Shocking ‼️
पंजाब में आज अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने गरीब सफ़ाईकर्मी महिलाओं पर बेरहमी से लाठीचार्ज करवा दिया है।
पुरुष पुलिसवालों द्वारा डंडे मारकर औरतों के सिर फोड़े गए हैं, इस वीडियो में महिलाओं की दर्दनाक चीखें सुनाई दे रही हैं।
ये है अरविंद केजरीवाल का असली चहरा। एक तरफ़ दिल्ली में आग लगाने की कोशिश करते हैं और दूसरी तरफ़ पंजाबियों के साथ रोज़ ऐसे ज़ुल्म कर रही है AAP सरकार…
राजस्थान में कांग्रेस सरकार के दौरान पेपर लीक रोकने में अपनी ही सरकार की विफलता को कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सार्वजनिक मंच से स्वीकार की थी।
तब युवाओं के भविष्य की चिंता नहीं दिखी। आज विपक्ष में आकर वही कांग्रेस नैतिकता और जवाबदेही का पाठ पढ़ा रही है। सत्ता में चुप्पी, विपक्ष में रहकर सत्ता प्राप्ति के लिए युवाओं को गुमराह करने का प्रयास देश सब देख रहा है।
वीर बाजी प्रभु देशपांडे जी के का बलिदान दिवस पर कोटि कोटि नमन ।
13 जुलाई 1660, पावन खिंड का वह ऐतिहासिक दिन जब बाजी प्रभु देशपांडे और उनके 300 मावलों ने 12,000 मुगलिया सैनिकों की विशाल सेना को रोककर स्वराज्य के इतिहास में अमर बलिदान और अद्भुत पराक्रम की गाथा लिख दी।
जब छत्रपति शिवाजी महाराज पन्हाला किले से निकलकर विशालगढ़ की ओर बढ़ रहे थे, तब बाजी प्रभु ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना दुश्मन को पावन खिंड में रोक लिया। घंटों तक चले इस भीषण युद्ध में उन्होंने वीरता, निष्ठा और बलिदान की ऐसी मिसाल पेश की जिसे इतिहास कभी नहीं भूल सकता।
अप्रतिम शौर्य की प्रतिमूर्ति, नारी शंक्ति, मातृभूमिं की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली एवं वीरता की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर शत शत नमन् 🙏🙏
भाजपा किसान मोर्चा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय कामेश्वर सिंह @ksinghgkp चाचा जी को जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं।
माता रानी का आशीर्वाद आप पर सदैव बना रहे 🙏
पूज्य महाराज योगी आदित्यनाथ नाथ जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...
उत्तरप्रदेश ही नहीं समस्त भारतवर्ष को आप पर गर्व है।
योगी है तो यकीन है।
#YogiAdityanath
मंदिर मुक्ति हेतु सर्वोच्च न्यायालय में पुनः शुरू होगी ऐतिहासिक सुनवाई
:आलोक कुमार (@AlokKumarLIVE), सीनियर एडवोकेट, (अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद् )
भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन काल में अंग्रेज अधिकारियों के द्वारा तमिलनाडु और बंगाल में हिन्दू मंदिरों का व्यापक सर्वेक्षण हुआ था। इस सर्वेक्षण से मालुम पड़ा कि लगभग सब हिन्दू मंदिरों में छोटा या बड़ा गुरुकुल और गौ-शाला थी। समाज अपने उत्सव जैसे नवरात्री और दीपावली इत्यादि मिलकर मंदिरों में मनाता था। परिवारों के शादी, मुंडन, शोकसभा जैसे सब कार्यक्रम भी मंदिरों में होते थे। समाज के झगड़े भी मंदिर में गर्भगृह की साक्षी में समाज के वरिष्ठ लोगों द्वारा निपटाएं जाते थे।
अंग्रेजों ने समझ लिया कि हिन्दू धर्म के प्राण मंदिरों में बसते हैं। अंग्रेज सरकारों ने मंदिरों का प्रबंधन सुशासन के नाम पर अपने हाथों में ले लिया। धीरे-धीरे अब मंदिर केवल व्यक्तिगत पूजा के स्थान बन रहे हैं। इससे हिन्दू धर्म कमजोर हो रहा है।
