I am glad to share our another article published in @SciReports
I am heartfelt thankful to Prof. PK Gupta Sir and Dr. NK Vashishtha Sir, for giving me an opportunity to work with you. I am also thankful to all co-authors for guiding and nice cooperation.
https://t.co/yUaBcuPSv9
I am thrilled to share that I have successfully defended my PhD viva voce examination. With immense gratitude and joy, I write to express my appreciation to Prof. PK Gupta and Prof. SS Gaurav for their guidance, support, and mentorship throughout this challenging journey.
80 Students - 8 Standard - Visited ICAR-IIMR-HYD on 8 Day - 8 Month - 2023. They were briefed about types & diversity, conservation & utilization, nutritional & health benefits of millets and urged them to diverse their food plates with millets to combat the lifestyle diseases.
भारत में जब कोई युवा किसी प्रतियोगी परीक्षा को पास करता है ...
तब उसकी सफलता की कहानी बताते समय यह बताया जाता है कि, इसके पिताजी रिक्शा चलाते थे या होटल में प्लेट साफ करते थे.....
और देखिए आज उनका बेटा आईएएस/डॉक्टर/CA बन गया है
पहली चीज, IAS PCS भी एक वही पद है, गुलामी का............नेताओ की, और CA मतलब संसार का सबसे ब्रीलयन्ट दिमाग, काले पैसे को कैसे सफेद किया जाए......इसी मे��� लगा रहता है 🙏
💛..........इस पूरे विवरण में जो विचार है.......... वह यह है की रिक्शा चलाना या होटल में प्लेट साफ करना नीचा और छोटा काम है, और आईएएस ऊंचा होता है...........🙄🙄🙄🙄
🙄.…...असल में भारत में कामों को लेकर व्यक्ति की इज्जत और बे��ज्जती निर्धारित होती है, और इसके पीछे है अंग्रेजी मानसिकता !!!
प्लेट धोने वाले और रिक्शा चलाने वाले की इज्जत नहीं होगी,….....आईएएस की इज्जत होगी !!!
इसलिए भारत में शरीर से काम श्रम करना हमेशा नीच कर्म और प्रशासन शासन धनवान बनना उच्च कार्य माना गया है !!!
🤣...….....भारत के छात्र जो विदेशों में रहकर पढ़ते हैं, वह वहां होटल में पार्ट टाइम वेटर का काम करते हैं अपनी पढ़ाई का खर्चा निकालते हैं !!
😊..........अमेरिका में रहने वाले एक सदस्य ने मुझे बताया कि अमेरिका में हमारे रेस्टोरेंट में जब कोई अमेरिकी आता था और हम उनसे पूछते थे....... आज आप कैसे हैं तो वह बहुत शालीनता से जवाब देता था हाथ मिलाता था !!!
.............लेकिन जब अमेरिका में रहने वाला कोई भारतीय आता था तो वह हमारे सवाल का जवाब देने की बजाय सीधा मेन्यू पढ़ने लगता था...........��र ऑर्डर देने लगता था उसे हमसे बात करने में अपनी तौहीन लगती थी !!!
🙏.......…...भारत में बहुत सारे बच्चे इसलिए भी आत्महत्या करते हैं, क्योंकि हमने उन्हें सिखाया है कि यदि तुम डॉक्टर इंजीनियर आईएएस आईपीएस नहीं बने तो तुम्हारी जिंदगी बेकार है......
..........अब समाज में ना तुम्हारी इज्जत होगी ना तुम्हें पैसा मिलेगा !!!
😆😆.......व्यक्ति की इज्जत उसके इंसान होने के कारण करने की बजाए, हम इज्जत उसके पद या उसके पैसे की करते हैं........
समाज में हर काम जरूरी है, यदि कचड़ा उठाने वाला कचड़ा न उठाएं तो....और 1 साल न उठाएं तो...?? यदि खेती करने वाला .......खेती न करे तो..?????
जितनी जरूरत आपको आईएएस आईपीएस डॉक्टर इंजीनियर या कारपोरेट में काम करने वाले या बैंकर अथवा फिनेंशियल एक्सपर्ट की है…......
...............उतनी ही जरूरत कार मैकेनिक प्लंबर स्वीपर कॉबलर टैक्सी ड्राइवर किसान और मजदूर की भी है
🙏...……..लेकिन आपके दिमाग में श्रमण विरोधी संस्कार भर दिया गया है .....…....जिसके मुताबिक मानसिक श्रम श्रेष्ठ है और शारीरिक श्रम करने वाले नीच जात के होते हैं !!!
🙏….......हम मेहनतकश को जीवन भर अपमानित करते हैं और उसकी जिंदगी को सजा बना देते हैं
इसलिए हमें कभी इस बात को बताते समय कि इस आईएएस के पिता रिक्शा चलाते हैं यह नहीं जताना चाहिए कि देखो पिताजी कितने छोटे हैं और बेटा कितना बड़ा हो गया..........🙏
🙏............क्य���ंकि किसी भी लिहाज से रिक्शा चलाना छोटा काम और कुर्सी पर बैठकर काम करना ऊँचा काम नहीं हो सकता !!!.........🙏
ईस्वर ने सभी के लिए कोई न कोई, कार्य चुना है..........ईमानदारी, मेहनत और लगन से कीजिये, जब तक ईस्वर ने वह काम आपको सौंपा है.....….जिसदिन आप उस काबिल नहीं हो गए, वही काम कोई और करेगा, किन्तु करेगा अवश्य 🙏
इंसान के चेहरे बदलते रहते हैं, कर्म तो करना ही होगा 🙏
सोचना ��ड़ेगा।।
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I am happy to share another publication from 2023. This review comprised four major leaf spot diseases. For this review, the whole credit goes to Prof. PK Gupta Sir and Prof. AK Joshi Sir.
https://t.co/3oCn0I78oO
Successfully defended the PhD thesis presubmission viva. Thanks to my supervisors Prof. PK Gupta and Prof. SS Gaurav for their guidance and support on each movement. Also thanks for Prof. AK Joshi, Prof. R. Chand, Prof. VK Mishra, Dr. Uttam Kumar, Dr. NK Vashishta for their help.