@TheOfficialSBI@CyberDost@CyberCrimeshyd
I have lodged a cyber fraud complaint but no action has been taken yet.
Fraud Date: 11/04/2026 - 14/04/2026
Amount: ₹20K
SBI Complaint No: 963713609
Cyber Crime Ref No: 22704260021008
Request urgent investigation and reversal of funds.
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मोटियारों तैयार हो जाओ सरकार की ये ओछी हरकतें पूरी दुनिया को दिखाई देनी चाहिए। अरावली के साथ ये मजाक नहीं चलेगा। करोड़ों पोस्ट #अरावली_बचाओ पर होनी चाहिए मीडिया पर विरोध होता है तो सवाल संसद में उठते है कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सरकार कठघरे मे आती है, नेता विपक्ष ओर संगठन सक्रिय होते हैं। धरातल पर भी आंदोलन छिड़ जाता है इसलिए बहुत जरूरी है कि आप सब ज्यादा से ज्यादा संख्या में द्वीट करें।
@byadavbjp जी पेट नहीं भर रहा तो अरावली कटा रहे हो😡😡
सरकार द्वारा अरावली श्रृंखला की 100 मीटर से नीचे की पहाड़ियों को काटने के आदेश जारी कर दिये.. हमें पुरजोर से इसका विरोध कर पर्यावरण सरंक्षण करना है
अरावली की हरियाली हमारी सांसें हैं! खनन और कटाई रोकें, धरोहर बचाएं। आवाज उठाओ, साथ जुड़ो! 🌳✊
अरावली नहीं तो पानी नहीं..!
अरावली नहीं तो जीवन नहीं.!
अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं,पानी की सांस है!
हवा की ढाल है,इसे खो देंगे तो आने वाला कल भी बंजर होगा.!
#अरावली_बचाओ
#savearavali @RajCMO@PMOIndia@narendramodi
मित्रों तैयार हो जाओ एक बार अरावली के लिए भी पुरजोर तरीके से आवाज उठाने के लिए।
कल शाम 7 बजे से ज्यादा से ज्यादा संख्या में ट्वीट करें
#अरावली_बचाओ
हमारी टीम पूरी तरह से तैयार हैं।हम सब का कर्तव्य है ये ओर हम चुप नहीं बैठेंगे।
"विकास के नाम पर विनाश का रास्ता"
भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमाला अरावली आज अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को “पहाड़” न मानने की व्याख्या सामने आई है, जिसने अरावली के विशाल भूभाग को कानूनी संरक्षण से बाहर करने का खतरा पैदा कर दिया है। यह केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय भविष्य को सीधे प्रभावित करने वाले हैं।
अरावली पर्वतमाला लगभग 692 किलोमीटर तक गुजरात से लेकर दिल्ली तक फैली है और इसे लगभग तीन अरब वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला माना जाता है। इसका दो-तिहाई हिस्सा राजस्थान में स्थित है, जहाँ यह जलवायु संतुलन, वर्षा चक्र और भूजल रिचार्ज की रीढ़ के रूप में कार्य करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अरावली न होती, तो पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत का बड़ा भूभाग रेगिस्तान में बदल चुका होता। ऐसे में इस प्राकृतिक ढाल को कमजोर करना दीर्घकालिक पर्यावरणीय आत्मघात से कम नहीं है।
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आँकड़े इस संकट की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। देश में मैप की गई 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 यानी महज 8.7 प्रतिशत ही 100 मीटर की ऊँचाई के मानक पर खरी उतरती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इस नई व्याख्या के बाद कानूनी सुरक्षा खो सकता है। यह स्थिति खनन, रियल एस्टेट और निजी परियोजनाओं के लिए रास्ता खोलती है, जबकि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए यह विनाश का संकेत है।
अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है। यह 300 से अधिक जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, लाखों पशुपालकों के लिए चारागाह है और बनास, साबरमती तथा लूणी जैसी नदियों का उद्गम स्थल भी है। इसकी चट्टानी संरचना वर्षा जल को रोककर उसे जमीन के भीतर पहुँचाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज होता है। पहले से ही जल संकट से जूझ रहे पश्चिमी राजस्थान के लिए अरावली का कमजोर होना सूखे को स्थायी बना देने जैसा होगा।
