आप गुजरात में मजदूरों की भी आवाज़ उठाएं जो 12 घंटा काम कराया जा रहा है।और संडे को हफ्ते में एक दिन छुट्टी भी नहीं दे रहे हैं सेठ लोग गुजरात के। सत्तापक्ष विपक्ष दोनों में कोई भी उनकी आवाज नहीं उठा रहा है 2 महीने से लगभग मजदूर हड़ताल कर रहे हैं गुजरात में। वो भी लोग इंसान है
@IPSinghSp आप गुजरात में मजदूरों की भी आवाज़ उठाएं जो 12 घंटा काम कराया जा रहा है।और संडे को हफ्ते में एक दिन छुट्टी भी नहीं दे रहे हैं सेठ लोग गुजरात के। सत्तापक्ष विपक्ष दोनों में कोई भी उनकी आवाज नहीं उठा रहा है 2 महीने से लगभग मजदूर हड़ताल कर रहे हैं गुजरात में। वो भी लोग इंसान है
आप गुजरात में मजदूरों की भी आवाज़ उठाएं जो 12 घंटा काम कराया जा रहा है।और संडे को हफ्ते में एक दिन छुट्टी भी नहीं दे रहे हैं सेठ लोग गुजरात के। सत्तापक्ष विपक्ष दोनों में कोई भी उनकी आवाज नहीं उठा रहा है 2 महीने से लगभग मजदूर हड़ताल कर रहे हैं गुजरात में। वो भी लोग इंसान है
@CJP_for_India आप गुजरात में मजदूरों की भी आवाज़ उठाएं जो 12 घंटा काम कराया जा रहा है।और संडे को हफ्ते में एक दिन छुट्टी भी नहीं दे रहे हैं सेठ लोग गुजरात के। सत्तापक्ष विपक्ष दोनों में कोई भी उनकी आवाज नहीं उठा रहा है 2 महीने से लगभग मजदूर हड़ताल कर रहे हैं गुजरात में। वो भी लोग इंसान है
आप गुजरात में मजदूरों की भी आवाज़ उठाएं जो 12 घंटा काम कराया जा रहा है।और संडे को हफ्ते में एक दिन छुट्टी भी नहीं दे रहे हैं सेठ लोग गुजरात के। सत्तापक्ष विपक्ष दोनों में कोई भी उनकी आवाज नहीं उठा रहा है 2 महीने से लगभग मजदूर हड़ताल कर रहे हैं गुजरात में। वो भी लोग इंसान है
आप गुजरात में मजदूरों की भी आवाज़ उठाएं जो 12 घंटा काम कराया जा रहा है।और संडे को हफ्ते में एक दिन छुट्टी भी नहीं दे रहे हैं सेठ लोग गुजरात के। सत्तापक्ष विपक्ष दोनों में कोई भी उनकी आवाज नहीं उठा रहा है 2 महीने से लगभग मजदूर हड़ताल कर रहे हैं गुजरात में। वो भी लोग इंसान है
@abhijeet_dipke आप गुजरात में मजदूरों की भी आवाज़ उठाएं जो 12 घंटा काम कराया जा रहा है।और संडे को हफ्ते में एक दिन छुट्टी भी नहीं दे रहे हैं सेठ लोग गुजरात के। सत्तापक्ष विपक्ष दोनों में कोई भी उनकी आवाज नहीं उठा रहा है 2 महीने से लगभग मजदूर हड़ताल कर रहे हैं गुजरात में। वो भी लोग इंसान है
फूलपुर के ढोकरी गाँव से एक कहानी आई है। कहानी मुकदमे की नहीं है। कहानी उस ब्राह्मण परिवार की है जिसे अदालत ने हक दिया, लेकिन ज़मीन पर खड़ा होना फिर भी अपराध बन गया।
परिवार ने सालों लड़ाई लड़ी। कागज़ जमा किए, तारीखें खाईं, पैसा गलाया। आखिर अदालत ने कहा ज़मीन तुम्हारी है। जीत मिली। सामान्य देश में इसके बाद आदमी अपनी ज़मीन पर पत्रा रख आता। यहाँ पत्रा रखने पहुँचे तो संख्याबल आ गया। हमला हुआ। फिर वही पुराना फॉर्मूला चला Sc St Act , कई धाराएँ, और परिवार का छोटा बेटा जेल।
