For the last 2 months, We residents of one of the biggest gated society (Rising Homes, Sec-92) of New Gurugram with 3200+ flats and 1500+ occupied units have been facing severe water shortage due to inadequate supply from GMDA.
Against the daily requirement of almost 1200KL, only 400–500 KL water is being supplied, that too during night hours only. This is causing immense hardship to thousands of families & residents are forced to accumulate high TDS water.
We request @OfficialGMDA to immediately look into the matter and ensure adequate daily water supply for residents, formal request letters with our concern along with the authentic data is officially shared via mail also.
#Water_Crisis @pcmeenaIAS@DC_Gurugram@usiias@MCManesar@IAS_Pradeep_001@its_AkankshaG@sandeeprattan92@abhishekbehl@sumedhasharma86@Poonam957756521@DEEPAKKAHUJA@NayabSainiBJP
@Praveenmalik86@MunCorpGurugram@MCManesar निगम की जिम्मेदारी है के BWG को प्रेरित और प्रोत्साहित करें अपने कूड़े का स्वयं निस्तारण करें, लेकिन मानेसर निगम में आज तक ऐसी कोई पहल नजर नहीं आई, सबसे आसान है के यहाँ के लोगों पे गार्बेज टैक्स लगा था, कूड़े का निस्तारण हो या ना हो, इससे किसी को कोई फ़रक नहीं
एक ही शहर में दो नगर निगम और दोहरा मापदंड, @MunCorpGurugram गार्बेज टैक्स नहीं वसूलता जबकि @MCManesar शुरू से ही प्रॉपर्टी टैक्स के साथ साथ #गार्बेज_टैक्स वसूल रहा है।
निगम की जिम्मेदारी है के BWG को प्रेरित और प्रोत्साहित करें अपने कूड़े का स्वयं निस्तारण करें, लेकिन मानेसर निगम में आज तक ऐसी कोई पहल नजर नहीं आई, सबसे आसान है के यहाँ के लोगों पे गार्बेज टैक्स लगा था, कूड़े का निस्तारण हो या ना हो, इससे किसी को कोई फ़रक नहीं पड़ता।
@NayabSainiBJP@VipulGoelBJP@ulbharyana को इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए अन्यथा एक और बँधवाडी बन जाएगा।
@IAS_Pradeep_001@usiias@PuneetJ83054825@sandeeprattan92@DevelopNewGgn
“तुम्हारे पैरों में जूते भले ना हों, हाथों में किताब जरूर होनी चाहिए।”
भारत रत्न, महान समाज सुधारक, भारत के संविधान निर्माता बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर उन्हें सदर नमन 🙏
Participated as panellist at the conclave organised by Abante , BRICS Education Society & @MunCorpGurugram
“Everyday Nation Builders – Communities of Tomorrow.”
The theme of the conclave is:
“From Intent to Impact: Making Sustainability Work in Residential Communities.”
#intellectual_Politics @MCManesar@IAS_Pradeep_001@PuneetJ83054825@DevelopNewGgn@RWASAREHOMES92
गुरुग्राम की राइजिंग होम्स (पूर्व में Sare Homes) सोसाइटी में FY 2021-22 के दौरान तब की आर.डब्ल्यू.ए द्वारा की गई गंभीर वित्तीय अनियमितताएँ उजागर।
डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार ने निवासियों की शिकायत के अनुरूप रीना जैन एंड एसोसिएट से थर्ड पार्टी ऑडिट करवाया जिसमे वित्तीय अनियमितताएं आई सामने उसके बाद District Registrar द्वारा State Registrar को पत्र लिख कानूनी कार्रवाई की सिफारिश।
निवासियों की मांग – दोषियों पर कार्रवाई और गबन की राशि की वसूली जाए क्यूंकि वित्तीय समस्या खड़ी होते ही तब के पदाधिकारी फ्लैट बेच कर भाग गए थे।
@DC_Gurugram@DEEPAKKAHUJA@its_AkankshaG@leenadhankhar@sumedhasharma86@DevelopNewGgn@RWASAREHOMES92
This is sector 92/95 dividing road which is almost half is covered with dust, no cleaning is being done on this road, requesting @MCManesar to get it cleaned also make a schedule to clean this road at least in 2 days as this dust is causing pollution & unhygienic environment
@IAS_Pradeep_001@RWASAREHOMES92
Govt. Is pushing to have piped natural gas, for us at Rising Homes Society, sector-92 Gurugram it’s been almost 3 yrs, the internal infrastructure is ready but @HCG_GROUP failed to connect main supply line due to the on going concern of ROW with @OfficialGMDA, 3000 flat owners are suffering due to this tussle.
