श्री नेगोशिएशन प्रताप @JPNadda जी,
सादर चरणस्पर्श! अभी आपका यह पोस्ट प्राप्त हुआ और मन आह्लादित हो गया कि सरकार ने आदरणीय हर्ष भाई जी की चिट्ठी पर (जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं था) विचार किया और आप पुनः मिलेंगे। आपसे एक त्रुटि हो गई कि आपने आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे श्री आनंद स्वरूप जी को साथ नहीं लिया!
आपने पहले तो (अपने ही द्वारा प्लांटेड) आदरणीय हर्ष भाई को किडनैप करवाया (जैसा कि आदरणीय हर्ष जी ने वीडियो में कहा था), और फिर नीली कलम से दो कौड़ी की डिमांड वाली चिट्ठी लिखवाई, और अब आप सौहार्दपूर्ण वार्ता भी कर रहे हैं।
यह पोस्ट पाते ही @RHAreforms वाले सारे लोग, इंक्लूडिंग @neha_laldas, लिखना छोड़ चुके हैं और उस चिट्ठी का प्रिंट आउट ले कर उत्तर प्रदेश के गाँवों में ड्रोन से गिरा रहे हैं कि सरकार ने हमारी माँगें मान ली!
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यदि सरकार को ऐसा कोई भी भ्रम है तो कोई टेबलेट खा लो। ये पुरानी और सर्वविदित तकनीक है: अपने ही द्वारा प्लांटेड व्यक्ति को नेता मान कर नेगोशिएट करने का स्वाँग रचो, फिर वास्तविक माँगों को डकार जाओ। मैं आपसे वादा करता हूँ कि मुझे आपके साथ बैठना नहीं पड़ेगा और आप हमारी माँगें भी मानोगे।
थोड़ी भी लज्जा बची है और पार्टी की थोड़ी भी चिंता है, तो खेल खेलना बंद करो। लोग ब्रजेश पाठक वाले स्टंट से ही हर्ष को नकार चुके हैं।
अब ये लड़ाई केवल यूजीसी रोलबैक की नहीं एससी एसटी रोल बैक , आरक्षण रिफार्म की है , संवाद से सहमति यही हमारा मार्ग होगा जल्द हमें अनुमति मिलेगी और हम जंतर मंतर पर सभी लोग बैठ कर इसकी शुरुआत करेंगे ।
हमारी मांग -:
1- एससी एसटी वापस लीजिए
2- आरक्षण रिफार्म हो
3-यूजीसी रोल बैक हो
माननीय प्रधानमंत्री जी,
झूठी शिकायत, झूठी FIR, झूठी जाँच और झूठी गवाही को गंभीर अपराध घोषित करने से बहुत सी समस्याओं का समाधान हो जाएगा
@PMOIndia@narendramodi
आज का लाइव ऐसा होगा
फिर कभी नहीं जैसा होगा
एट्रोसिटी एक्ट के खोलेंगे धागे
रख कर दलितों को ही आगे
चुन-चुन कर वीडियो लाएँगे
सब तथ्य दिखाए जाएँगे
मंचों के बोल भी आएँगे
हर इमेज सजाए जाएँगे
सवर्णों की भी बेटी होती है
उसकी भी इज्जत होती है
वो राह चलती वेश्या नहीं
मैं चुप सुनने वाला प्रेश्या नहीं
हर रंग दिखाऊँगा तुमको
धो-धो के सुखाऊँगा सबको
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मित्रों, आप सबके स्नेह और समर्थन का आभार! मेरी बहन आपकी भी बहन है, और आपकी बहन मेरी भी बहन है। मेरे वचन तब कटु हुए जब किसी ने उसे राह चलती किसी वस्तु की तरह देखा। मेरी बहन का ऑब्जेक्टिफिकेशन किसी नारीवादी को नहीं दिखा, पर जब एक कथित रावण समर्थक को मैंने लक्षित करके कुछ कहा तो तुम्हें ध्यान आया कि मेरी मानसिकता सड़ी हुई है।
मैं जहाँ से आता हूँ, यदि यह बात मुझे कोई सामने से कहता तो मेरे ऊपर यह धाराएँ नहीं लगती, वो कोई और धारा होती। मैं आत्मनियंत्रण वाला व्यक्ति हूँ और ट्रोल की ट्रोलिंग को उसी तरह से थामना जानता हूँ।
बाकी, जो भी होगा वह प्रारब्ध है। पर हाँ, सवर्णों की बेटियाँ किसी भी शोषित-वंचित के डिजिटल उपभोग या विकृत यौन मानसिकता के प्रयोग की वस्तु नहीं।
“जो नेता केवल अपने निहित स्वार्थ और राजनीतिक लाभ के लिए ऐसी राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े रहें, जो उनके समाज के हितों और अधिकारों के विपरीत खड़ी हो, वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी से विमुख हैं। ऐसे स्वार्थपरक नेतृत्व का सामाजिक रूप से कोई औचित्य नहीं—जनता को ऐसे नेताओं से प्रश्न करना चाहिए और उनके आचरण का लोकतांत्रिक ढंग से मूल्यांकन करना चाहिए। धिक्कार है उस राजनीति पर, जिसमें समाजहित से ऊपर निजी स्वार्थ हो।”
ये तिरस्कार बहुत आवश्यक है