तंगलान फ़िल्म उत्तर भारत के सिनेमाघरों ने अपने पर्दे पर नही लगाई,क्योंकि उसमें बुद्ध से जुड़े इतिहास की सच्चाई के दृश्य शामिल हैं मूलनिवासियों की संस्क्रति के अवशेष उसमे दर्शाए गए हैं,सोचिये जो लोग आपके इतिहास से जुड़ी फिल्मों का बहिष्कार करते हैं उनकी सच्चाई से डरते हैं, तो क्या वह आपके अधिकारो को आसानी से दे देंगे। बिल्कुल नही देंगे। आपको संघर्ष करना होगा।
थंगलान का बेहद मार्मिक वो दृश्य जिसमें दलित महिलाएं पहली बार ब्लाउज पहनकर अपनी खुशी का इज़हार कर रही हैं, वाकई #Thangalaan कई मामलों में शानदार फिल्म है
फिल्म 'थंगलान' दलितों के इतिहास और अन्यायों को उजागर करती है, लेकिन उत्तर भारत में यह फ़िल्म स्क्रीनिंग के लिए समस्याओं का सामना कर रही है। ऐसे संवेदनशील विषयों की स्क्रीनिंग को समर्थन मिलना चाहिए ताकि इसका संदेश व्यापक रूप से पहुंच सके।
https://t.co/BnTC425zua
नांगेली का बलिदान हमें कभी नहीं भूलना चाहिए देखो जातिवादी लोगों ने कैसे हमारे ऊपर जुल्म ढहाए हैं।
नंगली ने कैसे ब्रेस्ट tax से छुटकारा दिलाया पढ़ो पूरा
Repost or bookmark करना मत भूल जाना और quote करके लिखना है
पढ़ो नांगली का बलिदान
दलित महिलाएं चुकाती थीं ‘ब्रेस्ट टैक्स’ 1729, मद्रास प्रेसीडेंसी में त्रावणकोर साम्राज्य की स्थापना हुई। राजा थे मार्थंड वर्मा। साम्राज्य बना तो नियम-कानून बने। टैक्स लेने का सिस्टम बनाया गया। जैसे आज हाउस टैक्स, सेल टैक्स और जीएसटी, लेकिन एक टैक्स और बनाया गया...ब्रेस्ट टैक्स मतलब स्तन कर। ये कर दलित और ओबीसी वर्ग की महिलाओं पर लगाया गया।
ब्रेस्ट साइज के हिसाब से टैक्स त्रावणकोर में निचली जाति की महिलाएं सिर्फ कमर तक कपड़ा पहन सकती थी। अफसरों और ऊंची जाति के लोगों के सामने वे जब भी गुजरती उन्हें अपनी छाती खुली रखनी पड़ती थी। अगर महिलाएं छाती ढकना चाहें तो उन्हें इसके बदले ब्रेस्ट टैक्स देना होगा। इसमें भी दो नियम थे। जिसका ब्रेस्ट छोटा उसे कम टैक्स और जिसका बड़ा उसे ज्यादा टैक्स। टैक्स का नाम रखा था मूलाक्रम।
चाकू से फाड़ देते थे महिलाओं के कपड़े नादर वर्ग की महिलाओं ने कपड़े से सीना ढका तो सूचना राजपुरोहित तक पहुंच जाती थी। पुरोहित एक लंबी लाठी लेकर चलता था जिसके सिरे पर एक चाकू बंधी होती थी। वह उसी से ब्लाउज खींचकर फाड़ देता था। उस कपड़े को वह पेड़ों पर टांग देता था। यह संदेश देने का एक तरीका था कि आगे कोई ऐसी हिम्मत न कर सके।
नंगेली ने कुरीतियों की खटिया खड़ी कर डाली 19वीं शताब्दी की शुरुआत में चेरथला में नांगेली नाम की एक महिला थी। स्वाभिमानी और क्रांतिकारी। उसने तय किया कि ब्रेस्ट भी ढकूंगी और टैक्स भी नहीं दूंगी। नांगेली का यह कदम सामंतवादी लोगों के मुंह पर तमाचा था। अधिकारी घर पहुंचे तो नांगेली के पति चिरकंडुन ने टैक्स देने से मना कर दिया। बात राजा तक पहुंच गई। राजा ने एक बड़े दल को नांगेली भेज दिया।
