"संस्कार पद्धति की यही विशेषता होती है, कि किसी भी ज्ञान को हजम कराना है तो उसे धीरे-धीरे देना चाहिए। एक ही दिन में बहुत-सा गरिष्ठ भोजन स्वास्थ्य को लाभ के बजाय हानि पहुंचाता है।"
पूज्य श्री तनसिंह जी ('समाज चरित्र' पुस्तक से साभार)
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"असावधानी इस बात का प्रमाण है, कि व्यक्ति को जहाँ जिस समय उपस्थित रहना चाहिए, वहाँ भौतिक रूप में उपस्थित होकर भी मानसिक रूप में गायब हो जाता है। यह उसकी एकाग्रता और ध्येय निष्ठा के दोष हैं। साधक जब असावधानी करता है, तब इससे बढ़कर अपने प्रति कोई अन्याय नहीं करता।" 1/2
आज ऐसे क्षत्रिय महापुरुष गोगादेव चौहान को स्मरण करने का दिन है जिन्होंने अपनी कोई प्रत्यक्ष जिम्मेदारी न होते हुए भी आगे बढ़कर देश-धर्म की रक्षार्थ संघर्ष को स्वीकार किया, यह ऐसे वीर है, जिन्हें आज गोगाजी के नाम से लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है। मंदिर लूट कर जाते हुए महमूद गजनवी से संघर्ष करने की उनकी कोई प्रत्यक्ष जिम्मेदारी नहीं थी न उनके राज्य को कोई खतरा था। परंतु आर्य संस्कृति के मानबिन्दुओं का अपमान करके अपनी लोलुपता में अनाचार करने वाले आततायी से संघर्ष करने के लिए केवल एक ही कारण पर्याप्त था और वह था - क्षात्रधर्म। इसी क्षात्रधर्म के पालन के लिए गोगादेव जी ने आस-पास के सभी राजाओं को महमूद गजनवी पर आक्रमण के लिए बुलाया। दुर्भाग्यवश जब अन्य राजा समय पर नहीं पहुंच सके तो अपने 400-500 सैनिकों व परिवार जनों के साथ गजनवी की हजारों की फौज से संघर्ष करने से बचने के लिए परिस्थितियों पर दोष डालना अस्वाभाविक नहीं होता। परंतु कर्त्तव्यपालन के मार्ग में परिस्थितियों के बंधन और मृत्य के भय के बहानों को सच्चा क्षत्रिय स्वीकार नहीं करता। वह तो ऐसी मृत्यु को सौभाग्य मानता है और इसीलिए गोगादेव जी ने 80 वर्ष की उम्र में अपने परिवार जनों और सैनिकों के साथ अपना बलिदान कर कर्त्तव्य की मांग को पूरा किया। इसी बलिदान के कारण आज भी वे जनमानस में देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
गोगा नवमी पर हम भी कर्त्तव्य की मांग को पहचानें और आगे बढ़कर क्षत्रियोचित संघर्ष में प्रवृत्त हो सकें ऐसी प्रार्थना करते हुए इन महापुरुष के चरणों में शत-शत वंदन।
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कोसंबा (सूरत) में चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ
सूरत के कोसंबा स्थित श्री सरदार सिंह राणा कम्युनिटी हॉल में श्री क्षत्रिय युवक संघ का चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर 04 सितंबर को प्रारंभ हुआ। 1/2
गुड़ा चतुरा (पाली) में चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ
पाली संभाग में गुड़ा चतुरा स्थित नागणेची माता मंदिर में श्री क्षत्रिय युवक संघ का चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर 03 सितंबर को प्रारंभ हुआ जिसका संचालन जब्बर सिंह लूणा खुर्द द्वारा किया जा रहा है। 1/2
निम्बाऊ (भीनमाल) में चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन
जालोर संभाग में भीनमाल के निम्बाऊ गांव में श्री क्षत्रिय युवक संघ का चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर 03से 06सितंबर तक आयोजित हो रहा है। ईश्वरसिंह सांगाना के संचालन में इस शिविर में 111 शिविरार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
