@Kapil_Jyani_ Dalit mahila
Ab kya koi rape karne se pehle bhi Caste dekhta hai
agar koi aur samaj se hoti toh
Rape jaisa ghinone Paap ke parameter mein koi kami aa jati kya
मध्यप्रदेश लोकसभ�� 14 : भोपाल
🔰 कुल मतदाता — 23.40 लाख
1. ब्राह्मण — 2.40 लाख (≈10.26%)
2. राजपूत — 1.50 लाख (≈6.41%)
3. बनिया/जैन — 1.25 लाख (≈5.34%)
4. अहीर — 75 हजार (≈3.21%)
5. किरार — 75 हजार (≈3.21%)
6. काछी — 65 हजार (≈2.78%)
7. कायस्थ — 60 हजार (≈2.56%)
8. सिंधी — 60 हजार (≈2.56%)
9. गूजर — 52 हजार (≈2.22%)
10. कुर्मी — 50 हजार (≈2.14%)
11. लोधी — 50 हजार (≈2.14%)
12. नाई — 44 हजार (≈1.88%)
13. तेली — 40 हजार (≈1.71%)
14. कुम्हार — 40 हजार (≈1.71%)
15. मीणा — 30 हजार (≈1.28%)
16. डांगी — 30 हजार (≈1.28%)
17. दर्जी — 30 हजार (≈1.28%)
18. रघुवंशी — 25 हजार (≈1.07%)
19. सुनार — 25 हजार (≈1.07%)
20. जाट — 20 हजार (≈0.85%)
21. अन्य — 1.75 लाख (≈7.48%)
22. मुस्लिम — 4.60 लाख (≈19.66%)
23. SC — 3.50 लाख (≈14.96%)
24. ST — 70 हजार (≈2.99%)
बिहार सरकार के लिए निर्धन और आवासहीन केवल SC/ST/OBC/EBC में हैं। यानी सामान्य वर्ग की जातियों से टैक्स लो और उ��की जातियों के लोगों को किसी भी स्कीम का लाभ मत दे। यही बकलोली इन्होंने हर योजना में कर रखी है। समाज को पूछना चाहिए कि हमारे पैसे का लाभ हमारी ही जाति के निर्धनों को क्यों नहीं दिया जा रहा? हर बात क्या जाति देख कर ही होगी?
ब्राह्मण मध्यप्रदेश मे 12% है
लेकिन 36 साल से कोई ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं बना है और वहा कांग्रेस ने ह��� ब्राह्मण मुख्यमंत्री बनाया है
BJP ने एक भी ब्राह्मण मुख्यमंत्री आज तक मध्यप्रदेश मे नहीं दिया है
साल 2003 से BJP यहा�� सता मे है
लेकिन एक बार भी ब्राह्मण को मौका नहीं,
Mumbai, Maharashtra | IIT Bombay student suicide | IIT Bombay Faculty Forum stages a campus march to support Professor Suryanarayana Doolla, who has been suspended from the deanship of IIT Bombay.
(Picture Source: A student from IIT)
In the last few months : 3 students including Sahil have committed suicide at IIT.
The other 2 were GC students. Have u apologise for their deaths ? No kids should die ...maybe the fault is with IIT BOMBAY?
No professor should be falsely implicated!!!
फर्जी रेप केस और SC/ST एक्ट में 20 साल बाद जेल से छूटा विष्णु: गांव पहुंचकर लोगों स��� पूछा- ‘मेरा घर कहां है?’; दोस्त ने पहचाना तो बोला- ‘तुम तो जेल में थे’, मां-बाप और 2 भाइयों की मौत, तीसरा भाई पागल हुआ; दैनिक भास्कर की ‘ब्लैकबोर्ड’ सीरीज में पढ़िए विष्णु तिवारी की कहानी...
#VishnuTiwari #FakeCase #SC_STAct #HindiNews
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इस जीत के बावजूद...
बीजेपी यह बिल्कुल भी नहीं भूले कि वोटर उससे नाराज़ हैं। बस, पूरी तरह अलग नहीं हुए हैं, इसलिए इतनी सफलता मिल गई है।
पह���े मोदी के नाम पर जो शहरी और स्वर्ण वोट मिला करते थे, अब उसी नाम पर वोटर छिटक और बिदक रहे हैं।
जो गड़बड़ी हुई है, उसे तुरंत ठीक करे।
बाकी भारत तो पहले भी चुनाव प्रधान देश था और आगे भी चुनाव प्रधान ही रहेगा।
@BJP4India @BJP4Rajasthan
@Kapil_Jyani_ Seedhi baat hai koi vikalp nahi hai BJP ka
Congress ke liye sochne wali baat hai BJP se itni narazgi hone ke baad bhi
Upper caste Congress ko vote nahi kar raha
Na dalito ke vote mil rahe hai na upper caste ke
दलित पीड़ित शोषित वंचित अल्पसंख्यक और गरीबों के मसीहा
भ्रष्टाचारियों की 100% संपत्ति जब्त करने, नागरिकता खत्म करने और 01 वर्ष में फाँसी देने के लिए कानून बनाने की मांग क्यों नहीं करते हैं?
