर्मियों के समर्थन में दिल्ली में 09 जून को नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी की मीटिंग में लिया जाएगा निर्णय: संघर्ष समिति की ऑनलाइन मीटिंग में 22 जून की महा पंचायत की तैयारी: निजीकरण पर प्रबन्धन से पूछे पांच और सवाल*
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रांतीय पदाधिकारियों की आज ऑनलाइन मीटिंग हुई । इस मीटिंग में निजीकरण के विरोध में विगत छह माह से चल रहे आंदोलन की समीक्षा की गई और आगामी 22 जून को लखनऊ में होने वाली किसानों, उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों की महापंचायत की तैयारी और महापंचायत में रखे जाने वाले प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
ऑनलाइन बैठक में सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर से संकल्प व्यक्त लिया कि छह माह तो कुछ भी नहीं है, निजीकरण के विरोध में आंदोलन तब तक चलता रहेगा जब तक निजीकरण का फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता।
प्रत्येक सप्ताह के शनिवार और रविवार को निजीकरण पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे जाने वाले पांच प्रश्नों के क्रम में संघर्ष समिति ने कल पांच प्रश्न पूछे थे आज पांच और प्रश्न पूछे।
पहला प्रश्न - क्या निजी कॉरपोरेट घरानों की सहूलियत की दृष्टि से निजीकरण के पहले ही बड़े पैमाने पर लगभग 45% संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है, हटा दिया गया है ? भीषण गर्मी में अनुभवी संविदा कर्मियों को हटाए जाने से क्या बिजली आपूर्ति प्रभावित नहीं हो रही है ? क्या प्रबन्धन बिजली व्यवस्था बिगाड़ कर निजीकरण थोपना चाहता है?
दूसरा प्रश्न - निजीकरण पर पॉवर कारपोरेशन द्वारा जारी frequently asked questions प्रपत्र में लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण नहीं हो रहा है अपितु पी पी पी मॉडल पर सुधार हेतु निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है जिसमें निजी क्षेत्र की 51% और सरकारी ।क्षेत्र की 49% भागीदारी होगी जो लगभग बराबर ही है। प्रश्न यह है कि जिसकी 51% भागीदारी होती है क्या उसका मालिकाना हक नहीं होता ? निजी क्षेत्र की 51% भागीदारी ग्रेटर नोएडा में है । क्या ग्रेटर नोएडा की कंपनी नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड निजी कंपनी नहीं है ?
तीसरा प्रश्न है - पॉवर कारपोरेशन कह रहा है कि निजीकरण इसलिए किया जा रहा है क्योंकि घाटा बढ़ता जा रहा है और घाटे की भरपाई के लिए सरकार को सब्सिडी एवं लास फंड देना पड़ रहा है जो बढ़ता ही जा रहा है और जिस बोझ को अब आगे सरकार वहन नहीं कर सकती । सब्सिडी को घाटा बताना और घाटे में जोड़ना एक बहुत गंभीर बात है। भारतीय जनता पार्टी ने 2017 में जारी किए गए अपने संकल्प पत्र में लिखा था कि गरीबी की रेखा के नीचे रहने वालों को मात्र 03 रुपए प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जाएगी। इसकी सब्सिडी देना सरकार की बाध्यता है। सवाल है कि पॉवर कारपोरेशन स्पष्ट करे कि क्या निजीकरण के बाद सरकार सब्सिडी की धनराशि नहीं देगी ? यदि निजीकरण के बाद सरकार सब्सिडी की धनराशि देगी तो सरकारी क्षेत्र को यह धनराशि देना बोझ कैसे है ?
चौथा प्रश्न है - 51% हिस्सेदारी बेचकर निजीकरण करने से क्या सुधार की गारंटी है ? उड़ीसा में 1999 में चार विद्युत वितरण कंपनियां बनाकर निजी क्षेत्र को 51% हिस्सेदारी दी गई थी। एक निजी कंपनी अमेरिका की ए ई एस कम्पनी ने चक्रवात में ध्वस्त हुए बिजली के नेटवर्क को बनाने से इनकार कर दिया और यह कंपनी एक साल बाद ही भाग गई। 16 साल के बाद फरवरी 2015 में उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग ने सुधार में पूर्णतया विफल रहने के कारण अन्य तीनों विद्युत वितरण कंपनियों का लाइसेंस निरस्त कर दिया था। क्या गारंटी है कि जो उड़ीसा में हुआ वह निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में नहीं होगा ?
