15 जुलाई । पुण्यतिथि विशेष
उत्कट स्वाभिमान, राष्ट्रसेवा और संगठन-निष्ठा के प्रतीक
श्रद्धेय जयदेव पाठक जी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ जीवनव्रती प्रचारक, विद्या भारती के प्रेरणास्रोत तथा राजस्थान शिक्षक संघ के संस्थापक श्रद्धेय श्री जयदेव पाठक जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, संगठन-समर्पण, अनुशासन और स्वाभिमान का अनुपम उदाहरण है। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
प्रारंभिक जीवन
श्रद्धेय जयदेव पाठक जी का जन्म वर्ष 1924 में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर राजस्थान के करौली जिले के हिण्डौन क्षेत्र स्थित ग्राम फाजिलाबाद में हुआ। उनके पिता श्री जगनलाल शर्मा अध्यापक थे तथा माता श्रीमती गुलाबो देवी धर्मपरायण एवं संस्कारवान थीं। मात्र सात वर्ष की आयु में माताजी का साया सिर से उठ गया, किंतु विपरीत परिस्थितियों ने उनके व्यक्तित्व को और अधिक दृढ़, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर बनाया।
प्रारम्भिक शिक्षा हिण्डौन में प्राप्त करने के पश्चात वे जयपुर आए और वर्ष 1942 में प्रथम श्रेणी से मैट्रिक उत्तीर्ण की। उसी समय देश में भारत छोड़ो आंदोलन की लहर थी। राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत जयदेव जी ने इस आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और घर छोड़ दिया। उनका स्वाभिमान इतना प्रखर था कि उसके बाद वे जीवनभर वापस घर नहीं लौटे।
स्वतंत्रता आंदोलन से संघ जीवन तक
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वे गाँव-गाँव और नगर-नगर जाकर लोगों में स्वतंत्रता का संदेश जगाते रहे। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने कभी भोजन, विश्राम या सुविधाओं की चिंता नहीं की। अनेक बार रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर रात बिताकर भी वे राष्ट्रकार्य में निरंतर लगे रहे। यही तप, त्याग और समर्पण आगे चलकर उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तक ले आया।
4 अप्रैल 1944 को उन्होंने पहली बार संघ की शाखा में भाग लिया। उस समय राजस्थान में संघ का कार्य 'सत्संग' के नाम से संचालित होता था। तत्कालीन प्रांत प्रचारक श्रद्धेय श्री बच्छराज व्यास जी के व्यक्तित्व से प्रेरित होकर उन्होंने स्वयं को पूर्णतः संघ कार्य के लिए समर्पित कर दिया। उनकी कर्मठता और निष्ठा इतनी विलक्षण थी कि प्रारंभ में कुछ लोगों को उन पर संदेह हुआ, किंतु शीघ्र ही उनका निष्कलंक चरित्र सभी के सामने स्पष्ट हो गया। वर्ष 1946 में वे पूर्णकालिक प्रचारक बने।
शिक्षक जीवन और संगठन निर्माण
संघ पर लगे प्रथम प्रतिबंध के बाद आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्होंने वर्ष 1950 में अध्यापक का दायित्व स्वीकार किया। इसी दौरान उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं को निकट से समझा और उनके समाधान के लिए राजस्थान शिक्षक संघ की स्थापना की। सरकारी सेवा में रहते हुए भी उन्होंने अपना शेष समय संघ कार्य, शाखा विस्तार और शिक्षक संगठन को समर्पित रखा। बारह वर्षों तक अध्यापन करने के बाद उन्होंने त्यागपत्र देकर पुनः पूर्णकालिक प्रचारक जीवन अपना लिया।
संगठन विस्तार और नेतृत्व
प्रचारक के रूप में उन्होंने उदयपुर एवं डूंगरपुर में जिला प्रचारक तथा उदयपुर, जयपुर, सीकर और भरतपुर में विभाग प्रचारक का दायित्व निभाया। कुछ समय तक वे राजस्थान प्रांत के बौद्धिक प्रमुख भी रहे।
