इस शख्स के अल्फाज़ तुम्हारे रूह को अगर ना चीरदे तो असल में तुम जिंदा नहीं मर्दा हो अगर जिंदा हो तो अपनी आवाज़ को बुलंद करो और लिखो ज़ुल्म के खिलाफ हैवानियत के खिलाफ लिखकर अपने जिंदा होने का सबूतदो।
#SaveGaza#FreePalestine
मैंने अपनी पूरी इच्छा और समझ से इस्लाम धर्म स्वीकार किया है। इस्लाम एक सच्चा और शांति का मार्ग दिखाने वाला धर्म है। इस फैसले से मैं बेहद संतुष्ट और खुश हूं। मुझ पर किसी भी प्रकार का कोई दबाव नहीं था।
~नेहा रैना (कश्मीरी पंडित)