पांचवां सवाल है - माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने ट्वीट किया है कि 2017 में 41% ए टी एंड सी हानियों से घटकर 2024 में ए टी एंड सी हानियां 16.5% रह गई हैं। यह उत्तर प्रदेश में बिजली सेक्टर में मा योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में बहुत बड़ा सुधार है। सवाल है कि ऊर्जा मंत्री इतने बड़े सुधार का दावा कर रहे हैं जो आंकड़ों की दृष्टि से सही भी है तो किस अन्य (?) सुधार के लिए उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों का एक साथ निजीकरण किया जा रहा है ?
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*निजीकरण के विरोध में 22 जून को होने वाली बिजली महापंचायत में किसानों और उपभोक्ताओं के बड़े राष्ट्रीय संगठन सम्मिलित होंगे: निजीकरण को लेकर संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे पांच सवाल*
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले आगामी 22 जून को लखनऊ में होने वाली बिजली महापंचायत में देश के किसानों और उपभोक्ताओं के कुछ बड़े संगठन सम्मिलित होंगे। संघर्ष समिति ने बताया कि बिजली महापंचायत का ऐलान होते ही कई संगठनों ने संघर्ष समिति से संपर्क किया है। संघर्ष समिति ने आज पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से निजीकरण पर पांच प्रश्न पूछे हैं। संघर्ष समिति ने कहा है कि प्रत्येक शनिवार और रविवार को संघर्ष समिति 5 - 5 प्रश्न निजीकरण को लेकर प्रबंधन से पूछेगी।
संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से आज पांच प्रश्न पूछे जो निम्नवत है।
पहला प्रश्न है कि ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी ने 06 जून को चंडीगढ़ में हुए विद्युत मंत्रियों के सम्मेलन में कहा है कि उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम है। सवाल यह है कि जब सरकारी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम हो गई है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
दूसरा प्रश्न है कि यदि घाटे के नाम पर निजीकरण किया जा रहा है तो चंडीगढ़ और दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव जहां ए टी एंड सी हानियां क्रमशः तीन प्रतिशत और 8% थी, और इन दोनों स्थानों पर विद्युत विभाग मुनाफे में था तो दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव और चंडीगढ़ का बिजली का निजीकरण क्यों किया गया ?
तीसरा प्रश्न है कि दिल्ली में निजीकरण के 22 साल बाद भी दिल्ली विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए उपभोक्ताओं के बिजली बिल में निजी कंपनियां 07% की दर से पेंशन का सरचार्ज वसूलती है तो सवाल है कि निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पेंशन देने के एवज में निजी कंपनियां उपभोक्ताओं से कितने प्रतिशत सरचार्ज वसूलेंगी ?
चौथा प्रश्न है कि निजीकरण के बाद बिजली कनेक्शन देने के लिए क्या निजी कंपनियों को उपभोक्ताओं से मनमाना बिल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा ? उदाहरण के तौर पर 12 फरवरी 2025 को आगरा में टोरेंट पावर के एक बिल की कॉपी संलग्न की जा रही है जिसमें 02 किलो वाट का कनेक्शन देने के लिए उपभोक्ता से 09 लख रुपए वसूल गया है । उपभोक्ता द्वारा 09 लाख रुपए के भुगतान की रसीद भी संलग्न है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। क्या निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल की गरीब जनता के साथ यही होने जा रहा है ?
