#शिक्षक_सम्मान_बचाओ
प्रदेश के हज़ारों शिक्षकों ने लखनऊ पहुँचकर स्पष्ट कर दिया कि शिक्षक सरकार से नहीं ,महानिदेशक महोदय की कार्यप्रणाली से त्रस्त हो चुका है।वार्ता में महासंघ के अध्यक्ष जी ने स्पष्ट कहा कि अकारण शिक्षकों के निलंबन व वेतन अवरुद्ध किय��� जा रहे हैं ।निलंबन से सेवा में बहाली का न्यूनतम रिश्वत एक लाख है ।उन्होंने कहा कि आप चाहें तो सोशल मीडिया या समाचार पत्र के माध्यम से सीधे सर्वे करा सकते हैं कि निलंबन या वेतन बहाली पर रिश्वत की दर क्या है ।शिक्षक बता देंगे कि भ्रष्टाचार का हाल क्या है।मुख्यमंत्री जी के आदेश पर प्रत्येक विभाग में बंपर प्रमोशन हुआ है लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग में गत 6 वर्षों से एक भी प्रमोशन नहीं हुआ क्योंकि ��ीएसए के काम भी लखनऊ से संचालित हैं।मगर महोदय हैं कि शिक्षक हित की एक भी बात नहीं सुनना चाहते ।
सरकार भी निर्णय ले कि 5 लाख बेसिक शिक्षक व 65 हज़ार माध्यमिक शिक्षक व उनके परिवारों को अपमानित करने की स्वतंत्रता इन महोदय को न दी जाये।
अपने हितों व सम्मान के रक्षार्थ प्रदेश भर के शिक्षक अपना अवकाश लेकर गये थे लेकिन इनके निर्देश पर कल निरीक्षण करने वाले अधिकारियों ने शिक्षकों से यह कहते हुए अभद्रता की है कि “बहुत धरने पर जाते हो ,तुमको निलंबित करके नेता बना देंगे ,धरने पर जाना भूल जाओगे”।यह निरीक्षण कर्ता भ्रष्ट अधिकारी शिक्षकों को डरा नहीं पायेंगे ,न ही लोकतंत्र में अपने आबाज उठाने से रोक पायेंगे ।यह शिक्षकों और सरकार को आपस में लड़ाने का षड्यंत्र रच रहे हैं जिससे शिक्षक सरकार से लड़ते र���ें और यह सुरक्षित रहें।लेकिन शिक्षक इनके षड्यन्त्र को जान चुका है और इनके भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आख़िरी सांस तक संघर्ष करेगा ।
आजादी के 75 वर्ष होने जा रहे पर देश के विकास की नींव तो चटाइयों पर बैठ कर पढ़ रही कही कही तो टूटे फूटे टपकते भवनों में जहां तक उखड़ी फिसलती सड़को से होकर पढ़ाने वाले शिक्षक पहुँच पाते हैं जिन्हें न समाज का सहयोग न पेरेंट्स का न आदेश देने वालों का।विकास सिर्फ तन्त्रियों का हुआ।
31 जुलाई 2022 से मंडलीय संवाद एवं समीक्षा बैठक शुरू हो रहा है कानपुर ���ंडल से, यह कार्यक्रम 18 मंडलों में होगा।#अटेवा की मजबूती से ही आंदोलन की मजबूती है और संगठन के हित में जो भी करना पड़ेगा वह किया जाएगा।इस कार्य हेतु संगठन के #पदाधिकारियों को #महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी फर्जी किसान संगठनों से बात करके कानून के पक्ष में रिपोर्ट दिया। करीब 450 किसान संगठन जो सड़क पर आंदोलन कर रहे थे उनसे कोई बात नही किया।
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