नापासर में लोकदेवता हड़बू जी की जयंती समारोह का आयोजन
बीकानेर संभाग के नापासर में स्थित हड़बू जी मंदिर परिसर में लोकदेवता हड़बू जी सांखला की जयंती 02 सितंबर को श्री क्षत्रिय युवक संघ के तत्वावधान में मनाई गई। 1/2
वाराणसी के प्रसिद्ध उदय प्रताप काॅलेज के संस्थापक एवं शिक्षा व समाज सेवा के क्षेत्र में प्रेरणादायक कार्य कर राजर्षि की उपाधि से विभूषित राजा उदयप्रताप सिंह की जयंती पर सादर वंदन।
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"कुटिलता और प्रदर्शन किसी को धोखा देने में अवश्य सफल हो सकते हैं पर हम स्वयं भी उस धोखे से अपने आपको नहीं बचा पाते।"
पूज्य श्री तनसिंह जी की 'डायरी' से साभार
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राजस्थान के प्रमुख लोकदेवता, शकुनशास्त्र के ज्ञाता, ओरण व गौरक्षक, दीन-दुखियों व निर्बलों की जीवन पर्यंत सेवा करने वाले, चमत्कारिक सिद्धपुरुष श्री हड़बूजी सांखला (परमार) के अवतरण दिवस पर उन्हें सादर वंदन।
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माननीय संघप्रमुख श्री का निर्देश था कि इस बार राष्ट्रनायक दुर्गादास जी की जयंती की आंग्ल तिथि से लेकर भारतीय पंचांग तिथि तक दायित्व बोध पखवाड़े के रूप में प्रतिदिन उनका पुण्य स्मरण किया जाये। 1/2
भाटियों की ढाणी (बायतु) में चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न
बालोतरा संभाग के बायतु प्रांत में भाटियों की ढाणी में श्री क्षत्रिय युवक संघ का चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आज 30 अगस्त को संपन्न हुआ। शिविर का संचालन जसवंत सिंह बुड़ीवाड़ा द्वारा किया गया 1/2
"जो यह मानता हो, कि मैं तो सिर्फ साधन मात्र हूँ, वस्तुतः कार्य तो प्रकृति कराती है, वही गीता की कर्म-प्रणाली को तात्विक दृष्टि से देखता है। प्रकृति के विरुद्ध ज्ञानी की चेष्टा भी व्यर्थ है।"
पूज्य श्री तनसिंह जी ('गीता और समाज सेवा' पुस्तक से साभार)
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मोटा मेसरा (गुजरात) में चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न
उत्तर गुजरात संभाग के थराद प्रांत के मोटा मेसरा गांव में श्री क्षत्रिय युवक संघ का चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर 28 से 31 अगस्त तक आयोजित हुआ। 1/2
सिलवासा में वीरांगना वंदन कार्यक्रम का आयोजन
श्री क्षत्रिय युवक संघ के दक्षिण गुजरात संभाग के वापी प्रांत के सिलवासा में स्थित लायंस स्कूल में 30 अगस्त को वीरांगन वंदन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मातृशक्ति सहित सिलवासा, सूरत व वापी शाखाओं से स्वयंसेवक शामिल हुए।
"एक निश्चित लक्ष्य की सिद्धि इस बात में है, कि उसके लिए देश, काल, परिस्थिति का कितना सदुपयोग किया गया है। लक्ष्य यद्यपि अपरिवर्तनशील होता है, तथापि उसकी प्राप्ति का उपाय देश, काल की सीमाओं में आबद्ध होने के कारण परिवर्तनशील है।" 1/2
"आंख खोल देने वाले कर्म का आश्रय जो लोग नहीं लेते, वे अपने भ्रम से बाहर निकल ही नहीं सकते। सक्रिय मूर्ख अपने कर्मफल से भ्रममुक्त हो जाता है। कर्म से बड़ा कोई उपदेशक और शिक्षक नहीं।"
पूज्य श्री तनसिंह जी ('साधक की समस्याएँ' पुस्तक से साभार)
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