अब घर का हाल यह है कि कमाने वाले हाथ कम हैं, मुकदमे का बोझ बढ़ा है, जेल में बंद बेटे की चिंता है, और रोज की रोटी भी सवाल बन गई है। यानी जिस ज़मीन के लिए अदालत लड़ी गई, उसी ज़मीन ने परिवार को आर्थिक और मानसिक संकट में डाल दिया।
यहाँ सवाल सीधा है। अगर कोर्ट से हक मिलने के बाद भी अपनी ज़मीन पर खड़ा होना इतना मुश्किल है, तो उस फैसले का अर्थ क्या रह गया? कागज़ पर मालिक, मैदान पर आरोपी। कानून पढ़ने वाले जीतते हैं, संख्या गिनने वाले केस लिखवाते हैं।
यह कोई भावुक कहानी नहीं है। यह उस व्यवस्था की तस्वीर है जहाँ हक साबित करना एक लड़ाई है, और साबित होने के बाद भी खड़ा रहना दूसरी लड़ाई। परिवार आज इंसाफ नहीं माँग रहा किसी नारे के साथ। वो बस यह पूछ रहा है अपनी ज़मीन पर खड़ा होना भी अब जुर्म है क्या?
ओबीसी आरक्षण के 110 साल के लंबे संघर्ष का परिणाम रहा है 1990। हमारे उन समाजवादी नेताओं को सलाम, जिनकी हिम्मत की वजह से ओबीसी आरक्षण लागू हो पाया, बिना इस भय के कि सरकार रहेगी या जाएगी।
110 साल का इतिहास इस YouTube
https://t.co/aUcSgAndQS
यूपी पुलिस द्वारा मनोज यादव जी की अनैतिक रूप से गिरफ्तारी और उन्हें गायब किए जाने की घटना बेहद भयावह है और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के खिलाफ भाजपाई साजिश का प्रमाण है।
किस मुंह से मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जी यूपी में लोकतंत्र के दावे करते हैं जबकि लोकतंत्र का खात्मा और तानाशाही, अपराध और पुलिसिया गुंडाराज का विस्तार कर रहे हैं मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जी।
@Manoj_Yadav_ जी को तुरंत रिहा किया जाए।
जय भीम साथियों,
अज़रा क़रीब दो हफ़्ते बाद मेदांता अस्पताल (गुरुग्राम) से डिस्चार्ज होकर घर लौट आई हैं। एक गंभीर और रेयर ट्यूमर की दो बड़ी सर्जरी सफल रही हैं। आगे इलाज और थेरेपी का दौर अभी बाकी है, लेकिन इस वक्त दिल में राहत है, उम्मीद है और हिम्मत है।
ज़िंदगी के इस सबसे मुश्किल दौर में जिन-जिन लोगों ने हमारा साथ दिया, हौसला बढ़ाने वाले शब्दों से, लगातार हाल-चाल पूछकर, आर्थिक मदद करके और बेइंतहा मोहब्बत और भरोसा जताकर… हम उन सभी के तहेदिल से शुक्रगुज़ार हैं।
आप सबकी मौजूदगी ने हमें टूटने नहीं दिया। हर मैसेज, हर कॉल हमारे लिए ताक़त बनकर खड़ी रही।
हम जानते हैं कि हर एक का नाम लेना मुमकिन नहीं है, लेकिन यक़ीन मानिए, आप सबका एहसान हमारे दिलों में हमेशा रहेगा।
आप सभी साथियों और चाहने वालों का दिल से शुक्रिया।
हम बहुत जल्द आप सभी का आभार जताने के लिए एक वीडियो मैसेज भी साझा करेंगे।
- अज़रा और सुमित
सलमान ने कुबूल किया कि सैफई में करोड़ों रूपये लेकर नाचा था-
सपा सरकार में “जनता के पैसे” को किस तरह खुद के शौक के लिए “नाच-गाने” पर उड़ाया गया था?
जनता के पैसे उड़ा दिया... दोबारा खुद के पैसे से हिम्मत नहीं हुई क्योंकि सत्ता ही चली गयी थी?