@HMOIndia@AmitShah@PMOIndia@narendramodi
रायबरेली में लेखपाल दिनेश सविता ने कहा घुस देने के लिए पैसे नहीं है तो अपनी बेटी दे दो मामला था भारी बारिश में घर गिरने से परेशान ब्राह्मण परिवार आर्थिक मदद के लिए लेखपाल के पास गया था।
बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ वाली सरकार ने अब तक कोई करवाई नहीं की है । यह साबित करता है कि सरकार सवर्ण के बेटियों को लेकर कितनी असंवेदनशील है।
परिवार और बेटी ब्राह्मण थे, अगर यही लोग दलित होते तो लेखपाल सवर्ण होता अब तक सरकार सहित पूरे देश की राजनीतिक पार्टियों में उबाल आ जाता , पर अब सब तरफ चुप्पी है।
24 सितंबर को लेकर सवर्ण समाज से अपील
24 सितंबर को लेकर मैं सामान्य वर्ग के लोगों से एक महत्वपूर्ण अपील करना चाहता हूं। 24 सितंबर को चंद्रशेखर रावण शक्ति प्रदर्शन के लिए आ रहे हैं। मुझे आशंका है कि वे सवर्ण समाज के लोगों से टकराव चाहते हैं। पिछली बार के आंदोलन में 14 लोगों की हत्या हुई थी। इस बार भी यदि दिल्ली में सवर्ण समाज के लोग वहां आते हैं, तो टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।
आप लोग बिना तैयारी के वहां जाएंगे और पुलिस भी आपको सुरक्षा नहीं देगी। यदि पुलिस को आवश्यकता पड़ी, तो वह गोली चलाने से भी पीछे नहीं हटेगी।
इसलिए 24 सितंबर के आसपास यदि कोई रैली या प्रदर्शन करने की योजना बना रहा है, तो उस विचार को अभी त्याग देना चाहिए।
हमें किसी के उकसावे में नहीं आना है। सामान्य वर्ग और ओबीसी समाज के लोग, तथा SC/ST एक्ट, यूजीसी की नीतियों और आरक्षण व्यवस्था से प्रभावित लोग, सभी से मेरा विनम्र निवेदन है कि 24 सितंबर को चंद्रशेखर रावण और भीम आर्मी जो करना चाहते हैं, उन्हें करने दीजिए।
वे जंतर-मंतर आएं या पूरी दिल्ली में प्रदर्शन करें, लेकिन हमें उनका सामना नहीं करना है। उनके आसपास बिल्कुल नहीं ज��ना है। उनके एक, दो या पांच किलोमीटर के दायरे में भी नहीं दिखना है।
उन्हें सरकार के साथ अपनी लड़ाई लड़ने दीजिए। हमें इसमें नहीं पड़ना है। सरकार भी चाहती है कि लोग हिंसा करें और फिर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा सके। यदि किसी व्यक्ति का चेहरा हिंसा में दिखाई दे गया, तो उसका भविष्य बर्बाद हो सकता है।
सरकार अपने आपको बचाने के लिए अलग-अलग लोगों को सामने लाती है और फिर अपनी कार्रवाई को सही ठहराने का प्रयास करती है। हमें ऐसी किसी ��ी योजना का हिस्सा नहीं बनना है।
हमारे लिए हिंसा से बचना जरूरी है:
मैं बार-बार कह रहा हूँ कि हिंसा मत कीजिए। 24 सितंबर को शक्ति प्रदर्शन मत कीजिए। इसके बाद तीन-चार दिन या सात दिन तक भी ऐसे किसी कार्यक्रम से दूर रहिए। यदि शक्ति प्रदर्शन करना है, तो अक्टूबर या नवंबर में कर सकते हैं। चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी जा सकती है।
हमें अभी सड़कों पर आने की कोई आवश्���कता नहीं है। हमें सड़कों पर जाकर किसी से पिटने या लड़ने की जरूरत नहीं है। यदि टकराव हुआ, तो आप पर मोदी एक्ट, NSA और अन्य गंभीर धाराएं लगाई जा सकती हैं। आपको लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है।
इसलिए 20 से 30 सितंबर के बीच सवर्ण समाज का कोई भी समूह उनके आसपास कहीं भी दिखाई न दे। उन्हें अपना प्रदर्शन करने दीजिए। यदि वे हंगामा करते हैं या तोड़फोड़ करते हैं, तो यह दिल्ली पुलिस, सरकार और उनके बीच का मामल��� है। हमें इसमें नहीं पड़ना है।
हमें अपना ध्यान उत्तर प्रदेश के चुनाव पर केंद्रित रखना है। हमें अपने तीन मूल एजेंडों पर ध्यान देना है:
1. यूजीसी से संबंधित नीतियां
2. एससी-एसटी एक्ट
3. आरक्षण सुधार (12 मांगें)
यही हमारे मूल मुद्दे हैं। हमें इन्हीं पर केंद्रित रहना है। हिंसा नहीं करनी है। हमें किसी के जाल में नहीं फंसना है और शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखनी है।
SC Budget:
2014-15: ₹50,548 crore
2025-26: ₹1,68,478 crore
ST Budget:
2014-15: ₹32,386 crore
2025-26: ₹1,29,249 crore
ISRO Budget:
2014-15: ₹6,000 crore
2025-26: Only ₹13,700 crore
In 10 years, SC/ST allocations grew nearly 4 times, while ISRO’s budget grew only 2.2 times.
Look at the priorities of this country !!