लड़की _ हे भगवान इतने डेडिकेटेड लोग भी होते
हैं दुनियाँ में ❣️
बाइक पर बैठा वो लड़का नमाज़ पढ़ रहा है,
बारिश हो रही है और ट्रैफिक जाम है।
पास में कार पर बैठा लड़का वीडियो बनाता है
लड़की _ ये क्या कर रहा है बारिश में
लड़का ट्रैफिक जाम है बारिश है इसलिए यही पढ़ रहा है।
लड़की _ हे भगवान कितने डेडीकेटेड लोग हैं
महाबेशर्म हैं ये CJP वाले, ये स्टूडेंट तो हो ही नहीं सकते
पहले गुंडागर्दी करके गाड़ी पलटा दी, फिर बेशर्मी के साथ कह रहे हैं कि ये सरकार के लोगों ने किया
शर्म करो CJP वालों @abhijeet_dipke@ArvindKejriwal
तस्वीर 30 जनवरी 2020 की है। जगह है जामिया मिल्लिया इस्लामिया की खूनी सड़कें। जिस दहशतगर्द के हाथ में तमंचा है उसका नाम है 'रामभक्त गोपाल' और जो लड़का तमंचे के सामने छाती तानकर चल रहा है उसका नाम है 'शादाब फ़ारूक़'। और 'रामभक्त गोपाल' के पीछे खड़ी दिल्ली पुलिस है, जो मज़े लेकर इस पूरे आतंकी घटना को देख रही थी।
'रामभक्त गोपाल' सिर्फ़ इसलिये मुसलमानों पर गोलियां चलाने आया था कि मुसलमान अपने हक़ के लिये पुरअमन एहतिजाज कर रहा था। 'रामभक्त गोपाल' ने 'शादाब फ़ारूक़' भाई को निशाना बनाया था, जिसमें शादाब फ़ारूक़ के हाथ में गोली लगी थी।
इस दिन के बाद 'रामभक्त गोपाल' बहुसंख्यक समाज के एक बड़े तबके का हीरो बन गया था। सिर्फ़ इस वजह से कि उसने मुसलमानों पर गोली चलाई।
ठीक ऐसे ही जब दिल्ली पुलिस ने CAA, NRC के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट कर रहे मुसलमानों पर भरी सर्दी में वाटर कैनन चलाया, मुसलमानों पर लाठियां, गोलियां और आँसू गैस के गोले दागे तो दिल्ली पुलिस भी बहुसंख्यक समाज के लिये प्यारी बन गयी थी।
इसलिए बहुसंख्यक समाज की तरफ से ये नारा 'दिल्ली पुलिस तुम लठ बजाओ, हम तुम्हारे साथ हैं' लगाया जा रहा था।
ख़ैर, अगर आप लोगों की आँखों से उस वक़्त आँसू निकलते जब मुसलमानों को बेरहमी से मारा जा रहा था तो शायद आज आपकी आँखों से आँसू गैस के गोलों की वजह से पानी न निकल रहा होता।
- @ShaanIrfan05
#Islamophobia_In_India #JantarMantar #cjp
कल जो इस देश में हुआ है वह "अच्छे दिन तो नहीं थे"
मुझे पता है अब कुछ लोग आएंगे और कमेंट में कहेंगे "चुप कर फ्लॉप एक्टर नल्ला"
चलिए ठीक है मैं फ्लॉप एक्टर हूं लेकिन आपका नेता भी तो फ्लॉप है - आर्य बब्बर
कई हिन्दू युवाओं को लगता था कि—
पुलिस की सख्ती सिर्फ़ CAA के विरोध में प्रदर्शन करने वालों (मुसलमानों) के लिए है।
जेल सिर्फ़ शरजील इमाम और उमर ख़ालिद जैसे लोगों के लिए है।
बुलडोज़र सिर्फ़ मुसलमानों और मस्जिदों पर ही चलता है।
लेकिन अब उनकी यह ग़लतफ़हमी धीरे-धीरे दूर हो रही है।
जंतर मंतर पर आज जो हुआ वो ग़लत है, छात्रों पर लाठीचार्ज नहीं होना चाहिए, यही ‘युवा’ देश के भविष्य हैं, ये बात हमने 6 साल पहले भी जामिया के छात्रों के लिए कही थी, तब भी मासूम छात्रों पर जो हुआ वो दर्दनाक था। बस उस वक़्त बहुत से लोग खामोश थे जो आज हैरान दिख रहे हैं।
"किसने कहा कि भगत सिंह अब ज़िंदा नहीं हैं? ज़रा आँखें खोलकर सड़कों पर देखो!
जो युवा बिना किसी लाठी-डंडे के, निहत्था होकर भी 50 पुलिसवालों के सामने सीना तानकर अकेला खड़ा है... वही भगत सिंह है!
यह लोकतंत्र है, और याद रखो—लोकतंत्र कभी ख़ामोश नहीं रहता, लोकतंत्र हमेशा गरजता है!"