“अरे जैसी भी है कम से कम मायावती से तो ज़्यादा सुंदर और पढ़ी लिखी है। मैंने कुर्सी पर बैठा दिया तो क्या हुआ”
ये बयान सुनकर रोहिणी घावरी ने कुछ नहीं कहा, सारी प्रतिष्ठा और अपने आत्मसम्मान को लुटाकर वहाँ पर खड़े रहना अब बेशर्मी के अलावा कुछ नहीं। जिस मानसिक ग़ुलामी से लड़कर बहुजन समाज यहाँ तक पहुँचा है, उसी ग़ुलामी में गोते लगाकर अपना स्वाभिमान तक रौंध दिया आज रोहिणी ने।
मुझे ब्लॉक कर रखा है, अगर कोई जानता है तो इन तक मेरी ये बात पहुचाओ, अब अपने साथ साथ पूरे समाज का अपमान मत करवाओ। होश में आ जाओ।
ये जातिवादी नफ़रती साँप चाहे क्रोध से फूँसकार मारे या पुचकारे दोनों में जहर ही गिरता है। 👇👇🤮
3 अगस्त को मेरठ से एक पत्रकार साथी ने मुझे फोन किया. उन्होंने बताया कि उन्हें मेरठ के SSP अविनाश पांडेय ने फोन किया था और कहा कि अगर रिपोर्टिंग करनी है तो सोच-समझकर कीजिएगा, ग्राउंड रिपोर्ट कीजिएगा.
फिर पत्रकार साथी ने बताया कि भाई, उन्होंने मुझे ही नहीं बल्कि कई अन्य लोगों को भी कॉल किया है. उन्होंने जिन-जिन नामों का जिक्र किया, उनमें एक बात कॉमन थी कि तीनों दलित हैं.
मैं यही सोच रहा था कि एक SSP भला पत्रकारों को क्यों फोन करेगा? किसी से करवा देगा. SHO को बोल देगा. ऑफिस में किसी और को बोल देगा. लेकिन खुद कॉल क्यों करेगा?
फिर उन्होंने मुझे 6 मिनट 12 सेकेंड की एक रिकॉर्डिंग भेजी. मैं हैरान था.
तब के SSP की पहली ही लाइन थी कि मैं मेरठ से SSP अविनाश पांडेय बोल रहा हूं. मैं आपसे एक निवेदन करना चाहता हूं कि अगर रिपोर्टिंग करिएगा तो ग्राउंड रिपोर्टिंग करिएगा. और ये भी पता कीजिएगा कि इन्वेस्टिगेशन सही चल रहा था कि नहीं.
पूरी बातचीत सुनकर मुझे यही लगा कि पांडेय जिस नम्रता और विनम्रता से बात कर रहे हैं, उसके पीछे एक दबाव और चेतावनी भी छिपी थी.
दरअसल, यह पत्रकार रवि गौतम पर रिपोर्ट कर रहा था. रवि गौतम वही हैं, जिन्हें SSP पांडेय ने बंदी वाहन में पीटा था. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.
तब वह ललिता गौतम हत्याकांड मामले में प्रदर्शन कर रहे थे. उसके बाद उन्हें जेल भी भेज दिया गया था. रिहाई के बाद रवि ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे. इसी मुद्दे पर वह रिपोर्ट कर रहे थे.
खैर, इस बातचीत में SSP मेरठ पत्रकार से कई बार अपने दफ्तर में आने के लिए कहते हैं कि दफ्तर आओ, बैठकर बात करेंगे. इस बीच वह यह भी पूछते हैं कि आप कहां के रहने वाले हैं. साथ ही बीच-बीच में कहते हैं कि कुछ भी लिखने, खबर बनाने से पहले हमसे पूछ लीजिएगा. वे बार-बार अपने दफ्तर में आने पर जोर देते हैं.
मैं बस सोच रहा हूं कि दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव को भी SSP ने ऐसे ही मिलने के लिए बुलाया था. उनसे कहा था कि आओ, तुम हमारे छोटे भाई हो, बैठकर चाय पिएंगे, बात करेंगे.
ऐसे में दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव को लगा कि भैया-भैया करके बात हो रही है, चलो मिल लेते हैं. लेकिन उनके साथ क्या हुआ, कितनी बर्बरता की गई वो सब सामने है.
