मर्जर नहीं, ये तो स्कूल का मर्डर है।
बच्चों को शिक्षा से दूर करना, सबसे बड़ी भूल है। 📚❌
हमारे गांव के बच्चों का हक़ मत छीनों।
#JusticeForSchoolsChildren
भारत के तेलंगाना में सिर्फ़ एक बच्ची के लिए चलता है ये स्कूल। इस एक स्कूल को चलाने में सरकार सालाना 12 लाख रुपए खर्च करती है। अर्थात एक बच्ची को पढ़ाने के लिए 12 लाख सालाना।
वीडियो साभार : बीबीसी न्यूज हिंदी
@DrDCSHARMAUPPSS@UPPSS1921#Justiceforschoolschildren
#Justiceforschoolschildren
सरकार 50 से कम छात्रों वाले स्कूलों को बंद करके ग्रामीण बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रही है ।साथ ही 149 तक की छात्र संख्या वाले प्राथमिक एवं 99 तक की संख्या वाले उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रधानाध्यापक के पद समाप्त कर रही है अर्थात् अब स्कूल बिना हेड मास्टर के चलाने की योजना है,जिससे शिक्षकों की पदोन्नति के अवसर ही समाप्त हो गए हैं ।स्कूल बंद होने से हजारों रसोइयों की सेवा समाप्त होगी साथ ही भविष्य में शिक्षक बनने की उम्मीद लगाये बैठे DelEd/बीटीसी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की भर्ती नहीं हो पायेगी ।
प्रत्येक तिमाही पर रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह पर गर्व करने वाली सरकार को इस प्रकार का निर्दयी /कठोर निर्णय वापिस लेना चाहिए ।
हमारी माँग है कि कोई भी विद्यालय बंद न किया जाये ।यदि सरकार वास्तव में शिक्षा का हित चाहती है तो प्रत्येक कक्षा पर एक सहायक अध्यापक एवं प्रत्येक विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक अनिवार्य रूप से नियुक्त किया जाये ।
सरकार के इस निर्णय से प्रभावित सभी साथियों से अनुरोध है कि 8 जुलाई को संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर प्रस्तावित धरने में उपस्थित होकर अपनी मांगों का समर्थन करें ।