In current gas crisis residents are struggling for cylinders and are forced to purchase on much higher prices
Requesting @pcmeenaIAS@DC_Gurugram to please intervene to get the ROW clearance or may push @HCG_GROUP to route shift of main distribution line @NayabSainiBJP@HardeepSPuri@its_AkankshaG@sandeeprattan92@leenadhankhar@abhishekbehl@RWASAREHOMES92
यूपीएससी का चारों तरफ़ महिमामंडन हो रहा है, लेकिन इससे आख़िर देश को हासिल क्या होता है। एक प्रतियोगी परीक्षा पास करने को ऐसे सेलिब्रेट किया जाता है मानो कोई राजा बन गया हो। राजा बनने का खुलेआम सेलिब्रेशन होता है। क्या दुनिया के किसी लोकतांत्रिक देश में सिविल सर्वेंट के चयन पर इतना डंका पीटा जाता है। लोकतंत्र में सिविल सर्वेंट जनता का सेवक होता है, कोई विशेष शासक वर्ग नहीं।
आईएएस, आईपीएस और आईआरएस जैसी सेवाओं ने देश से कई गुना लिया है, लेकिन बदले में देश को एक भ्रष्ट, सामंतवादी, शोषणकारी, असंवेदनशील, अजवाबदेह और अपारदर्शी प्रशासनिक तंत्र दिया है। यह पूरा ढाँचा ब्रिटिश हुकूमत से लिया गया मॉडल है। अंग्रेज़ों ने यह व्यवस्था नागरिकों की सेवा के लिए नहीं बनाई थी। इसका उद्देश्य राजस्व वसूली करना, जनता को नियंत्रित रखना और आंदोलनों को दबाना था। इसलिए यह मूल रूप से शासक बनाम प्रजा की व्यवस्था थी, न कि लोकतांत्रिक प्रशासन की।
आज़ादी के इतने दशकों बाद भी आईएएस, आईपीएस और आईआरएस ने लगभग हर विभाग के सबसे ताक़तवर पदों, अनाप-शनाप प्रमोशन वाली संरचनाओं और निर्णय लेने की शक्तियों को अपने हाथों में केंद्रीकृत कर रखा है। इसके बावजूद ऐसा एक भी विभाग नहीं मिलेगा जिसमें भारी भ्रष्टाचार और अक्षमता न हो। इसका कारण यह है कि इस नौकरशाही लॉबी ने अपने हितों को सुरक्षित रखते हुए राज्य के संसाधनों का बड़ा हिस्सा वीआईपी सुविधाओं, विशेषाधिकारों, भ्रष्टाचार से अकूत संपत्ति जामा करने और सत्ता के केंद्रीकरण को बनाए रखने में लगा रखा है।
कक्षा 6 से 12 तक की सामान्य पुस्तकों और रटंत तैयारी पर आधारित एक परीक्षा पास करने के बाद किसी व्यक्ति को इतना शक्तिशाली और लगभग अजवाबदेह पद देना किसी भी आधुनिक पेशेवर व्यवस्था के अनुकूल नहीं है। किसी भी पेशेवर संस्थान में नेतृत्व अनुभव, विशेषज्ञता और जवाबदेही के आधार पर तय होता है, न कि केवल एक सामान्य प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर।
विडंबना यह है कि जो प्रशासनिक मॉडल ब्रिटेन से लिया गया, वह आज स्वयं ब्रिटेन में भी नहीं है। विकसित लोकतांत्रिक देशों में डीएम जैसा सर्वशक्तिमान जिला अधिकारी नहीं होता। जिला स्तर का पूरा प्रशासन एक व्यक्ति के हाथ में नहीं दिया जाता। डीएम के अधिकार अलग अलग विभागों के पेशेवर अधिकारियों में बँटे होते हैं। पुलिस नेतृत्व कई जगह सीधे जनता के चुनाव से तय होता है, जैसे अमेरिका में शेरिफ का चुनाव होता है और वह अनुभवी पुलिस अधिकारियों में से चुना जाता है और जनता के प्रति सीधे जवाबदेह होता है। पब्लिक प्रॉसिक्यूटर भी चुने जाते हैं और प्रशासनिक ढाँचा स्थानीय काउंसिलों और निर्वाचित संस्थाओं के अधीन चलता है।
इसलिए समस्या केवल एक परीक्षा की नहीं है, बल्कि उस पूरे केंद्रीकृत नौकरशाही तंत्र की है जिसने सत्ता और संसाधनों को एक छोटे अफसरशाही वर्ग के हाथों में केंद्रित कर दिया है। जब तक इस संरचना में वास्तविक विकेंद्रीकरण, पेशेवर विशेषज्ञता और जनता के प्रति सीधी जवाबदेही नहीं आएगी, तब तक नागरिक प्रजा की तरह ही रहेगा और नौकरशाही लॉबी सत्ता और संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखेगी। यूपीएससी ने देश के लाखों युवाओं का प्राइम टाइम बर्बाद कर दिया है। उन्हें यह सपना बेचा जाता है कि बस यह परीक्षा पास होते ही जीवन भर के लिए राजा बन जाओगे और फिर केवल हुक्म चलाना है। 8–10 साल इतिहास, भूगोल, संविधान और सामान्य अध्ययन रटने से आखिर देश का क्या भला हो रहा है। डॉक्टर, इंजीनियर, एमबीए, सीए, प्रोफेसर, दूसरे प्रोफेशनल और यहाँ तक कि सरकारी कर्मचारी भी अपने अपने क्षेत्र की वास्तविक विशेषज्ञता छोड़कर इसी दौड़ में लग जाते हैं, क्योंकि उन्हें दिखता है कि यहाँ से अकूत धन, शक्ति और रुतबा मिलता है। इस लालच में देश अपने असली प्रोफेशनल्स खो रहा है और एक ऐसी अफसरशाही पैदा कर रहा है जिसका वास्तविक उपयोग जनता की सेवा में नहीं, बल्कि विलासिता, वीआईपी संस्कृति, शक्ति के खुले प्रदर्शन और उसके दुरुपयोग में होता है।
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