मंदिरों में आने वाला चढ़ावा यदि पारदर्शी और जनहितकारी तरीके से शिक्षा व स्वास्थ्य पर खर्च हो, तो उससे उत्कृष्ट स्कूल, कॉलेज और आधुनिक अस्पताल बन सकते है!
टी. एन. शेषन देश के मुख्य चुनाव आयुक्त थे। एक बार वे अपनी पत्नी और सुरक्षा दल के साथ उत्तर प्रदेश के दौरे पर जा रहे थे। रास्ते में उनकी पत्नी की नज़र एक पेड़ पर लटक रहे सुंदर बया के घोंसले पर पड़ी।
घोंसला इतना आकर्षक था कि उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,
“यह घोंसला मुझे ला दीजिए, घर सजाने के काम आएगा।”
शेषन साहब ने तुरंत अपने एक सुरक्षाकर्मी को घोंसला उतार लाने का निर्देश दिया।
सुरक्षाकर्मी ने पास ही भेड़-बकरियाँ चरा रहे एक किशोर को बुलाया और कहा,
“बेटा, यह घोंसला उतार दो। दस-बीस रुपये मिल जाएंगे।”
लेकिन लड़के ने बिना एक पल सोचे साफ़ इनकार कर दिया।
सुरक्षाकर्मी ने पैसे बढ़ाने की बात भी कही, पर वह टस से मस नहीं हुआ। आखिरकार उसने लौटकर सारी बात शेषन साहब को बता दी।
यह सुनकर शेषन साहब स्वयं कार से उतरे और उस किशोर के पास पहुँचे। उन्होंने मुस्कुराकर कहा,
“अगर तुम यह घोंसला उतार लाओगे तो मैं तुम्हें दस नहीं, पूरे पचास रुपये दूँगा।”
लड़के ने फिर भी विनम्रता से मना कर दिया।
शेषन साहब ने हैरानी से पूछा,
“इतने पैसे भी नहीं चाहिए? आखिर क्यों?”
किशोर ने मासूमियत से घोंसले की ओर देखा और बोला,
“साहब, इस घोंसले में छोटे-छोटे बच्चे हैं। शाम को उनकी माँ उनके लिए दाना लेकर आएगी। अगर घोंसला ही नहीं मिलेगा, तो उसे कितना दुख होगा। चाहे आप जितने भी पैसे दे दें, मैं यह घोंसला नहीं उतारूँगा।”
उस अनपढ़ चरवाहे के इन सरल शब्दों ने देश के सबसे शक्तिशाली अधिकारियों में से एक टी. एन. शेषन को भीतर तक झकझोर दिया।
बाद में इस घटना का उल्लेख करते हुए शेषन साहब ने लिखा
“आज भी मुझे इस बात का अफसोस होता है कि एक उच्च शिक्षित आईएएस अधिकारी होने के बावजूद मेरे मन में वह संवेदना क्यों नहीं थी, जो उस अनपढ़ किशोर के मन में थी। उस दिन मेरी डिग्रियाँ, मेरा पद, मेरी प्रतिष्ठा और मेरा अहंकार—सब उस बच्चे की करुणा के सामने छोटे पड़ गए। उसने मुझे सिखाया कि बुद्धि, पद और धन तभी सार्थक हैं, जब उनके साथ संवेदनशीलता भी हो।
- सोशल मीडिया से साभार
नॉन TET शिक्षकों को सुरक्षित करने के लिए यूपी के बेसिक शिक्षा विभाग ने स्पेशल टेट का जो विचार हवा में लहराया है उसपर एक सार्थक और तथ्यात्मक बहस तो बनती है !
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Prateek Yadav के निधन से यादव कुनबे पर टूटा पहाड़ तो Shivpal Yadav के बेटे Aditya Yadav बन गए परिवार के सबसे बडे़ सहारा, Prateek की अर्थी को कंधा देने से लेकर अंतिम संस्कार की व्यवस्थाओं तक,,फूट-फूट के रोने से लेकर अस्थि विसर्जन की emotional video तक..Charcha Mein में Aditya Yadav..जानिए Aditya Yadav के बारे में उनकी married life से लेकर controversy और budaun mp बनने तक का सफर
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अखिलेश तिवारी अयोध्या की सोहावल तहसील के इस्माइल नगर गाँव के निवासी थे,
पिछले हफ्ते गंभीर बीमारी से स्वर्गवास हो गया,
पीछे चार बेटियां और छोटा बेटा छोड़ गए हैँ,
टूटा फूटा घर और बच्चों के खाने के भी वांदे,
दो बेटियां गाँव के स्कूल में ही दो -दो हज़ार की मामूली सैलरी में पढ़ाती हैँ,
ग़रीबी से निकालना तो मुश्किल है,
लेकिन हम लोग इनकी थोड़ी थोड़ी करके कुछ अच्छी मदद कर ही सकते हैँ,
मैंने तो प्रण ले लिया है कि
इनके टूटे फूटे घर की पक्की छत पड़वाकर ही रहूँगा,
नहीं तो घंटा का LEGEND,
मदद तो आप लोग को भी करनी ही पड़ेगी,
QR कोड वीडियो में भी है
और कॉमेंट बॉक्स में भी डाल दूंगा
गरीब ब्राम्हण परिवार की मदद करने का आपका समय शुरू होता है अब,
तोड़ दो आज जात पात, और धर्म मजहब के बंधन को,
पूज्य संत श्री
@myogiadityanath जी
एक पत्र बता रहा है कि आप शिक्षामित्र का सम्मान कर रहे है महोदय आप चिंतन करिये ये वर्ग कहाँ था और आज कंहा है आप अभी कोर्ट से आये फैसले पर यदि विचार कर ले तो सभी का जीवन बदल जायेगा और आप के कर कमलों से हमरा भला हो जायेगा यही हमारा सम्मान होगा
बड़ी खबर : शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी के ऐलान के बाद अब शिक्षामित्रों के कार्यक्रम में शामिल होंगे Yogi Adityanath
5 मई📍गोरखपुर
इस मौके पर होगा भव्य स्वागत और सम्मान समारोह 🎉
प्रदेशभर से शिक्षामित्रों के जुटने की संभावना, कार्यक्रम को लेकर जबरदस्त उत्साह
क्या इस मंच से मिल सकते हैं और बड़े तोहफे? 👀
*LIVE :* https://t.co/fUPQ4KUD6t
चिलचिलाती गर्मी में घर घर जा कर जनसंख्या करना बहुत मुश्किल,पकाऊ और जोखिम भरा है !