और पांचवा प्रश्न यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण होने के बाद गरीब किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी या नहीं ? उदाहरण के तौर पर ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के 34 साल बाद भी किसानों को सब्सिडी नहीं मिलती जबकि पूरे प्रदेश में किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों के बारे में प्रत्येक शनिवार और रविवार को संघर्ष समिति पांच - पांच प्रश्न पूछेगी। शनिवार को आम उपभोक्ताओं के विषय में प्रश्न पूछे जाएंगे और रविवार को कर्मचारियों के विषय में प्रश्न पूछे जाएंगे।
आज अवकाश का दिन होने के कारण बावजूद बिजली कर्मचारियों ने सभी जनपदों परियोजनाओं और राजधानी लखनऊ आपस में बैठक कर निजीकरण के विरोध चल रहे आंदोलन को और तेज और सशक्त बनाने पर विचार विमर्श किया।
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@UPGovt@UPPCLLKO@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
@UPRVPAS@narendramodi@PMOIndia@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat निजीकरण करने को उतावला प्रबंधन कार्मिकों को निजी कंपनी में काम करने के अनेको लाभ बता रहा है सर्वप्रथम प्रबंधन में उच्चपदस्थ पर बैठे अधिकारियो को अपने पद से इस्तीफा देकर निजी कंपनी का प्रबंधक बनकर एक मिसाल देना चाहिए।दूसरों को ज्ञान देना सबको अच्छा लगता है।
निजीकरण के नाम पर हो रहे घोटालों पर पर्दा डालने के लिए अभियंताओं और कर्मचारियों का किया जा रहा है दमन: 16 किसान संगठन निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों के साथ आए: 04 जून को प्रदेश के सभी जनपदों में किसानों का विरोध प्रदर्शन: ग्रांट थॉर्टन के साथ मिली भगत कर घोटाला करने वाले निदेशक वित्त निधि नारंग पर कार्यवाही न होने से बिजली कर्मियों में गुस्सा:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के नाम पर विगत 06 माह से हो रहे अनियमितताओं और घोटालों का खुलासा होने के बाद ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी को चुप्पी तोड़नी चाहिए और निजी कंपनी के साथ मिली भगत कर घोटाला करने वाले निदेशक वित्त निधि नारंग पर तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि कि सारा घोटाला पावर कारपोरेशन के चेयरमैन की नाक नीचे हो रहा है और घोटाला करने वाले निदेशक वित्त निधि नारंग पर कार्यवाही करने के बजाय पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन अभियंताओं और कर्मचारियों का दमन करने में लगे जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है।
16 किसान संगठनों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आगामी 04 जून को समस्त जनपदों में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा के साथ एक मंच पर आए 16 किसान संगठनों की मुख्य मांग है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाए, बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी तथा स्मार्ट मीटर लगाने का प्रस्ताव वापस लिया जाए तथा 300 यूनिट तक किसानों को मुफ्त बिजली दी जाए। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं का उत्पीड़न किया गया तो किसान संगठन उनके साथ खड़े होंगे और ऐसी किसी भी उत्पीड़नात्मक कार्यवाही का जोरदार विरोध किया जाएगा।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि विगत 06 माह से निजीकरण के विरोध में चल रहे शांतिपूर्ण ध्यानाकर्षण आंदोलन से बौखलाए प्रबंधन और पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन ने निजीकरण के उतावलेपन में कर्मचारियों और अभियंताओं पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही प्रारंभ कर दी है जिससे बिजली कर्मियों में बहुत गुस्सा है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों और अभियंताओं का उत्पीड़न की दृष्टि से ट्रांसफर किया जा रहा है, उनका वेतन काटा जा रहा है, उन्हें चेतावनी दी जा रही है, कर्मचारी सेवा विनियमावली में आलोकतांत्रिक संशोधन किया गया है जिससे कार्य का वातावरण में बिगड़ रहा है और ऊर्जा निगमों में अनावश्यक तौर पर औद्योगिक अशांति फैल रही है।
उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति का लगातार निर्देश है कि आंदोलन के दौरान आम उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।उपभोक्ताओं की समस्याओं को तुरंत अटेंड किया जा रहा है। बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने उपभोक्ता सेवा में कोई व्यवधान न होने देने का संकल्प लिया है किन्तु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के नाम पर उन्हें घंटों एक जगह बांधे रखना, उनके साथ अमर्यादित और अभद्र भाषा का प्रयोग करना, उनका अपमान करना, उन्हें धमकी देना यह सब केवल निजीकरण के लिए किया जा रहा है जिसे बिजली कर्मी स्वीकार नहीं करते। संघर्ष समिति चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों का उत्पीड़न किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
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🚨 लखनऊ : शक्ति भवन पर बिजली कर्मियों का धरना प्रदर्शन 🚨
⚡ बिजली निजीकरण के खिलाफ कर रहे हैं कर्मचारी प्रदर्शन
👮♂️ बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स शक्ति भवन पर तैनात
🚧 पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर सुरक्षा व्यवस्था की कड़ी
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