जंतर मंतर की भीड़ बता रही है कि देश के युवाओं में सरकार के प्रति नाराज़गी है।इंसान के अंदर का डर निकल जाना,किसी भी निज़ाम के लिए अच्छे संकेत नहीं होते।प्रधानमंत्री जी संसद में बोल कर चले गए,लेकिन 2 km दूर चल रहे इस धरने का ज़िक्र तक नहीं किया…
मैं यहाँ लेटी हूँ,
और तुम्हारे बारे में सोचते हुए
मुझे बार-बार लगता है
प्रेम शायद कोई भावना नहीं,
एक पूरा भूगोल है।
और तुम्हारी आँखें
उस भूगोल का सबसे विश्वसनीय मानचित्र।
तुम धीरे-धीरे
मेरे भीतर फैलते हो,
ठीक वैसे
जैसे उष्णकटिबंधीय जंगल
अपनी हरियाली से
धरती को ढँक लेते हैं।
फिर अचानक...
एक अनकहा चक्रवात
मन की सारी स्थिरता
अपने साथ बहा ले जाता है।
तुम्हारी स्मृतियाँ
गल्फ स्ट्रीम की उन गर्म धाराओं जैसी हैं,
जो दिखाई नहीं देतीं,
फिर भी
पूरे महासागर का ताप बदल देती हैं।
मेरे भीतर भी
ऋतुएँ तुम्हीं से तय होती हैं।
जहाँ तुम हो,
वहाँ अपने आप
वसंत उग आता है।
और जहाँ तुम्हारी अनुपस्थिति ठहरती है,
वहाँ धीरे-धीरे
रेत फैलने लगती है
इतनी कि
भावनाएँ भी पानी खोजने लगती हैं।
प्रेम का यह सारा भूगोल
आख़िरकार
तुम्हारी आँखों पर आकर ठहर जाता है।
मेरे भीतर की हर दिशा,
हर दूरी,
हर रास्ता,
हर निर्देशांक
तुम्हारी ओर ही संकेत करता है।
और तुम्हारी आवाज़...
मानो अमेज़न का उद्गम
निर्मल, गहरा, जीवन से भरा।
मैं हर बार
उसी स्रोत तक लौटना चाहती हूँ,
क्योंकि शायद
मेरे भीतर बहने वाली हर नदी
वहीं से जन्म लेती है।
प्रिय!
कई रातों से तुम्हारी
स्मृतियाँ ,
मन की चौखट पर ,
अस्थि विसर्जन की प्रतीक्षा करती
राख सी ठहरी हैं .
तुम यदि एक बार
अपनी आवाज़ की गंगा बहा दो ,
क्या पता ?
इन अधजली
अनुभूतियों को भी ,
मोक्ष का
कोई तट मिल जाए.
_अ|जे|य🕊️
पैंतीस सौ के चक्कर में ये पुलिस वाले ना अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं बल्कि पूरे बिहार पुलिस और मुख्यमंत्री तक को बदनाम करवा रहे हैं …जितने भी पुलिसकर्मी इसमें दिख रहे हैं उनपर ऐसी करवाई कीजिए की दूसरों के लिए सीख हो @bihar_police@samrat4bjp
राहुल गांधी ने आज जरूरी संवाद किया। जरूरी पहल की।जरूरी मुद्दा उठाया।
एजुकेशन सिस्टम पर बात की।यह पहल इसीलिए अच्छी है कि इससे राजनीतिक डिस्कोर्स बदलेगा। उनकी बात को सपोर्ट कीजिए।खारिज कीजिए, इस मुद्दे पर बात कीजिए।
और बड़ी बात की यह संवाद उनसे किया जो इसके स्टेकहोल्डर हैं
"सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ, ठीक है"
गाजियाबाद में 13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को अंतिम विदाई !!
हरीश अब दिल्ली एम्स पहुंच गए हैं। यहां उनके लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम हटाए जाएंगे और उन्हें इच्छा मृत्यु दी जाएगी। इस देश में कोई भी हरीश को ठीक नहीं कर पाया।
उन मां–बाप के लिए बेहद भावुक पल था, जब वो हरीश को आखिरी विदाई दे रहे थे। उन्हें पता था कि हरीश अब कभी उठ खड़े नहीं हो सकते, फिर भी वो 13 साल तक बेड पर उसकी सेवा करते रहे।