लेकिन संविदा पर काम करने वाले आंगनबाड़ी कर्मियों, पंचायत सहायकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए उससे भी कहीं ज्यादा !!
कैसे !? इस वीडियो से समझिए !
https://t.co/07wYar8PU9
उत्तर प्रदेश के पंचायत सहायकों की आवाज नक्कारखाने में तूती जैसी है ! होनहार विद्यार्थी थे अपने गांव के ! पिछले कई साल से 6000 रुपए में खट रहे हैं अपनी पंचायतों में ! कुछ एक ने हार कर दूसरी प्राइवेट नौकरी कर ली ! कुछ अभी भी इस उम्मीद में चले जा रहे हैं कि एक दिन उनका भी मानदेय बढ़ेगा ! एक दिन वो भी स्थाई हो जाएंगे ! एक दिन वो भी इज्जत की जिंदगी जीयेंगे ! इन पंचायत सहायकों को अब तक मायूसी हाथ लगी है !
@psunionup@BrijeshMishraPA
कोई भी प्राइमरी या जूनियर स्कूल का टीचर इम्तिहान के जरिए हटाने की कोशिश हो रही है हटा भी दिया जाएगा समाजवादी पार्टी उनको सवेतन उन्हें बहाल करेगी पूरी नौकरी को जोड़ते हुए।
आदरणीय प्रोफेसर राम गोपाल यादव जी का संबोधन।
समाजवादी पार्टी ने आज शिक्षामित्रों पर वीडियो शेयर किया, जिसमें हमारे चैनल NS NOW की क्लिप का इस्तेमाल किया गया है।
यह साबित करता है कि हम लगातार आपकी आवाज़ को ज़मीन से उठाकर बड़े मंच तक पहुँचा रहे हैं।
NS NOW आपकी आवाज़, आपकी ताकत। #Shikshamitra#NSNOW
शिक्षकों और शिक्षा मित्रों का अपमान करने का काम भारतीय जनता पार्टी ने किया है। उनकी नीतियों के दुष्परिणाम इतने गंभीर रहे हैं कि शिक्षा मित्रों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।
इसके विपरीत, हम सबके नेता और PDA की उम्मीद आदरणीय अखिलेश यादव जी ने स्पष्ट कहा है कि समाजवादी पार्टी हमेशा शिक्षकों के साथ खड़ी रही है। पार्टी ने हर उस छात्र और नौजवान के संघर्ष को समझा है, जिन्हें भाजपा सरकार ने प्रताड़ित किया और जिनकी आवाज़ को बूट और बंदूक के बल पर दबाने की कोशिश की गई।
2027 में जब प्रदेश में PDA की सरकार बनेगी, तब इन सभी सम्मानित शिक्षकों, B.P.Ed, B.Ed, BTC से जुड़े नौजवानों के अधिकारों की रक्षा करते हुए समाजवादी पार्टी उन्हें उनका सम्मान और हक दिलाने का काम करेगी।
#नौजवान_का_हक #शिक्षक_सम्मान
#PDA_की_सरकार
शिक्षामित्रों की मांगों को ध्यान से सुना तथा अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा को शिक्षामित्रों की मांगों को स्वीकार करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करते हुए शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए, ताकि भर्ती परीक्षा में TET पास शिक्षामित्रों को किसी प्रकार की समस्या न आए।
जो पीड़ित है, वही PDA है।
"9 साल तक भाजपा सरकार ने शिक्षामित्रों का हक मारा। अब जो बढ़ाया भी वह समाजवादी सरकार से 22 हजार कम है।
अब जब भाजपा सरकार का परमानेंट रिटायरमेंट तय हो गया, तब इन्हें शिक्षामित्रों की याद आई।
शिक्षामित्र भी भाजपा को हराएंगे और PDA की सरकार बनाएंगे।
शिक्षामित्र चिंता न करें, बुरे दिन अब जाने वाले हैं।
शिक्षामित्र-अनुदेशक साथियों के मानदेय वृद्धि के संबंध में बहुप्रतीक्षित आदेश निर्गत।
सरकार ने सकारात्मक कदम आगे बढ़ाया ही था तो यह 11 माह वाला क्लॉज भी हटा देना चाहिए था। उस एक माह में भी उनको घर चलाना होता है।
@rajendradev6@shivkmishra