दलितों को तलवार पकड़ने से रोका गया
लेकिन जब मौका मिला, तो 800 ने 28000 को गाजर मूली की तरह काट दिया
#The battle of bhimakore gaon
1 jan 1818 शौर्य दिवस.
लोकसभा चुनाव: जितने वोट पड़े नहीं थे उससे ज्यादा गिन लिए गए, 362 सीटों पर 5.54 लाख वोट कम गिने गए, ADR की रिपोर्ट
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर दावा किया है कि 538 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में डाले गए मतों और गिने गए मतों की संख्या में अंतर है. एडीआर के विश्लेषण के अनुसार, हाल के लोकसभा चुनावों में 362 संसदीय क्षेत्रों में पड़े कुल वोटों से 5,54,598 वोट कम गिने गए. वहीं 176 संसदीय निर्वाचन क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पड़े कुल वोटों से 35,093 वोट अधिक गिने गए. इस मामले पर चुनाव आयोग की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
एडीआर के संस्थापक जगदीप छोकर ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, 'फाइनल पोलिंग डेटा रिलीज करने में अत्यधिक देरी, अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों और मतदान केंद्रों पर हुई वोटिंग के आंकड़े उपलब्ध नहीं होना और क्या चुनाव परिणाम अंतिम मिलान किए गए डेटा के आधार पर घोषित किए गए थे, इसकी अस्पष्टता चुनाव परिणामों की प्रमाणिकता के बारे में चिंता और संदेह पैदा करते हैं.' हालांकि, एडीआर ने यह नहीं बताया कि वोटों के इस अंतर से कितनी सीटों पर अलग नतीजे आए.
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NDA के पहले 15 दिन!
1. भीषण ट्रेन दुर्घटना
2. कश्मीर में आतंकवादी हमले
3. ट्रेनों में यात्रियों की दुर्दशा
4. NEET घोटाला
5. NEET PG निरस्त
6. UGC NET का पेपर लीक
7. दूध, दाल, गैस, टोल और महंगे
8. आग से धधकते जंगल
9. जल संकट
10. हीट वेव में इंतजाम न होने से मौतें
Psychologically backfoot पर नरेंद्र मोदी बस अपनी सरकार बचाने में व्यस्त हैं।
नरेंद्र मोदी जी और उनकी सरकार का संविधान पर आक्रमण हमारे लिए acceptable नहीं है - और ये हम किसी हाल में होने नहीं देंगे।
INDIA का मज़बूत विपक्ष अपना दबाव जारी रखेगा, लोगों की आवाज़ उठाएगा और प्रधानमंत्री को बिना जवाबदेही बच कर निकलने नहीं देगा।
चुनाव के बीच डर का माहौल 👇
• 29 अप्रैल: हवाई अड्डों को बम से उड़ाने की धमकी
• 1 मई: 100 स्कूलों में बम की धमकी
• 4 मई: एयरफ़ोर्स के काफिले पर आतंकी हमला
• 12 मई: दिल्ली के अस्पतालों को धमकी
• 14 मई: तिहाड़ जेल/अस्पतालों को धमकी
• 15 मई: कानपुर के स्कूलों को बम की धमकी
जब देश का हर तीसरा युवा बेरोज़गारी का शिकार है, तब प्रधानमंत्री ने एक बार फिर उनके साथ बड़ा धोखा किया है।
इस बार धोखा आम परिवार से आने वाले, 18-18 घंटे मेहनत करने वाले उन छात्रों के साथ है जो छोटे छोटे किराए के कमरों में रह कर बड़े सपने देखते हैं।
जहां रेलवे में लाखों पद खाली हैं, वहां 5 वर्षों के इंतजार के बाद मात्र 5696 पदों की भर्ती, प्रतियोगी छात्रों के साथ अन्याय है।
रेलवे में भर्तियों को कम करने की नीति आखिर किसके फायदे के लिए बनाई जा रही है?
कहां गया हर साल 2 करोड़ नौकरियों का वादा? कहां गया रेलवे का निजीकरण न करने का भरोसा?
एक बात बिल्कुल साफ है - मोदी की गारंटी, युवाओं के लिए खतरे की घंटी है।
हमें उनके हक़, उनके साथ न्याय के लिए आवाज़ उठानी ही होगी।
#NyayForYuva