सरकार गुरुद्वारे, चर्च, मस्जिद, जैन-स्थानक और बौद्ध-विहार नहीं चलाती। भारत का शासन संविधान की मर्यादा में धर्मनिरपेक्ष है। फिर भी अनेक राज्यों में सरकारें हिन्दू मंदिरों को अपने मुट्ठी में क्यों दबाये हुए हैं। मंदिरों के चढ़ावे का एक बड़ा हिस्सा सरकारी खजाने में जाता है। मंदिरों में सरकार के ऑफिसर कार्यकारी अधिकारी के नाते लगा दिए जाते है और उनका वेतन और भत्ते मंदिर की आय में से लिए जाते है। मंदिरों और मठों का नियंत्रण मठाधिपति या धार्मिक संत इत्यादि के हाथों में न रहकर इन बाबुओं के हाथ में रहता है।
हिन्दू समाज ने निर्णय किया है कि वह अपने मंदिरों का नियंत्रण सरकार के हाथों से वापस लेगा। समाज ने यह भी निर्णय किया कि हिन्दू मंदिरों का पैसा हिन्दुओं के लिए ही खर्च होना चाहिए।
इस उद्देश्य से पूज्य स्वामी दयानन्द सरस्वती ने सन 2012 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिका डाल कर कहा कि सरकार हिन्दू मंदिरों का सञ्चालन वापिस हिन्दू समाज को सौंपें। यह याचिका मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र, तेलंगाना और पुडुचेरी के सन्दर्भ में लगायी गयी थी। इसमें सरकारों को नोटिस हुआ और उनका जवाब रिकॉर्ड पर आया। कई बार इस याचिका में बहस के लिए तारीख निश्चित हुई पर किसी न किसी कारण से टलती गयी।
अंततः अप्रैल 2025 को यह मामला न्यायालय के समक्ष रखा गया। प्रतिपक्षी वकीलों ने कहा कि इस याचिका में कई राज्यों के कानूनों को चुनौती दी गयी है। यह सब कानून एक जैसे नहीं हैं। मांग की गयी कि सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका को ख़ारिज करके याचिकाकर्ताओं को अपने-अपने राज्य में इन कानूनों को चुनौती देने की छूट दे दें। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करके 13 साल से लंबित यह याचिका ख़ारिज कर दी।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका को ख़ारिज करने के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका करने का आग्रह किया। इस प्रक्रिया में समय लगा। याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने सोमवार 18 मई 2026 के आदेश में यह स्वीकार किया कि इस याचिका को गुण-दोष के आधार पर सुना जाना आवश्यक है। कोर्ट ने अप्रैल 2025 के उस आदेश को वापस ले लिया जिसके द्वारा इस याचिका को ख़ारिज कर दिया गया था।
अब यह विषय जुलाई में सुनवाई के लिए नियत किया गया है। हिन्दू अपने मंदिरों का स्वयं सञ्चालन करें और मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो। हिन्दुओं का पैसा हिन्दुओं के काम में आये। हिन्दू मंदिर स्वाधीन होने पर हिन्दू का संगठन, उसकी तेजस्विता और संस्कार युक्त जीवन पुनः अपने समाज को प्राप्त हो। मुकदमे में तथ्य और तर्क हमारे साथ हैं। श्री भगवान के आशीर्वाद से हम न्यायालय में सफल होंगे।
जिन मोहि मारा, तिन मैं मारे...
सिंदूर सिर्फ एक ऑपरेशन का नाम नहीं था,
मां भारती के सिंदूर पर हमला करने वालों को एक ललकार थी!
'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर उन महान् वीरो को वंदन, जिन्होंने जिहादियों को सिर्फ जवाब नहीं, एक कठोर संदेश भी दिया जिसकी गूंज पूरी दुनिया ने सुनी.!!
#OperationSindoor