टीकमगढ़ के स्वास्थ्य केंद्र में कलेक्टर के सामने CHO महिला मरीज का BP नहीं ले पाईं। कलेक्टर को खुद आकर मशीन पकड़कर सिखाना पड़ा। ना जाने यही हालत कितने स्वास्थ्य केन्द्रों की होगी
ये कोई छोटी बात नहीं है। जो बुनियादी जाँच नहीं कर सकता, वो गाँव के स्वास्थ्य केंद्र में कैसे बैठा है? ट्रेनिंग कहाँ हुई? भर्ती कैसे हुई?गाँव के मरीज की जान इन्हीं हाथों में है। स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत यही है और जितनी कमिया और लाचारी स्वास्थ्य विभाग में है उतनी सायद ही किसी में हो ।
मनु स्मृति को जलाकर धुंआ धुआं कर दिया 🔥🔥
मलिकार्जुन खड़गे के अपमान के विरोध में आज युवा कांग्रेस द्वारा RSS हैडक्वाटर पर मनुस्मृति को जलाया गया,
इस किताब की किस्मत में सिर्फ़ जलाना लिखा है, यह दलितों पिछड़ों और महिलाओं के लिए नासूर है,
बाबासाहेब अंबेडकर ने इसे जलाकर देश पर उपकार किया था, मनुवादी लोगों को आने वाले समय में इस देश में मुंह छुपाने की भी जगह नहीं मिलेगी, 🔥🔥
The basis for asking a separate electorate for Dalits was that Indian police, magistry, services were monopolised by castiest Hindus who will always be biased against Dalits. It's been 100 yrs since Dr Ambedkar made that prediction. Savarna will never allow India to be democracy.
दिक्कत ये नहीं कि रिजर्वेशन क्यों मिल रहा है, दिक्कत ये है कि जो इसके सामने खाट पर भी नहीं बैठ पाता था । आज सोफे पर पैर पे पैर चढ़ाके बैठा है । आंखों में आंखें डालकर बात कर रहा है।
हाँकी को भारत का राष्ट्रीय खेल के रूप में देखा जाने लगा क्योकि बहुजनो ने देश को एक नहीं मल्टीपल गोल्ड मेडल दिलाए थे ओलंपिक में।
मैं फिर से कहता हूँ बहुजनों के खून में है मेहनत लेकिन मोटी सैलरी उठाने के नाम पर रट्टू टोटो को हरेक पोस्ट पर ओवर रिप्रजेंटेशन होना ही भारत की बर्बादी का कारण है।
गोरखपुर के प्रतीक त्रिपाठी बेटी पढ़ाओ की नई स्कीम चला रहे हैं।
स्कूल की लड़कियों को पढ़ा रहे हैं खर्चा उठा रहे हैं शहर में कमरा दिलाने का वादा भी।
दसवीं की एक लड़की को इसी तरह ब्लैकमेल करके, 4 महीने यौन शोषण कर चुके हैं,मना कर रही है फिर भी धमका रहे हैं।
BJP-NDA में बगावत शुरू!🔥
इस समय BJP ने आरक्षण के खिलाफ जो जहर घोला है, दलित-पिछड़े नेताओं ने उसका विरोध शुरू कर दिया है।
चिराग पासवान के बाद उमा भारती ने भी ऐलान कर दिया है कि आरक्षण पर उन्हें कोई चर्चा स्वीकार्य नहीं है।
उधर केशव प्रसाद मौर्य भी CM की रेस में खड़े हो गए हैं।
No matter how sweetly those wolves talk, they can never be the well-wishers of the sheep. In the end it’s always the same old story, they just circle around, tear them apart, and gobble them up. 👇🙂
बदायूं की यह घटना बेहद गंभीर और चिंताजनक है। आरोप है कि राजेश को पुलिस रात में उसके घर से उठाकर ले गई और पुलिस हिरासत में उसके साथ कथित तौर पर इतनी बर्बरता की गई कि अस्पताल ले जाते समय उसकी मृत्यु हो गई।
सवाल यह है कि आखिर उत्तर प्रदेश में पुलिस का यह रवैया क्यों है..?
शासन और प्रशासन पर सरकार का नियंत्रण क्यों नहीं दिख रहा..?
बार-बार ऐसी घटनाओं के आरोप दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के साथ ही क्यों सामने आते हैं..!
कानून-व्यवस्था का मतलब जनता में भय पैदा करना नहीं, बल्कि जनता को सुरक्षा और न्याय देना है। किसी भी व्यक्ति को कानून के नाम पर प्रताड़ित करने का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता।
हमारी सरकार से स्पष्ट मांग है कि:
• पीड़ित परिवार को उचित एवं सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए।
• परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
• घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
• दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
यह सिर्फ राजेश के परिवार को न्याय दिलाने का सवाल नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश में कानून के राज और संविधान की रक्षा का सवाल है।
ऐसे नाराज नहीं होते छोटे।
आप हम झारखंडियों को वनवासी, जंगली कह कर उपहास उड़ाते हो - हमने कभी आपा खोया ? नहीं
अब हमने अपना हक़ माँगना शुरू किया तो - आप पुनः हमें अपशब्द कहने लगें।
हमने जो मुद्दे उठायें हैं - उनका वाजिब जवाब दें।
बातों को घुमाने, जुमला फेंकने में आपकी महारत है - पर हम झारखंडियों के हक़ों से समझौता नहीं होने देंगे।