संघ का अपना कोई शत्रु नहीं है
संघ सबको अपना मानता है
संघ तो हिंदुओं को केवल ये बताता है कि उसका भला किसमे है,
बस लोगों को इसी बात का बुरा लगता है,
और वो संघ को अपना शत्रु समझने लगते हैं!
तो कौन है वो जिन्हें हिंदुओं के हित की कोई बात अच्छी नही लगती?
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण निधि समर्पण अभियान
महासागर पर सेतुबंध के समय गिलहरी की भांति इस पुनीत यज्ञ में यथाशक्ति योगदान कर पुण्य के भागी बनें....
कण-कण देना, क्षण-क्षण देना...यह जीवन का अर्थ है, जो जसे मन से देता है वो उतना अधिक समर्थ है....
श्रद्धेय माधव गोविंद वैद्य अब हमारे मध्य नही रहे!
वे संघ के सबसे वरिष्ठ स्वयंसेवक थे,
आजीवन सक्रीय रहे,प्रारम्भ में प्रचारक रहकर ग्रहस्थ हुए और विभिन्न दायित्वों का सतत निर्वाह करते रहे,
उन्होंने अभी तक के सभी सरसंघचालकों के सांथ काम किया।
ध्येय यात्री को विनम्र श्रद्धांजलि💐💐
अपनी संस्कृति धर्म जाति का
गौरव भी सिखलाया।
शक्ति-संगठन -राष्ट्र -प्रेम को
जीवन लक्ष्य बनाया।
कर्मयोग के पथिक तुम्हारे
पथ पर जग चल पाये।
तुमने सोता देश जगाया
सोते युवक जगाये।
है संघ शक्ति की चाह यही
भारत जग जननी पद पाये
हर जीवन सुखी निरामय हो
विज्ञान ज्ञान रस बरसाये
अर्जित करने इस वैभव को
शत् शत् जीवन अर्पित माँ को
युग परिवर्तक हम बीरव्रती
बदलेंगे अब सारा जहान
आओ हम बदलें वर्तमान।
जन-जन के मन मे राम रमे,
हर प्राण-प्राण में सीता है।
कंकर-कंकर शंकर इसका,
हर श्वास-श्वास में गीता है।
जीवन की धडकन रामायण,
पग-पग पर बनी पुनीता है।
यदि राम नहीं श्वासों में,
तो प्राणों का घट रीता है।
नर-नाहर श्री पुरुषोत्तम का,
शुभ मंदिर भव्य बनायेंगे।
कोरोना संकटकाल में संघ के स्वयंसेवकों के अलावा समाज के जिन लोगों ने आगे आकर सेवा की है, हमें ऐसी सज्जनशक्ति को अपने संपर्क में लाने की आवश्यकता है।
- डॉ. मोहन भागवत सरसंघचालक @RSSorg
बन्धू रुक मत जाना मग में
लालच लखकर मत फँस जाना
अपना मार्ग बदल मत जाना
एक माल में मिलते जाना
दुःख है अलग -अलग में
बन्धू रुक मत .....
ऐसा पथ फिर ऐसे नेता
ऐसे साथी कहीं मिले क्या
महा भाग रे बढ़ चल लेकर
अंगद सा बल पग में
बन्धू रुक मत ...
जननी समान धरती जिस पे जनम लिया है
निज अन्न वायु जल से जिसने बडा किया है
जीवन वो कैसा जीवन इसपे अगर न वारा
भारत हमारी माँ है माता का रूप प्यारा
करना इसी की सेवा कर्तव्य है हमारा।।
यह सैलाब अलीराजपुर में धरतीआबा भगवान बिरसा मुंडा की जन्मजयंती के उपलक्ष्य में निकली जा रही वाहन रैली का है। वनवासी क्षेत्रो में रहने वाला हिन्दू समाज जाग चुका है !
धर्मांतरण के खेल रचकर देश तोड़ने वाली शक्तियों की अब खैर नहीं !!
#मैं_भी_बिरसा
जाग उठा है आज देश का वह् सोया अभिमान
प्राची की चंचल किरणों पर आया स्वर्ण विहान
स्वर्ण प्रभात खिला घर घर में जागे सोये वीर,
युद्ध् स्थल में सज्जित होकर बढे आज रणधीर
आज पुन: स्वीकार किया है असुरों का आह्वान।
आसेतु हिमाचल सारा
हिंदु हिंदु मेरा अपना,
भारतीय जन सिंधु का
बिंदु बिंदु मेरा अपना,
इस पवित्रतम धरती का मै
सैनिक सेवक भक्त,
इस उदात्ततम संस्कृति का
नस-नस मे बहता रक्त,
अभिमान जिसे माटी का
वह बंधु-बंधु मेरा अपना।
आज नेत्र तीसरा रुद्र देव का खुले
ताण्डव के तान पर काँप व्योम भू डुले
मानसर पे जो उठी बाहु शीघ्र ध्वस्त हो
बाहु-बाहु वीर की स्वाभिमान से खिले
जाग शंख फूंक रे
शूर यों न चूक रे
मातृभूमि आज फिर है तुझे निहारती।
मातृ भू पुकारती।