@Saurabh_MLAgk अगर तू एक बाप से पैदा है ना, तो इस्लाम शराब योजना, ये लिखकर दिखा। तुम हिंदुओं को बेवजह टारगेट करते हो और फिर कहते हो कि हिंदू तुम्हें वोट नहीं देता। ले लो, कुछ महीने और मज़े। जब पंजाब भी हार जाओगे ना, तब सब AAP वालो को तेल-चटाई लेकर सड़को पर बैठना पड़ेगा ।
@ProfNoorul ये 30% वोट जो AIMIM की तरफ शिफ्ट होता दिख रहा है, वही समाजवादी पार्टी की हार के लिए काफी है। समाजवादी पार्टी वैसे भी 300 से ज़्यादा सीटें नहीं जीत रही है। ढाई सौ से ज़्यादा सीटें किसी भी कीमत पर नहीं आएंगी। बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगी, तब भी।
@arshdeep3444 If you look at Yuvraj Singh’s innings in context, especially considering that it came in the death overs and not during the powerplay, I think it’s nearly impossible.
@MR_COOL77777 अरे भाई, तुम जैसे लोग चूतिया हैं, जो यह सोचते हैं कि यह वाकई देश या संविधान को बचाने की लड़ाई है और बीजेपी के खिलाफ सारी पार्टियाँ एक साथ आ जाएँगी। जबकि सच यह है कि ये सारी पार्टियाँ अपने-अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के लिए लड़ रही हैं और कोई किसी का सगा नहीं है।
@ArifQur42753333@AshrafFem और जो हिंदुओं के हजारों मंदिर तोड़े गए, आज तक उनका हिसाब कौन देगा? तुम जैसे मुसलमानों की दिक्कत यही है कि तुम्हारे मजहब का कोई आतंकवादी भी होगा, तो उसे डिफेंड करोगे और सही ठहराओगे। लेकिन किसी दूसरे धर्म का कोई गुंडा-बदमाश भी होगा, तो उसे आतंकवादी कह दोगे।
@ArifQur42753333@AshrafFem पहले तुम अपने अंदर के कट्टरपंथी मुसलमान को बाहर निकालो और फिर अपने मज़हब को दूसरों पर थोपना बंद करो। दुनिया में और भी धर्म हैं। अपना मज़हब अपने तक रखो और उसे किसी दूसरे के ऊपर जबरदस्ती मत थोपो।
@MohdMatheenAhm1@RightsForMuslim राम जन्मभूमि की लड़ाई अदालत में 1885 से चल रही थी।तब तो मोदी नहीं था यही दिक्कत है मुसलमानों में अपनी गलतियों और अपनी कुरीतियों को कभी स्वीकार नहीं करते।बाकी राजनीतिक पार्टियों ने तुम्हें धार्मिक कट्टरता के अलावा दिया ही क्या है? वो तुम्हारी टोपी लगाकर तुम्हें ही टोपी पहनाते हैं
@ProfNoorul अरे, कौन-सी दुनिया में जी रहे हो भाई? रामपुर में पाँच विधानसभा सीटें हैं। उन पाँचों सीटों पर भी सपा की जीत पक्की नहीं है। यहाँ से सपा को अधिकतम तीन सीटें ही मिल सकती हैं, और तुम 25–30 सीटों की बात कर रहे हो!
@BabaJi97297870@sameer44955@WAKhan337 वो प्रथा बंद हो गई और आज किसी भी हिंदू से पूछ लो, वह कभी भी सती प्रथा का समर्थन नहीं करेगा। यही तो बात है, हिंदू धर्म समय-समय पर अपने भीतर सुधार करता रहता है।