हिंदुओं से अनुशासन सीख लीजिए, मुजफ्फरनगर के मीनाक्षी चौक पर कांवड़ियों द्वारा रोड ब्लॉक करके डांस किया जा रहा है, योगी जी कहते हैं "मुसलमानों को हिंदुओं से अनुशासन सीखने की आवश्यकता है, सड़कें चलने के लिए होती न कि चौराहे ब्लॉक करके तमाशा करने के लिए।"
भाजपा नेता @pushkardhami इतने बड़े पद पर आसीन हैं, लेकिन उनका दिल कितना छोटा है, यह बार-बार साबित हुआ है। पुष्कर धामी सरकार का एक सूत्री कार्यक्रम मुसलमानों को परेशान करना रहा है। इस मुस्लिम महिला को सुनिए! और अंदाज़ा लगाइए कि धामी ने इस समुदाय को किस हज तक सताया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अगर नफ़रती कुंठा के कोढ़ को ढो रहे हो तो लानत है ।
🚨ब्रेकिंग न्यूज़🚨 - सूत्रों के अनुसार , मोदी सरकार ने इस वीडियो हटाने का आदेश दे दिया है
सुनिए बिल्किस बानो के बलात्कारियों का बचाव करते हुए नए शिक्षा मंत्री ने क्या कहा था !
डिलीट होने से पहले ,इस वीडियो को रीट्वीट करके पुरे देश में फैला दो🙏🙏
सुप्रीम कोर्ट ने आतंकवाद के आरोप में 12 साल से जेल में बंद साकिब अंसारी और वकार अजहर नामक 2 मुस्लिम युवकों को जमानत दे दी है जिसके बाद अब वह 12 साल बाद अपने घर जा पाएंगे। इस ख़बर का जश्न मनाया जाए या सरकारी सिस्टम के ज़ुल्म का दुख मनाया जाए कुछ समझ नहीं आ रहा, सरकारी मशीनरी और देश के क़ानून का इस्तेमाल करते हुए केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियां मात्र प्रमोशन के लिए मुस्लिम युवाओं और उनके घरों को बर्बाद करने के लिए सोचने में भी देरी नहीं करती हैं।
जिस साकिब अंसारी और वकार अजहर को अब 12 वर्ष बाद UAPA में जमानत मिली है इन्हें दिल्ली की स्पेशल सेल ने 2014 में गिरफ्तार किया था, आरोप था कि "साकिब और वकार इंडियन मुजाहिदीन नामक आतंकी संगठन के मॉड्यूल को राजस्थान और दिल्ली के आस पास खड़ा कर रहे थे, इनका मक़सद दिल्ली और अन्य राज्यों को दहलाना था।"
पुलिस ने साकिब और वकार समेत दर्जन युवकों के खिलाफ़ राजस्थान में 2 और दिल्ली में 1 FIR दर्ज की थी जिनमें से एक FIR में जयपुर की कोर्ट ने दोनों ही युवकों को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में दोषी ठहराते हुए 2021 में उम्र क़ैद सज़ा सुनाई जिसे बाद में राजस्थान हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया , अन्य दूसरी FIR में भी जमानत मिल गई थी लेकिन दिल्ली की FIR में जमानत न मिलने के कारण दोनों ही युवक 2014 यानी 12 सालों से जेल में बंद थे, क्योंकि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दोनों ही युवकों से विस्फोटक, हथियार और न जाने क्या- क्या बरामद भी दिखाया हुआ था, स्पेशल सेल ने साकिब और वकार के खिलाफ़ 197 गवाहों की सूची भी कोर्ट को सौंपी लेकिन 12 सालों में पूछताछ की गई मात्र 68 गवाहों से, 2025 से अब तक स्पेशल सेल और जांच एजेंसियों ने मात्र 2 ही गवाहों से बात की जिसमें एक गवाह का बयान तो आज तक टाइप तक नहीं किया, कोर्ट ने ट्रायल और जांच में देरी देखी तो अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए अब दोनों ही युवकों को जमानत देते हुए रिहा करने का आदेश दिया है।
मेरी इस पोस्ट में स्क्रीन शॉट नंबर 4 पढ़िए, स्क्रीन शॉट हिंदुस्तान की ख़बर का जिसमें बिना ट्रायल और बिना दोष जेल में बंदी बनाकर रखे गए युवकों को जमानत देने के बाद भी आतंकवादी कहकर संबोधित किया जा रहा है, इस स्क्रीन शॉट और खबर के लिंक को इसलिए हमेशा रिकॉर्ड में रखने के लिए पोस्ट कर रहा हूं ताकि दोनों ही युवकों को बरी किए जाने पर @Live_Hindustan से बात की जाएगी।
कंगना रनौत एयरपोर्ट पर पड़े थप्पड़ को शायद भूल गई हैं।
नकली घोड़े पर बैठकर खुद को झाँसी की रानी समझने वाली कंगना को पहले अपने शब्दों पर शर्म करनी चाहिए।
Gen Z का अपमान करने के लिए उन्हें पूरे Gen Z से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
दो ही ऑप्शन हो सकते हैं 👇
1. गृह मंत्री ने छात्रों को मारने का ऑर्डर दिया
2. गृह मंत्री को मालूम नहीं था कि छात्रों पर फायरिंग होगी
पहले केस में गृह मंत्री 'दोषी' हैं, दूसरे केस में वो 'अयोग्य' हैं।
अगर गृह मंत्री ने कुछ नहीं किया, तो वे संसद में क्यों नहीं आ रहे हैं?
