चुनाव समाप्त हो चुका है। परिणाम जो भी हो, लेकिन इस दौरान विधानसभा नंबर 01 वाल्मीकिनगर से लेकर विधानसभा नंबर 243 चकाई तक की चुनावी यात्रा के अनुभव के बाद मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा — संभवतः यह नीतीश कुमार का आखिरी चुनाव होगा।
2030 के अगले चुनाव में जब मैं फिर चुनावी यात्रा पर निकलूंगा, तब बिहार एक नए विकल्प और नए चेहरे की तलाश में होगा। शायद उस समय नीतीश कुमार सक्रिय राजनीति में न हों, न मुख्यमंत्री के रूप में, न ही जदयू के नेतृत्व में। उस समय बिहार की राजनीति का केंद्रबिंदु कोई और होगा।
लेकिन मैं आज यह विश्वास के साथ कहता हूं — बिहार में दूसरा नीतीश कुमार नहीं हो पाएगा।
नीतीश कुमार हमारे बीच हैं, इसलिए शायद हम अभी उनकी अहमियत को पूरी तरह महसूस नहीं कर पा रहे हैं। पर जिस दिन वे हमारे बीच नहीं रहेंगे, उस दिन पूरे बिहार की आंखों में आंसू होंगे, और हर किसी की जुबां पर एक ही बात होगी —
“आज बिहार का बेटा चला गया… आधुनिक बिहार का भाग्य-विधाता, उसका शिल्पकार चला गया।”
आज बिहार का कोई ऐसा कोना नहीं है, जहां नीतीश कुमार की छाप न हो। पश्चिमी चंपारण से लेकर किशनगंज तक, कैमूर-रोहतास से लेकर भागलपुर तक — चारों ओर विकास दिखाई देता है।
अब बिहार के किसी भी छोर से राजधानी पटना पहुंचने में तीन से चार घंटे से अधिक नहीं लगते। गांवों में बिजली की स्थिति शहर जैसी हो चुकी है, हर घर में नल का पानी उपलब्ध है।
हाईवे और पुलों के जाल ने राज्य को जोड़ा है, हर पंचायत में अब उच्च विद्यालय, अस्पताल और सुदृढ़ कानून व्यवस्था मौजूद है।
नीतीश कुमार का साइकिल वितरण मॉडल आज भी प्रेरणा देता है। कभी जो लड़कियां स्कूल नहीं जाती थीं, आज सड़कों पर साइकिल चलाकर पढ़ने जाती हैं। हर जगह पुलिस गश्त करती दिखती है, अपराध दर में भारी कमी आई है।
आज कोई व्यापारी, डॉक्टर या आम नागरिक यह डर लेकर नहीं जीता कि उससे रंगदारी मांगी जाएगी। हर व्यक्ति अब चैन की नींद सोता है, सुकून से दो रोटी खाता है, यह भरोसा लेकर कि उसका घर-संसार सुरक्षित है।
छात्रों को अब यह चिंता नहीं सताती कि अगर माता-पिता फीस न दे पाए तो वे पढ़ नहीं पाएंगे — नीतीश कुमार ने ऐसी कई योजनाएं दीं, जिन्होंने गरीबों के बच्चों को शिक्षा के अधिकार से जोड़ा।
मैंने इस यात्रा के दौरान देखा और महसूस किया — लोगों के मन में नीतीश कुमार के प्रति एक सच्चा सम्मान है, जो उनके काम और नीतियों से पैदा हुआ है।
आखिर में मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा —
नीतीश कुमार ने बिहार में विकास की जो लकीर खींची है, आने वाले किसी भी मुख्यमंत्री को बस उसी लकीर को ईमानदारी से आगे बढ़ाना है। अगर वे इसे समय-समय पर दुरुस्त करते रहें, तो उन्हें नया कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी — क्योंकि नीतीश कुमार ने पहले ही बिहार की बुनियाद को मजबूत बना दिया है।
बाकी गिनाने के लिए हजारों काम हैं जो उन्होंने किए हैं।
नमन है ऐसे विकास पुरुष को।
और उस मां को भी नमन है, जिसने बिहार की धरती पर नीतीश कुमार जैसे बेटे को जन्म दिया।
