“नेपाली कांग्रेस इतिहासमा सीमित भएर बस्ने कि भविष्यको नेतृत्व लिने—निर्णय गर्ने मोडमा छ।
गुटबन्दी, सत्ता केन्द्रित राजनीति र ढिलासुस्तीले जनविश्वास घट्दै गएको छ।
अब आत्मसमीक्षा, साहसी निर्णय र नयाँ नेतृत्व बिना कांग्रेसको पुनर्जागरण सम्भव छैन।”
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संसद में आग लगाने का मतलब है कि लोकतंत्र से मोह खत्म हो चुका है। बंदूकें केवल हाथ बदलती हैं अपना कैरेक्टर नहीं। नेपाल को समझना होगा कि हिंसक विद्रोह लोकतांत्रिक उद्देश्य के ख़िलाफ़ साबित होता है। उसे शांति की राह पर लौट आना चाहिए। आक्रोश और हिंसा के फर्क को हासिल करना होगा वरना कोई तीसरा फ़ायदा उठाएगा। दूसरी तरफ़ अभिव्यक्ति को दबाने का यह खेल ज़्यादा नहीं चलने वाला। सोशल मीडिया अख़बार या चैनल नहीं है कि संपादक और मालिक के ज़रिए गला घोंट दिया। बांग्लादेश से तुलना की जाएगी लेकिन उससे पहले प्रदर्शन के कारणों को नेपाल में ही देखना होगा। भ्रष्टाचार और दमन का तरीक़ा जनता सहन नहीं करेगी।चुप रह जाती है इसका मतलब यह नहीं कि जनता भी शामिल हो गई है।