राजस्थान की हूँ… क्षत्राणियों के लिए सम्मान क्या है- समझती हूँ।बचपन से जौहर की कहानियाँ सुनते आई हूँ..
जब कोई जौहर को सीधे-सीधे “कायरता” कह देता है, तो बात चुभती है।
आप सहमत मत होइए, सवाल कीजिए, बहस कीजिए… लेकिन बिना पूरा इतिहास समझे वीरांगनाओं के फ़ैसले को कायर कह देना असल में कायरता है।
बड़े भाई श्री रविन्द्र सिंह जी राणावत को मारवाड़ राजपूत सभा के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में मारवाड़ राजपूत सभा नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी।
आपके उज्ज्वल कार्यकाल हेतु हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
सवाल उठाने वालों, जरा ये तस्वीर देख लो! 🇮🇳
Make in India से शुरू हुआ सफर आज Made in India को दुनिया की पहचान बना रहा है। और ये तो सिर्फ ट्रेलर है...
आत्मनिर्भर भारत से विकसित भारत तक, 2047 का लक्ष्य भी तय है। नया भारत बन रहा है… तेज़ी से, और अब रुकने वाला नहीं है! 📈
देशभक्ति और धार्मिक निष्ठा के पर्याय, जैसलमेर के महानायक महारावल गिरधर सिंह जी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन।
श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के पावन दिवस पर गोलोकवासी हुए महारावल गिरधर सिंह जी ने अपने जीवन में राष्ट्रभक्ति, धर्मनिष्ठा और कर्तव्यपरायणता की अनुपम मिसाल स्थापित की। आजादी के पश्चात जिन्ना की सभी शर्तों को दृढ़तापूर्वक ठुकराते हुए, जैसाण वासियों के हितों को सर्वोपरि रखा। उनकी अटूट निष्ठा, कर्तव्यपरायणता और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत जीवन-मूल्य सदैव हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे।
ऐसे महानायक को पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि एवं कोटिशः नमन।
“घोड़ा कीजै काठ का, पग कीजै पाषाण।
बख्तर कीजै लोह का, तब देखो जैसाण।।”
स्वर्णनगरी जैसलमेर के 871वें स्थापना दिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
शौर्य, स्वाभिमान और स्वर्णिम संस्कृति की यह धरती सदियों से राजस्थान की गौरवगाथा को समृद्ध करती आई है।
#JaisalmerFoundationDay
आज जैसलमेर के 871वें स्थापना दिवस के पावन अवसर पर दुर्ग स्थित श्री स्वांगिया माता मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर जैसलमेर के संस्थापक महारावल जैसलदेव जी की प्रतिमा का पूजन, गायत्री यज्ञ तथा दुर्ग की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप ध्वज पूजन संपन्न किया।
माँ स्वांगिया जी से सर्वमंगल, सुख, समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की मंगलकामना की। जैसलमेर का गौरव, वैभव एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत युगों-युगों तक अक्षुण्ण रहे तथा स्वर्णनगरी निरंतर प्रगति के नए आयाम स्थापित करे, यही प्रार्थना है।
समस्त जैसलमेरवासियों को 871वें स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।
जय जैसाण!
जैसलमेर स्थापना दिवस एवं राष्ट्रनायक दुर्गादास राठौड़ की जयंती पर विचार गोष्ठी का आयोजन।
श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन ने ' प्रेरक वंदन :- कृतज्ञता ज्ञापन " नाम से किया आयोजन।
श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन द्वारा जैसलमेर स्थापना दिवस एवं राष्ट्रनायक दुर्गादास राठौड़ की जयंती के उपलक्ष में राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा परिसर में स्थित SIAM ऑडिटोरियम में विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत पूज्य तनसिंह जी के चित्र के समक्ष दीपांजलि एवं प्रार्थना से हुई।
राष्ट्रनायक दुर्गादास को सच्चा वंदन है कि हम दायित्व बोध सीखें:- सरवड़ी