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
मोदी जी, अपने image के गुब्बारे में हवा भरते-भरते आपने देश के युवाओं का भविष्य तबाह कर दिया है
अब वो गुब्बारा फट चुका है - Gen Z को आपके आधी रात के नए-नए video angles नहीं, जवाब चाहिए जो आप दे नहीं सकते
नेपाल से मुसलमानों के खिलाफ हिंसा की खबरें लगातार आ रही हैं, कहीं मुसलामों को उनके धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया जा रहा हैं तो काही उनकी संपतियों लूटपाट आग जैसे घटनाए सामने आ रही हैं इसी कड़ी में
सुनसरी ज़िले के भोक्राहा नरसिंह ग्रामीण नगरपालिका-6 के फूलचौक में सिराज अंसारी की 'ब्रदर्स हार्डवेयर' दुकान में हिंदुत्ववादी भीड़ ने लूटपाट और तोड़-फोड़ की और दुकान से नकदी व सामान समेत लाखों रुपये का माल लूट लिया।
नेपाल से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हिंसा और हमलों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। विभिन्न स्थानों पर धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों को निशाना बनाने, तोड़फोड़, आगजनी और लूटपाट की घटनाए देखने को मिल रहीं हैं।
इसी क्रम में सुनसरी ज़िले की भोक्राहा नरसिंह ग्रामीण नगरपालिका-6 स्थित फूलचौक में सिराज अंसारी की 'ब्रदर्स हार्डवेयर' दुकान पर हिंदुत्ववादी भीड़ ने हमला कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, हमलावरों ने दुकान में तोड़फोड़ और लूटपाट की। आरोप है कि दुकान से नकदी और सामान सहित लाखों रुपये की संपत्ति लूट ली गई।
सत्यम पंडित नामी इस गुंडे को @ghaziabadpolice ने अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है। @dgpup बताएं कि क्या @Uppolice ने खुद को हिंदूवादी बताकर हिंसा करने वालो को गिरफ्तार ना करने की धाराएँ ईज़ाद कर ली हैं? जंतर मंतर से लौट रहे छात्रों के साथ जैसी अभद्रता और मारपीट इस गुंडे ने की थी, क्या वो कानून अपराध नहीं था? उसके बावजूद यह गुंडा खुला घूम रहा है। @myogiadityanath की अपराधियों के खिलाफ ज़ीरो टोलरेंस नीति यही है?
दो ही ऑप्शन हैं 👇
1. गृह मंत्री ने छात्रों को मारने का ऑर्डर दिया: तो वह दोषी हैं
2. गृह मंत्री को मालूम नहीं था कि छात्रों पर फायरिंग होगी: तो वह incompetent हैं
गृह मंत्री संसद क्यों नहीं आ रहे हैं?
@RahulGandhi
मध्य प्रदेश के खरगौन में रामनवमी के दौरान हुई हिंसा के मामले में कोर्ट ने पैट्रोल बम चलाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए 11 मुस्लिम व्यक्तियों को बरी कर दिया है, कोर्ट ने माना कि पुलिस ने हिंदू शिकायतकर्ताओं की झूठी शिकायत के आधार पर उन्हें फर्ज़ी फंसाया और 867 दिन तक जेल में रखा, अब पुलिस साबित नहीं कर पाई है कि मुस्लिमों के पास पैट्रोल बम थे या उन्होंने किसी तरह के बमों का इस्तेमाल किया।
ज़िंदगी के 867 दिन खाने के बाद अब कोर्ट द्वारा मुसलमानों को बरी कर दिया गया है, अप्रैल 2022 में रामनवमी हिंसा के दौरान खरगौन में दंगा हो गया था जिसके बाद मुसलमानों के कई दर्जन घरों में तोड़फोड़, गाड़ियों में तोड़फोड़ और बचे हुए घरों पर बुलडोजर चलाया गया था, ख़बर आई थी कि आंख में नफ़रत लिए घूम रहे अफसरों ने मुस्लिमों के उन घरों पर भी बुलडोज़र चला दिया था जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे, पुलिस ने उस व्यक्ति को भी पथराव करने का आरोपी बनाया था जिसके दोनों हाथ किसी कारण बिजली के कारण कट गए थे। अब कोर्ट ने 11 मुस्लिम व्यक्तियों को भी बम टखने के मामले में बरी कर दिया है क्योंकि पुलिस सबूत पेश न कर सकीं।