#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
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बिना किसी परीक्षा के मा सुप्रीम कोर्ट में 5 नये जज नियुक्त कर दिए गए हैं ।
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
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"जिस राष्ट्र का शिक्षक सिर उठाकर चलेगा, वही राष्ट्र दुनिया के सामने सिर उठाकर चलेगा. "
शिक्षक राष्ट्र के नागरिकों का निर्माण करता है.प्रसिद्द मनोवैज्ञानिक अल्बर्ट बैन्डूरा ने अपने सामाजिक अधिगम सिद्धांत में कहा है कि बच्चा व्यवहारों, अभिवृत्तियों एवं संवेगिक प्रतिक्रियाओं का अधिगम प्रारंभिक रूप से निरीक्षण, अनुकरण एवं दूसरों को मॉडल बनाकर करता है.
किसी छात्र का आदर्श मॉडल उसके माता-पिता के बाद उसका शिक्षक होता है. बच्चा अपने शिक्षक के आचरणों का निरीक्षण करता है और उसका अनुकरण करता है. यदि किसी राष्ट्र का अध्यापक दीन-हीन, दबा-कुचला और निरीह भाव में रहेगा, तो उसके द्वारा शिक्षा ग्रहण करने वाला बच्चा भी उसी तरह का हो जायेगा. आज का बच्चा ही कल का नागरिक होगा. यदि किसी राष्ट्र का नागरिक दीन-हीन,दबा-कुचला और निरीह होगा तो फिर वह देश कैसा होगा, इसकी सहज ही कल्पना की जा सकती है. फिर ऐसा राष्ट्र क्या पूरी दुनिया के सामने सिर उठाकर गर्व से चल पायेगा, यह एक विचारणीय प्रश्न है.
आज के परिवेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद देश का वह शिक्षक, जिसने 25-30 वर्षों तक परिश्रम और प्रतिबद्धता से शिक्षण कार्य करके कितने योग्य नागरिकों को पैदा किया है और जो आज देश के बड़े और महत्वपूर्ण पदों पर बैठकर पूर्ण कौशल, प्रतिबद्धता एवं जिम्मेदारी से देश की व्यवस्था का संचालन कर रहे हैं,वह स्वयं को निरीह एवं दीन हीन स्थिति में पा रहा है.
भारत सरकार से देश के सभी शिक्षक अनुरोध करते हैं कि संविधान में आवश्यक संशोधन करके देश के शिक्षकों को इस विषम परिस्थिति से उबारने का कष्ट करें.
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#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
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#NoTetBeforeRteAct@DrDCSHARMAUPPSS@Aamitabh2@dpradhanbjp@PMOIndia यही लोग 30-35 वर्ष से बेसिक शिक्षा के शिक्षकों को टेट परीक्षा पास करने को बाध्य करेंगे अन्यथा नौकरी से निकालवा देंगे।लेकिन स्वयं कब क्लैट की परीक्षा पास करेंगे गुणवत्तापूर्णएवंसामयिक न्याय केलिए-पूछता है भारत🙏
@DrDCSHARMAUPPSS@grok श्रीमान दीपांकर दत्ता के गुरु जी टीईटी योग्यता धारक नहीं थे। तो क्या इनको शिक्षा गुणवत्ता पूर्ण मानी जाएगी।
ये आज तक कोई परीक्षा दिये है?? यदि दिए है तो 20 साल बाद पुनः परीक्षा दे तब पद धारण करे। यदि नहीं तो राष्ट्र हित में पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं
TFI ... ज़िंदाबाद
गत 10 वर्षों से कतिपय ऐसे लोग जो कोर्ट में टेट और नॉन टेट के मुक़दमे करके पदोन्नति फँसाये हुए हैं वे लोग 1 सितम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद से ही अपने मनसूबे पूरे होते देख रहे हैं ।रिव्यू स्वीकार होने पर यही लोग कह रहे थे कि सेवा में बने रहने के लिए टेट से छूट मिलेगी लेकिन पदोन्नति में नहीं मिलेगी,13 की सुनवाई के बाद इनके सुर बदल गए और अब व्याख्या कर रहे हैं कि सेवा में बने रहने के लिए टेट करना होगा ।
राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009 बनने के बाद से लेकर आज तक मूल अधिनियम हो या उसके बाद के संशोधन — कहीं भी “Teacher Eligibility Test (TET)” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। हर जगह केवल “Minimum Qualification / न्यूनतम अर्हता” शब्द का प्रयोग हुआ है।
RTE Act की धारा 23(1) के अंतर्गत केंद्र सरकार ने NCTE को Academic Authority बनाया। इसके बाद NCTE ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना द्वारा पहली बार TET को “Minimum Qualification” का हिस्सा बनाया।
NCTE ने अपने राजपत्र में स्पष्ट किया कि—
• 23 अगस्त 2010 के बाद होने वाली नियुक्तियों की न्यूनतम अर्हता “with TET” होगी।
• 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त/कार्यरत शिक्षकों की न्यूनतम अर्हता “without TET” मानी जाएगी।
बाद में 2017 के संशोधन में यह कहा गया कि 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को Section 23(1) के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम अर्हता प्राप्त करनी होगी। अब यदि कोई शिक्षक 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त है, तो उसकी निर्धारित न्यूनतम अर्हता वही होगी जो उस समय लागू थी, अर्थात without TET।
जिस एनसीटीई को TET लागू करने की शक्ति है तो क्या उसे परिस्थितियों के अनुसार relaxation देने की शक्ति नहीं है? यह विषय अभी भी न्यायिक व्याख्या के अधीन है और आवश्यकता पड़ने पर पुनः न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।
यदि आरटीई में कहीं टेट प्रयोग हुआ है तो उपलब्ध करायें ।चाहे सुप्रीम कोर्ट से हो या संसद से एनसीटीई के राजपत्र 23अगस्त 2010 से टेट आया है उसी के आधार पर mimimum qualification decide होगी ।
मा मुख्यमंत्री जी यूपी के सेवारत शिक्षकों के साथ तो तभी न्याय होगा। जब यूपी में RTE Act लागू होने 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टेट से मुक्त रखा जाये। चाहे वह मा सुप्रीम कोर्ट के आदेश द्वारा हो या भारत सरकार के द्वारा अध्यादेश लाकर। @UPGovt@myogiadityanath@ANI
टीएफआइ जिंदाबाद
डॉ दिनेशचंद्र शर्मा जिंदाबाद
राममूर्ति ठाकुर जिंदाबाद
संजय सिंह जिंदाबाद
टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ टीएफआइ
डॉ दिनेशचंद्र शर्मा जी के नेतृत्व में संघर्षरत है।
हम सब होंगे कामयाब एक दिन।
@DrDCSHARMAUPPSS@Priyanshu_UpPsS@RamMurtiThakur@TFI4India@UPPSS1921
मा सुप्रीम कोर्ट द्वारा टेट की अनिवार्यता के संबंध में दिनांक 1 सितम्बर 2025 को दिये गये निर्णय के बाद इस मुद्दे पर संघ द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में सबाल करने वाले साथियों को हमने सदैव कहा कि लोकतंत्र में संसद सर्वोपरि है ।हमारी समस्या का निराकरण संसद द्वारा ही होगा ।इसलिए टीएफआई द्वारा देश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंप कर अपनी बात संसद तक पहुँचायी गई ।संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकांश सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया और समस्या के निराकरण की मांग की ।टीएफआई द्वारा सभी जनपदों के मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करते हुए जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से मा प्रधान मंत्री जी को ज्ञापन प्रेषित किये गये ।
टीएफआई द्वारा 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली आयोजित करके भारत सरकार तक अपनी बात पहुँचाई गई ।रैली में भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी को आमंत्रित किया गया और श्री पाल साहब ने आपकी लाखों की उपस्थिति और आप के मुद्दे की जानकारी सरकार तक पहुँचाई ।