वर्ष 1974 से 2002 तक उन्होंने राजस्थान में विद्या भारती तथा राजस्थान शिक्षक संघ के संगठन मंत्री के रूप में कार्य किया। लगभग 28 वर्षों के उनके नेतृत्व में राजस्थान शिक्षक संघ प्रदेश का सबसे बड़ा और प्रभावी शिक्षक संगठन बना। आदर्श विद्या मंदिरों के व्यापक विस्तार तथा सुदृढ़ संगठनात्मक निर्माण का श्रेय भी उन्हें ही जाता है।
सादगी और शाखा-निष्ठा
व्यापक प्रवास के बावजूद उनका जीवन अत्यंत सादा, अनुशासित और मितव्ययी था। वे संगठन के एक-एक पैसे को राष्ट्रधन मानते थे और अपने ऊपर अनावश्यक व्यय कभी स्वीकार नहीं करते थे।
उनके जीवन का सबसे प्रेरणादायक पक्ष उनकी शाखा-निष्ठा थी। वर्ष 1944 में प्रतिदिन शाखा जाने का जो संकल्प उन्होंने लिया, उसे जीवन की अंतिम साँस तक निभाया। वे परम पवित्र भगवा ध्वज को ईश्वर का साकार स्वरूप मानते थे तथा शाखा से लौटे बिना अन्न-जल ग्रहण नहीं करते थे।
अमर प्रेरणा
15 जुलाई, 2006 को यह राष्ट्रनिष्ठ, कर्मयोगी, तपस्वी और स्वाभिमानी व्यक्तित्व पंचतत्व में विलीन हो गया, किंतु उनके आदर्श आज भी राष्ट्रसेवा, शिक्षा, संस्कार और संगठन के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणापुंज बने हुए हैं।
ऐसे महान राष्ट्रऋषि, कर्मयोगी एवं स्वाभिमानी व्यक्तित्व श्रद्धेय श्री जयदेव पाठक जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।
🇮🇳 वन्दे मातरम् 🇮🇳
ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के हित में 300 महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों में हिन्दी माध्यम भी संचालित करने की दिशा में पहल करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp एवं माननीय शिक्षा मंत्री श्री @madandilawar जी का हार्दिक आभार एवं धन्यवाद।
यह निर्णय हजारों विद्यार्थियों को अपने निवास स्थान के निकट गुणवत्तापूर्ण विद्यालयी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुँच और समान अवसर को और अधिक सशक्त करेगा।
@Bhajanlalofc@RajCMO@rajeduofficial@ABRSM14121993
#Rajasthan #Education #HindiMedium #SchoolEducation
बड़ी खबर: भारत ने स्वदेशी GAGAN सिस्टम का इस्तेमाल करके पहली बार कमर्शियल सैटेलाइट-गाइडेड जेट लैंडिंग की।
उदयपुर एयरपोर्ट पर इंडिगो की सफल लैंडिंग।
GAGAN = भारत का अपना GPS एडेड GEO ऑगमेंटेड नेविगेशन।
कम से कम ज़मीनी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सटीक लैंडिंग (प्रिसिजन अप्रोच)।
सुरक्षित, सस्ता और ज़्यादा कुशल एविएशन — खासकर छोटे एयरपोर्ट्स के लिए।
रीजनल कनेक्टिविटी और 'आत्मनिर्भर भारत' को बढ़ावा।
ABRSM (विद्यालय शिक्षा) राजस्थान- प्रदेश स्तरीय प्रभावी प्रार्थना सभा कार्यशाला संपन्न..! प्रार्थना सभा से बच्चों में संस्कारवान शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना हो- हनुमान सिंह राठौड़
https://t.co/5T1Ksc1Dux
दो तानाशाह, एक जैसी इबारत।
क्या यूरोप नाजीवाद और फासीवाद का सच भुला सकता है?
भारत में इंदिरा गांधी के लगाए आपातकाल को भुलाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है?
आइए याद करे 25 जून 1975 की काली रात से शुरू वह दास्तान...
रिपोर्ट :
https://t.co/mjRO1CghH3
#HitlarGandhi
#NaziIndira
कांग्रेस की रैली के कारण जाम में फंसे NEET अभ्यर्थी
बेंगलुरु में NEET UG री-एग्जाम अभ्यर्थीयों के माता पिता ने आरोप लगाया कि पैलेस ग्राउंड्स में कांग्रेस की रैली की वजह से बहुत ज़्यादा ट्रैफिक जाम हो गया।
सब जानते थे कि आज एग्जाम है, फिर भी सड़कें घंटों से ब्लॉक हैं। स्टूडेंट्स अपने सेंटर्स तक कैसे पहुँचेंगे?