सरकार की पर्यावरण नीति की वास्तविक तस्वीर जोजरी नदी की उपेक्षा और खेजड़ी वृक्षों के साथ हो रहे व्यवहार से भी साफ होती है। खेजड़ी, जिसे राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और जो रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा है, आज योजनाबद्ध कटाई का शिकार बन रहा है। सरकारी आँकड़ों और जमीनी आकलनों के अनुसार, सोलर परियोजनाओं और औद्योगिक लीज़ के नाम पर अब तक लगभग 26 लाख खेजड़ी पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि आने वाले समय में करीब 50 लाख और खेजड़ी पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक पूर्ण विकसित खेजड़ी पेड़ के साथ अन्य पेड़ो को तैयार होने में लगभग 100 वर्ष लगते हैं, जिससे मरुस्थल के इस अनमोल पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
एक पेड़ औसतन 1,200 किलोलीटर ऑक्सीजन प्रतिवर्ष देता है। इस आधार पर, जो 26 लाख पेड़ काटे गए, वे हर साल लगभग 25 करोड़ किलोलीटर ऑक्सीजन प्रदान करते थे जो अब पूरी तरह बंद हो चुकी है। पेड़ों के कटने और बड़े पैमाने पर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के कारण तापमान में 3 से 4 डिग्री तक वृद्धि दर्ज की गई है। पर्यावरणविदों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम होने का यह एक प्रमुख कारण बन गया है। तापमान बढ़ने और आवास नष्ट होने के चलते रेगिस्तान के कई छोटे जीव भी विलुप्ति के कगार पर पहुँच गए हैं। जबकि यही पारिस्थितिकी तंत्र है जो न्यूनतम पानी में पनपता है, मिट्टी को बाँधकर मरुस्थलीकरण को रोकता है, पशुओं के लिए चारा देता है और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
विडंबना यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में अरावली की रक्षा के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। 1990 के दशक से लेकर एम.सी. मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया जैसे मामलों में कोर्ट ने राजस्थान और हरियाणा में अनियंत्रित खनन पर रोक लगाई और यह स्वीकार किया कि इससे होने वाला पर्यावरणीय नुकसान अपूरणीय है। ऐसे में आज उसी अरावली को कमजोर करने वाली व्याख्या सामने आना न केवल चिंताजनक है, बल्कि न्यायिक परंपरा के भी विपरीत प्रतीत होता है।
कल भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की पत्नी की तबीयत बिगड़ी —
5 मिनट में हेलीकॉप्टर तैयार,
15 मिनट में पाली पहुँचा,
आधे घंटे में जयपुर इलाज शुरू।
और आज जैसलमेर में 30 से ज़्यादा लोग आग से झुलस गए —
50% से ज़्यादा जले हुए शरीर के साथ पाँच घंटे की सड़क यात्रा करके जोधपुर पहुँच रहे हैं।
आख़िर जनता के लिए वही तत्परता क्यों नहीं दिखी?
क्या सरकार की संवेदनशीलता अब चेहरे देखकर तय होती है?
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar
बिश्नोई धर्म के 541वें स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान द्वारा स्थापित यह पवित्र धर्म हमें जीव दया, पर्यावरण संरक्षण और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
आइए, उनके बताए आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर प्रकृति, जीव-जंतु और मानवता की रक्षा का संकल्प लें।
#बिश्नोई_धर्म_स्थापना_दिवस
जिस बिल्डिंग पर प्लेन हुआ क्रैश, देखिये वहां की ताजा स्थिति
◆ देखिये न्यूज 24 संवाददाता भूपेंद्र सिंह ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट
#AirIndia | #Ahemdabad | Boeing विमान टेक | #AhemdabadPlaneCrash
यह घटना ना सिर्फ मानवता को शर्मसार कर रही है बल्कि राजस्थान की बीजेपी की डबल इंजन सरकार में राज्य की कानून व्यवस्था पर भी गम्भीर सवाल खड़े करती है।
@BeawarPolice
से अनुरोध है इस घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों को यथाशीघ्र गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें।