Hey there, adventure seekers! It's time to dive into the charm of rural India's March festivals!
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✍️ Aditi Sahoo
#MarchCelebrations #SpringFestivities
1/3 दावा:
सोशल मीडिया साइट्स पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा। इसमें देखा जा सकता है कि सड़क के बड़े बड़े गढ्ढों में पानी भरा हुआ है, और गाड़िया जंप करते हुए गुज़र रही हैं।
यूज़र्स का दावा है कि- यह वीडियो उत्तर प्रदेश की राजधानी, लखनऊ का है।
जब सत्ताधीश सत्ता के अहंकार में चूर हो जाता है तो ऐसे ही पुलिस स्टेट की मदद से अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबा���े की कोशिश करता है।
पत्रकारिता के लिए तो हालिया समय बेहद खतरनाक होता जा रहा है। हर कदम पर एक धमकी बाज मिलता है!
जहाँ प्राचीन नदियाँ बहती हैं, सूरज की अनंत ज्योति के नीचे,
वीरता की गाथाएँ गूंजती हैं, श्री राम के स्थिर, कोमल हाथ की।
"जय श्री राम," गान बजता है, मंदिरों में, हृदयों मे��, आत्मा में भी,
शुद्ध भक्ति का मंत्र, जिसकी गूंज युगों तक व्याप्त है।
अयोध्या की पवित्र, संस्कृति भूमि में, जहाँ आस्था और इतिहास बंधे हैं,
धर्म के राजकुमार ने जन्म लिया, पृथ्वी पर अपनी धर्मनिष्ठा फैलाने को।
"जय श्री राम," लोगों ने पुकारा, जैसे बुराई की छा��ा डिगी,
हाथ में धनुष, और सच्चाई के साथ, वीरता के मार्ग पर चले।
गहन वनों और विस्तृत नदियों के पार, प्रिय सीता के साथ उनके कदम,
और वफादार लक्ष्मण, हमेशा पास, राक्षसों और खतरों का सामना किया बिना डरे।
"जय श्री राम," वनों ने कहा, जैसे बुराई की जंजीरें टूटीं,
और प्रत्येक प्राणी, बड़ा और छोटा, राक्षसों के पतन का साक्षी बना।
विशाल और उन्मत्त सागर के पार, लंका के द्वार पर, जहाँ रावण ने उनकी प्रिय को रखा,
ल���किन राम ने बिना डरे सामना किया।
"जय श्री राम," युद्ध का नारा, जिसने पृथ्वी और आकाश को भर दिया,
हनुमान की छलांग और वीरता से, विजय के बीज बोए गए।
सिंहासन पर उन्होंने अपना स्थान लिया, न्याय, प्रेम और असीम अनुग्रह के साथ,
किसी मंजिल से चलते वक़्त नमाज़ पढ़ना
हज़रत अनस (र.अ) बयान करते हैं के:
“रसूलुल्लाह (ﷺ) किसी जगह कयाम करते
और फिर वहाँ से चलते तो दो रकात नमाज जरूर पढ़ते।”
📕 सुनन कुबरा लिल बैहकी: २५३/५
जो मज़ारात ए औलिया पर जाने को शिर्क व बिदअत बताते हैं
वो लोग
बिल आखिर मंदिर पहुंच ही जाते हैं
ऐसा देखा गया है
मुत्ती तारिक मसूद बिग फैन ऑफ काली माता मंदिर
अमेरिकी सैनिक ने इज़राइली दूतावास के बाहर खुद को आग लगाते हुए कहा है कि "ग़ाज़ा में चल रहे नरसंहार में शामिल नही हो सकता,फ्री फ़लस्तीन"
सैनिक की हालत गंभीर है जिसके बाद अस्पताल में भर्ती किया गया है, ग़ाज़ा के नागरिकों पर ज़ुल्म किया जा रहा है यह बात ज़ुल्म करने वाला सैनिक भी अच्छी तरह जानता है लेकिन क्या करें, सरकारें ज़बरन अपने सैनिकों को ग़ाज़ा के बच्चों, बुज़ुर्गो पर ज़ुल्म करने के लिए मज़बूर कर रही है!
जब मौजूदा सत्ताधीश तानाशाही के खिलाफ संघर्ष की बात होगी तो उसमें आप सभी का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
उमर खालिद, अतहर, खालिद सैफी, मीरान, शरजील जैसे सैंकड़ों युवा बेगुनाह होते हुए भी बिना ट्रायल सालों से सत्ता के सितम की वजह से जेल में बंद हैं।