उच्चतम न्यायालय द्वारा सेवारत शिक्षकों के लिए टेट आवश्यक करने पर सीकर में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के हजारों कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन करते हुए शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा से विधायी हस्तक्षेप के माध्यम से राहत देने की मांग की गई और माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी और माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री @dpradhanbjp के नाम जिलाधीश को ज्ञापन दिया गया।
#शिक्षक_मांगे_TET_से_राहत
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) की अगले तीन वर्ष तक नव निर्वाचित कार्यकारिणी में प्रदेश संगठन मंत्री श्री उमराव लाल वर्मा,अध्यक्ष श्री रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री श्री महेंद्र कुमार लखारा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री संपत सिंह, कोषाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्र कच्छावा, उपाध्यक्ष महिला श्रीमती लक्ष्मी स्वामी आगामी तीन वर्षों के लिए निर्वाचित हुए।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) की अगले तीन वर्ष तक नव निर्वाचित कार्यकारिणी में प्रदेश संगठन मंत्री श्री उमराव लाल वर्मा,अध्यक्ष श्री रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री श्री महेंद्र कुमार लखारा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री संपत सिंह, कोषाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्र कच्छावा, उपाध्यक्ष महिला श्रीमती लक्ष्मी स्वामी आगामी तीन वर्षों के लिए निर्वाचित हुए।
भारत ने अपनी सीमाओ की सुरक्षा के लिए ऐसी हाईटेक तकनीक विकसित कर ली है जो घुसपैठियों को घने कोहरे , बारिश और अंधेरों में भी ट्रेक कर सकती है !!
ये नया भारत है ये मोदी जी का भारत है !!
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बंगाल के अंदर तत्कालीन BJP अध्यक्ष JP नड्डा जी पर TMC के गुंडों द्वारा हमला हुआ था
तब इस पर 'अभिषेक बनर्जी' ने कहा था :-
- यह तो जनता का गुस्सा है
- मैं इसमें क्या कर सकता हूँ?
- लोगों के आक्रोश का प्रकोप मेरी ज़िम्मेदारी नहीं है।
*टीईटी समीक्षा याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से प्रभावित लाखों शिक्षकों के लिए तत्काल विधायी राहत की अपील*
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM), जो देशभर में 14 लाख से अधिक शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाला शिक्षक संगठन है, शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) प्रकरण से संबंधित समीक्षा याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय से उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर गहरी चिंता एवं पीड़ा व्यक्त करता है।
इस निर्णय से देशभर के लाखों शिक्षकों में व्यापक असंतोष एवं गंभीर मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई है, जो वर्षों से समर्पण एवं निष्ठा के साथ विद्यालयों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
प्रभावित शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू सरकारी नियमों एवं अधिसूचनाओं के अंतर्गत सक्षम प्राधिकरणों द्वारा विधिवत प्रक्रिया अपनाकर की गई थी। इनमें से अनेक शिक्षकों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में समर्पित किए हैं तथा ग्रामीण, शहरी एवं वंचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
ABRSM सरकार के समक्ष निम्नलिखित बिंदु प्रस्तुत करता है—
वर्तमान कानूनी स्थिति के कारण लाखों शिक्षकों को, वर्षों की सेवा देने के बावजूद, अपूरणीय क्षति उठानी पड़ सकती है। उनकी सेवा स्थितियों को लेकर उत्पन्न अचानक अनिश्चितता विद्यालयों के संचालन एवं समग्र शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी।
यह विषय मानवीय एवं प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः इसमें सरकार के त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
पूर्व में भी इस प्रकार की परिस्थितियों में व्यापक जनहित एवं संस्थागत स्थिरता बनाए रखने हेतु विधायी उपायों के माध्यम से कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान किया गया है।
उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि आगामी संसद के मानसून सत्र में उपयुक्त अध्यादेश अथवा विधायी संशोधन लाकर प्रभावित शिक्षकों को तत्काल राहत प्रदान करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएँ। ऐसा कदम शिक्षकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में निरंतरता एवं स्थिरता सुनिश्चित करेगा।
हमें पूर्ण विश्वास है कि सरकार शिक्षकों की भावनाओं एवं चिंताओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए इस विषय में सहानुभूतिपूर्वक एवं निर्णायक कदम उठाएगी। शिक्षकों ने सदैव राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वे न्याय एवं सेवा सुरक्षा के अधिकारी हैं।
ABRSM यह भी सम्मानपूर्वक कहना चाहता है कि यदि लाखों पीड़ित शिक्षकों को समय रहते राहत प्रदान नहीं की गई, तो वे अपने अधिकारों एवं आजीविका की रक्षा हेतु लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए बाध्य हो सकते हैं। हमें आशा है कि सरकार के सकारात्मक एवं सक्रिय हस्तक्षेप से ऐसी स्थिति उत्पन्न होने से बचा जा सकेगा।
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