जी चाहता तो बैठते यादों की छाँव में
ऐसा घना दरख़्त भी जड़ से उखड़ गया...
किस किस को अपने ख़ून-ए-जिगर का हिसाब दूँ
इक क़तरा बच रहा है सो वो भी निबड़ गया...
#ख़लील_उर_रहमान_आज़मी#बज़्म_ए_शोअरा✍️
या अल्लाह,
करोना अगर बीमारी है तो शिफ़ा अता फरमा,
अगर वबा है तो ख़तम फरमा,
अगर साज़िश है तो बे-नकाब कर,
अगर अज़ाब है तो हमारी हिफ़ाज़त फरमा और हमें माफ फरमा.
Ameen, Ya Rabbulaalameen
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