अफसरों को पत्ते पर सजाकर सौंप दिया अपना कटा स्तन राजा के आदेश पर टैक्स लेने अफसर नांगेली के घर पहुंच गए। पूरा गांव इकट्ठा हो गया। अफसर बोले, "ब्रेस्ट टैक्स दो, किसी तरह की माफी नहीं मिलेगी।" नांगेली बोली, 'रुकिए मैं लाती हूं टैक्स।' नांगेली अपनी झोपड़ी में गई। बाहर आई तो लोग दंग रह गए। अफसरों की आंखे फटी की फटी रह गई। नांगेली केले के पत्ते पर अपना कटा स्तन लेकर खड़ी थी। अफसर भाग गए। लगातार ब्लीडिंग से नांगेली जमीन पर गिर पड़ी और फिर कभी न उठ सकी।
नांगेली की चिता में कूदकर पति ने दी जान नांगेली की मौत के बाद उसके पति चिरकंडुन ने भी चिता में कूदकर अपनी जान दे दी। भारतीय इतिहास में किसी पुरुष के 'सती' होने की यह एकमात्र घटना है। इस घटना के बाद विद्रोह हो गया। हिंसा शुरू हो गई। महिलाओं ने फुल कपड़े पहनना शुरू कर दिए। मद्रास के कमिश्नर त्रावणकोर राजा के महल में पहुंच गए। कहा, "हम हिंसा रोकने में असफल साबित हो रहे हैं कुछ करिए।" राजा बैकफुट पर चले गए। उन्हें घोषणा करनी पड़ी कि अब नादर जाति की महिलाएं बिना टैक्स के ऊपर कपड़े पहन सकती हैं।
अंग्रेजों के बढ़ते दबदबे से महिलाओं को मिली राहत अंग्रेजी दीवान जर्मनी दास ने अपनी किताब 'महारानी' में इस कुप्रथा का जिक्र करते हुए लिखा, “संघर्ष लंबा चला। 1965 में प्रजा जीत गई और सभी को पूरे कपड़े पहनने का अधिकार मिल गया। इस अधिकार के बावजूद कई हिस्सों में दलितों को कपड़े न पहनने देने की कुप्रथा चलती रही।
जय भीम जय जोहार जय संविधान
प्रशांत किशोर के 5000 के भाड़े के लोगो को
मीडिया ने खूब चलाया ।
आज चंद्रशेखर आजाद की इस महा रैली को मनुवादी मीडिया नही दिखा रही है ।
ये होता है मनुवादी मीडिया का दोहरा चरित्र ।
#इंदिरा_गाँधी_स्टेडियम_चलो#Reservation
ये शख्स अगले पांच साल के अंदर उत्तर भारत से बड़े पैरों को जमीन से उखाड़कर फेंकने वाला है, कोई रोक नहीं सकता।।
नाम याद रखना - चन्द्रशेखर आजाद 👑
@BhimArmyChief
यह पैसे देकर बुलाई हुई भीड़ नहीं है,
दारू पिलाकर चिकन खिलाकर जबरदस्ती ट्रक में भरकर ला हुए लोग नहीं है
यह सब अपने आप आए हैं उनके दिलों में विश्वास है चंद्रशेखर आजाद अच्छा आदमी है
अच्छा नेता है
यह हमारा भविष्य सुधरेगा
यह हमारी सरकार बनाएं
- एड चंद्रशेखर आजाद, नगीना सांसद
#इंदिरा_गाँधी_स्टेडियम_चलो
#11_सितम्बर_चलो_दिल्ली
@BhimArmyChief
सीनियर पत्रकार योगी आदित्यनाथ के जातिवादी राजनीति पर तथ्यों के साथ बेबाकी से बोल रहें हैं। लेकिन यहां दिल्ली और नोएडा वाले चैनलों को पता नहीं सच से क्या एलर्जी है? जातिवादी नेताओं के जातिवाद पर किसी चैनल को बात करते सुना किसी ने?
https://t.co/8NViNxFhKt
#RahulGandhiInUSA
पहली बार किसी अंबेडकरवादी ने ओलंपिक में गोल्ड जीता है।
पैराओलंपिक शूटिंग में गोल्ड जीतने वाली अवनी लेखरा जी को बधाइयां रुकनी नहीं चाहिए।
आज सारे अंबेडकरवादी बहुत बधाई देंगे।
जय भीम
#AvaniLekhara
जातिवादी लोगो को अब और ज्यादा दर्द होगा।
तुम लोग तो ओलंपिक में गोल्ड नही ला पाए।
पर दलित वर्ग से आने वाली, देश की गोल्डन गर्ल अवनी लेखरा ने पेरिस पैराओलंपिक 2024 में स्वर्ण पदक जीत लिया।
जलो मत अब बधाई दो।
पैरालंपिक खेलों के इतिहास में दो स्वर्ण पदक जीते है।
#AvaniLekhara #Paralympics2024
#Paris2024 #ParisParalympics