असल में नीतीश कुमार भारत रत्न के सच्चे हकदार हैं।
उन्हें यह सम्मान मिलना चाहिए — यह केवल उनका नहीं, बल्कि नए बिहार के हर विकासप्रिय बिहारी का सम्मान होगा।
नीतीश कुमार जी ने राज्य की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को आधार बनाकर बिहार को विकास के पथ पर आगे बढ़ाया।
यह रफ्तार आगे भी जारी रहेगी, 2025 में बिहार में फिर से एनडीए की मजबूत सरकार बनेगी।
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युवाओं के साथ खड़ी है नीतीश सरकार।
‘7 निश्चय-2’ योजना के तहत 20 लाख युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का संकल्प लिया गया था, लेकिन नीतीश सरकार ने लक्ष्य से कहीं अधिक 50 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया।
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हम NDA के साथियों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में सीटों का वितरण पूर्ण किया है।
JDU - 101
BJP - 101
LJP(R)- 29
RLM - 06
HAM - 06
एनडीए के सभी दलों के नेता और कार्यकर्ता साथी इसका हर्ष के साथ स्वागत करते हैं और मुख्यमंत्री @NitishKumar जी को प्रचंड बहुमत के साथ फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए संकल्पित एवं एकजुट हैं।
बिहार है तैयार,
फिर से एनडीए सरकार।
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बिहार आगे बढ़ रहा है, सड़कें बन रही हैं, महिलाएं सशक्त हो रही हैं, युवाओं के भविष्य के लिए योजनाएं चल रही हैं, शिक्षा में सुधार हो रहा है, हर क्षेत्र का समुचित विकास हो रहा है तो आप किसे चुनेंगे?
अब फैसला आपका है: विकसित बिहार चाहिए या 90 के दशक का जंगलराज।
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जी हां, यह नीतीश कुमार जी का बनाया हुआ नया बिहार है — रफ्तार भरती सड़कें, रोशनी की चकाचौंध और भय से मुक्त बिहार परिवार।
2005 तक यही बिहार निगेटिव ग्रोथ के साथ बैक गियर में चल रहा था — खराब सड़कें, अंधेरे में डूबे गांव-शहर, भय और भ्रष्टाचार से त्रस्त लोग।
बिहार की जागरूक जनता ने पिछले चार विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार जी को मुख्यमंत्री बना कर बिहार की रफ्तार को चौथे गियर में पहुंचा दिया है।
अब नया बिहार टेकऑफ स्टेज में है। वर्ष 2025 का चुनाव एक स्वर्णिम अवसर है। लोग लगातार पांचवीं बार @NitishKumar जी के पक्ष में जनादेश देकर बिहार के विकास की रफ्तार को पांचवें गियर में पहुंचाने के लिए संकल्पित और उत्साहित हैं।
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तेजस्वी यादव ने बड़बोला पन में ऐसा बादा कर दिया कि कभी पुरा नहीं कर सकते है। इनके बादा के अनुसार बिहार में 3 करोड़ परिवार हैं। अगर सभी परिवार को 1 नौकरी दे दिए तो एक सरकारी नौकरी का मिनिमम बेतन 40 हजार हैं तो एक महिना का खर्च 12000 करोड़ होगा। बिहार का कुल बजट 3 लाख 16 हज़ार करोड़ ही हैं।
कैसे करेगे अपना बादा पुरा ये तो बजट के बाहर हो जाता हैं, अपना घर से पैसा देंगे या सिर्फ काम करा लेंगे और बेतन नहीं भेजेंगे।
ये सब जुमलाबाज़ी में मत पड़े सीधे नीतीश जी को वोट दे।