ये मुसलमान है। ये महिला है। ये पत्रकार है। ये Gen-Z है।
जुर्म इतना है कि देशभक्त महिला पत्रकार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से सवाल पूछ लिया। फिर अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने बेरहमी से इस बहन की पिटाई कर दी।
मोदी जी के अमृतकाल वाले कथित न्यू इंडिया में अब मुसलमान होना, महिला होना और निष्पक्ष पत्रकार होना, सबसे बड़ा गुनाह है।
भाजपा ने पूरे देश में सत्ताई निरंकुशता की हर सीमा को लाँघ दिया है। निरंकुश भाजपा सरकारों से अब सवाल पूछना उनकी आलोचना करना ही सबसे बड़ा अपराध है।
दिल्ली हो या बिहार, हर जगह कायर भाजपाई अब पुलिस से पत्रकारों को पिटवा रहे हैं, डरा रहे हैं। भाजपा के शासनकाल में संवैधानिक संस्थाएं और ��ुलिस लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रतीक बन गई है।
"बिहार में जो 10 हज़ार दिए थे वह दोबारा महिलाओं को नहीं मिले। जो लोग 1500 रुपए नहीं दे पाएं उनसे उम्मीद करोगे 50 हज़ार देंगे?"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी, रसूलाबाद (कानपुर देहात)
कुछ लोग हर तस्वीर में राजनीति ढूँढ़ते हैं,
हम हर रिश्ते में संस्कार देखते हैं।
कमल चाहे किसी का चुनाव चिन्ह हो,
हमारे लिए सम्मान ही सबसे बड़ा चिन्ह है।
“बड़ों का सम्मान हमारी परवरिश है, राजनीति नहीं”
इस तस्वीर से साफ मालूम चल रहा है कि पहले से ही योजना बनाई गई थी एक प्रतिनिधि को एक कोने में आम जनता की तरह बैठाया गया जबकि दूसरे दल के प्रतिनिधि क�� सामने टेबल रखा गया है
साफ साफ दिख रहा है कि ये बीजेपी वाले कितना लोकतंत्र की मर्यादा में रहते हैं
"नीट में बच्चों की जान चली गई, आपने आश्वासन दिया कि मुकदमे नहीं लगेंगे बच्चों पर लेकिन मुकदमे लग रहे हैं। जिन परिवारों के बच्चों की जान गई उनकी क्या मदद की सरकार ने अभी तक?"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
उत्तर प्रदेश के इतिहास में जब अखिलेश यादव जी के कामों को सुनता और देखता हूं तो दिल गदगद हो जाता है और बांछे खिल जाती हैं कि
मैं एक ऐसे नेता को सपोर्ट कर रहा हूं जिन्होंने यूपी में विकास की गंगा बहा दी थी।
अखिलेश जी के जितने भी काम थे सब वर्ल्ड क्लास एकदम कोई भी माई का लाल उसमें कमी नहीं निकाल सकता है।
उत्तर प्रदेश में इतना ज्यादा काम करने के लिए किसी और नेता को 4 कार्यकाल लग जाएंगे।
अखिलेश यादव होना सबके बस की बात नहीं है।🧿❤️🚲🚲🚲❤️🧿