राष्ट्रनायक दुर्गादास जी के जयंती कार्यक्रम में बोलते हुए क्षत्रिय युवक संघ के वरिष्ठ स्वयं सेवक महावीर सिंह सरवड़ी ने बताया कि दुर्गादास जी के जीवन से हम दायित्व बोध समझे, यही उनका सच्चा वंदन हैं। दुर्गादास जी का जीवन पूरे भारतीय चरित्र का बोध करवाता हैं। स्वामिभक्ति, राष्ट्रप्रेम, स्त्री अस्मिता, कर्त्तव्यपरायणता, शौर्य, त्याग व बलिदान जैसे न जाने कितने प्रतिमान यदि भारतीय इतिहास में किसी एक चरित्र में सहज रूप से मिलते है तो वह है दुर्गादास राठौड़। उनके चरित्र में संपूर्ण भारतीयता के दर्शन होते हैं इसलिए वे सच्चे राष्ट्रनायक हैं।
प्रथम सत्र में जैसलमेर के स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए इतिहास अध्येता राजवीर सिंह चलकोई ने बताया कि जैसलमेर का इतिहास प्रेरक व वंदनीय हैं। शाकों की परंपरा भाटी वंश से शुरू हुई। रेगिस्तान में पानी की कमी को दूर करने हेतु वहां के महाराजाओं ने तालाब खुदवाने के साथ ही तत्कालीन युग में पाठशालाएं व कोर्ट बनाए। वर्तमान इतिहास लेखकों ने जैसलमेर के इतिहास के साथ न्याय नहीं किया।
जैसलमेर के संस्थापक जैसल ने भट्टी संवत् चलाया। उत्तर के भड़ कींवाड विजय राज लांझा ने गजनवी तो गुजरात जाने से रोका।
हेमंत नाहटा वरिष्ठ अधिवक्ता राजस्थान हाइकोर्ट ने बताया कि वे
मूल रूप से परिवार जैसलमेर से हैं, आज भी उतना ही जुड़ाव आज भी महसूस करता, मुझे जैसलमेर से होने पर गर्व हैं। मुझे अपने पेशे में जूझने की प्रेरणा जैसलमेर से मिलती है। जैन धर्म में जैसलमेर के बारे कहा जाता है "जुहारिए दुःख वारिये" अर्थात जिसे देखने मात्र से दुखों का निवारण हो जाए। ऐसे पवित्र व प्रेरणादायक जैसलमेर को स्वर्णनगरी की उपमा पीले पत्थरों के कारण नहीं उसके रखवाले राजपूत शासकों के 24 कैरेट नैतिक चरित्र, राष्ट्र भक्ति, बलिदान व प्रजावतसलता जैसे अकल्पनीय गुणों के कारण मिली हैं।
ललित के पंवार सेवानिवृत वरिष्ठ IAS आज का कार्यक्रम इसलिए भी रोचक हैं कि जेन अल्फा, बीटा से लेकर 80 वर्ष तक की आयु के लोग विराजमान है, इसकी प्रेरणा हमे जैसलमेर के इतिहास से मिली हैं। जैसलमेर कलक्टर रहने के दौरान मैने पाया कि यहां के लोग कितने जीवटता वाले हैं। यहां के किले का एक एक पत्थर अपने स्वर्णिम इतिहास को समेटे हुए हैं। पंडित नेहरू जी ने जैसलमेर के लिए कहा था कि यह पत्थरों पर कविता है। हमें जैसलमेर को हेरिटेज विथ हाइटेक बनाना हैं। वर्तमान में सोलर व विंड का हब हैं लेकिन हमें विकास के साथ साथ संस्कृति व परंपराओं की रक्षा करनी हैं।
द्वितीय सत्र में राष्ट्रनायक दुर्गादास जयंती का कार्यक्रम रखा गया। सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल एवं प्रतिरोध पुस्तक के लेखक दलीप सिंह हरसोलाव बताया कि तत्कालीन समय में औरंगजेब से संघर्ष दुर्गादास जी की कुशलता, रण कौशल के बल पर संभव हुआ । उन्होंने बताया कि दुर्गादास जी को मिलिट्री के लिए केस स्टडी के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए।
युवा विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने युवाओं को पूर्वजों के इतिहास से सीखने व अपने चरित्र में अपनाने की बात कही। कार्यक्रम का संचालन करते हुए रेवत सिंह पाटोदा ने दुर्गादास के समय की ऐतिहासिक घटनाओं का ब्यौरा दिया। कार्यक्रम में मातृशक्ति के साथ सैकड़ों की संख्या में युवा व बुजुर्ग उपस्थित रहे।
@shri_kys@Shri_PF
#Jaislmer
#Rastnayakdurgadas
आज जयपुर में श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन द्वारा राष्ट्रनायक वीर दुर्गादास जी की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित विचार गोष्ठी एवं जैसलमेर स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर अपने विचार साझा किए तथा उपस्थित प्रबुद्धजनों के विचारों एवं प्रेरणादायी वक्तव्यों को सुनने का सौभाग्य मिला।
राष्ट्रनायक वीर दुर्गादास जी का अदम्य साहस, त्याग और स्वाभिमान सदैव हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
@MyBharatpur@rajasthani_hun 40% नहीं आ रहे हैं तो क्या करें पूरे राजस्थान का ठेका क्या गणपत सिंह सर ने ले रखा है , जहां 40 परसेंट आ रहे वहां जाकर पढ़ो ना बार-बार क्या लिख रहा है 40% नहीं आ रहे नहीं आ रहे हैं।