मैं सोच रहा हूं क्या अगर ये पत्रकार साथी SSP दफ्तर में जाते तो उनके साथ भी ऐसा ही होने की संभावना थी?
मैंने एक और व्यक्ति से बात की जिन्हें SSP मेरठ ने कॉल किया था. उन्हें भी ऐसे ही बोला गया कि कुछ भी छापने से पहले हमें बता दीजिएगा. बाकी दफ्तर आइए बैठक चाय पीते हैं.
मेरी नजर में यह पहला मामला है, जहां SSP सीधे पत्रकार को फोन कर कह रहा है कि कुछ भी छापने से पहले बात कर लीजिएगा.
टाइमलाइन पर बार बार दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव से जुड़े पोस्ट दिख जाते हैं. उनके वीडियो सामने आ जाते हैं. सूजी हुई आंख, रुंधे गले से निकलती भारी आवाज, उनकी पीड़ा साफ दिखाई देती है.
इस बीच पत्रकारों की ये बात याद आ गई सोचा साझा कर दूं.
@TheSengarSahab दुल्ला भट्टी के पुरखे जैसलमेर के चंद्रवंशी भाटी राजघराने से थे. 1290 में जैसलमेर राजघराने के एक युवराज सूफी शाह इस्माइल की संगत में आकर मुसलमान हो गए थे. इसके बाद वे राजघराना छोड़ पंजाब की तरफ निकल गए.
@awesh29 भैया, रहने दो क्यों उड़ता तीर ले रहे हो?
इतने सालों से आप लोग INC को घेरे हुए हैं लेकिन BJP का घंटा कुछ नहीं बिगड़ रहा।
इधर राजपूत INC के लिए कुछ नी कर रहा सिर्फ उसका कुछ हिस्सा BJP के विरोध में उतरा तो UP में BJP की सीटें आधी हो गई।
नसीम और दौलत राम पड़ोसी हैं. बहराइच में हिंसक भीड़ ने नसीम का घर जला दिया. दौलत का घर छोड़ दिया. क्योंकि दौलत के घर के सामने छोटी सी मंदिर बनी है.
दोनों अब भी साथ बैठे हैं, उनके दुख से दुखी हैं. कहते हैं हमें यहां तो साथ है रहना है. बाकी आप सुनिए...
दिवंगत पत्रकार रवि प्रकाश भैया का पार्थिव शरीर रांची लाया गया। अंतिम दर्शन के लिए प्रेस क्लब में पार्थिव शरीर को रखा गया था। जहां सभी पत्रकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी श्रद्धांजलि अर्पित कर परिवार को ढांढस बंधाया। अंतिम जोहार। 🌸
देखिए कैसे भाजपा IT सहेलियो के द्वारा क्षत्रिय समाज और क्षत्रिय नेताओ के प्रतिनेरेटिव सेट किया जाता है !!
हिंदू धर्म के नाम पर पैसे छपते है, और उसी का इस्तेमाल कर राजपूतों के खिलाफ जहर उगलते है।
ऐसे लोगो का इलाज होना चाहिए, और इलाज है वोट की चोट जो आने वाले समय में दिखा देंगे।
@Raghuraj_Bhadri और अगर यह पोस्ट आपके बेटे या बेटियों ने किया है तो बहुत मुमकिन है कि आपकी राजनीतिक विरासत को वे 2 कौड़ी का बना के दम लेंगे।
अब सुझाव भी सुन लीजिए
बहुत सी किताबें हैं 'नेहरू और पटेल' के संबंधों के ऊपर। 'गांधी और पटेल' के संबंधों पर।
समय निकालकर पढ़ लीजिए
@JyotiDevSpeaks@ranvijaylive जब वीपी बागी हुए थे तब उनके ऊपर भी कई बार हमला हुआ था। सीतापुर और लखीमपुर में सांप से कटाने की कोशिश हुई थी। उन्नाव में एक ठाकुर साहब MLA थे। उनके गुंडों ने वीपी के ऊपर गोली तक चलाई थी।
मेरा कहने का मतलब है कि थोड़ा पढ़ा लिखा कीजिए।
जौनपुर लोकसभा सीट पर बाबू सिंह कुशवाहा को टिकट देकर अखिलेश यादव ने बड़ा दाँव खेला है| पिछले कई दिनों से इस बात की चर्चा भी थी कि इस सीट पर मौर्य कुशवाहा समाज के किसी बड़े नेता को उतारा जा सकता है|
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