माननीय केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान जी , भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष
श्री पंकज चौधरी जी एवं केंद्रीय राज्यमंत्री श्री जितिन प्रसाद जी से मिलकर उच्च स्तरीय वार्ता एवं निराकरण की मांग की गई ।
चूँकि आदेश सुप्रीम कोर्ट से आया है इसलिए कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ना आवश्यक है ।रिव्यू स्वीकार होने पर ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए टीएफआई ने सीनियर एडवोकेट श्री पी एस पटवालिया एवं श्री वी गिरि जी को कोर्ट में उतारा ।श्री पटवालिया जी ने टीएफआई के महासचिव श्री राम मूर्ति ठाकुर के राज्य संगठन अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के रिव्यू में तथा श्री वी गिरी जी द्वारा उ प्र प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से श्री मेघराज सिंह एवं 232 अन्य के नाम से दाखिल रिव्यू में अपना पक्ष रखा ।जिसको आप वीडियो में देख सकते हैं ।
सुनवाई के दौरान सभी विद्वान अधिवक्ताओं ने भारत सरकार (श्री मनमोहन सिंह सरकार)के दौरान संसद द्वारा आरटीई एक्ट के लागू होने पर दिनांक 23 अगस्त 2010 के द्वारा इससे पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को टेट से छूट देने का तर्क दिया गया ।लेकिन जज साहब भारत सरकार (श्री मोदी सरकार) के दौरान संसद द्वारा पारित किए गए संशोधन के क्रम में निर्गत राजपत्र दिनांक 10 अगस्त 2017 के द्वारा 31 मार्च 2015 को नियुक्त एवं कार्यरत सभी शिक्षकों पर टेट परीक्षा पास करने की अनिवार्यता लागू करने पर ही अडिग दिखे ।
सुनवाई के दौरान 10 राज्य सरकारों के अधिवक्ता मौजूद थे लेकिन किसी ने भी यह स्वीकार नहीं किया कि गत 8 वर्षों में किसी भी राज्य सरकार द्वारा सभी शिक्षकों पर टेट लागू करने हेतु कोई भी नोटिस या आदेश जारी नहीं किया है ।
कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है जिसके शीघ्र ही आने की उम्मीद है ।वकीलों का अपना मत है लेकिन हम कामना करते हैं कि निर्णय आपके पक्ष में हो ।
निर्णय अनुकूल होने पर सभी को बधाई और यदि प्रतिकूल हो तो हतोत्साहित न हो ।हम अपना आंदोलन आगे बढ़ाते हुए आगे बढ़ेंगे और श्री मोदी सरकार से कहेंगे कि जो पाप/अन्याय /संशोधन आपकी सरकार के दौरान हुआ है ।ऐसे संशोधन को वापस लेकर देश के 25 लाख शिक्षकों के करोड़ों परिजनों के साथ न्याय करें ।🙏🙏
अण्डमान निकोबार से दिल्ली चलकर पहुँचे अण्डमान निकोबार शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री प्रेम कुमार साधु एवं महासचिव श्री विकास मंडल से मिलने पर सुप्रीम कोर्ट के टेट के संबंध में आये आदेश के बाद अंडमान निकोबार के शिक्षक साथियों की दुख भरी व्यथा को सुनकर मन बहुत व्यथित हुआ और सोचने पर मजबूर हूँ कि इस प्रकार के आदेश आने के बाद सरकार किस अनहोनी का इंतज़ार कर रही है ।
दोनों शिक्षक नेताओं ने बताया कि 25 मार्च को अण्डमान निकोबार में टेट पास करने की अनिवार्यता के सम्बन्ध में पत्र निर्गत होने के बाद शिक्षक अवसाद से जूझ रहे हैं किसी भी शिक्षक को विश्वास नहीं हो रहा है कि आरटीई से पूर्व में नियुक्त एवं २०-२५ वर्षों से शिक्षण कर रहे शिक्षकों पर इस आदेश को कैसे थोपा जा सकता है ।
संघ के महासचिव श्री विकास मंडल जोकि आरएसएस के विभाग बौद्धिक प्रमुख भी हैं उनका कहना कि पोर्ट ब्लेयर में इस आदेश के बाद शिक्षकों में भारी तनाव व्याप्त है उन्होंने बताया कि बहाँ पर एक मात्र सांसद को छोड़कर कोई भी अन्य जनप्रतिनिधि नहीं है ।बहाँ का शासन पूर्णतया नौकरशाह चला रहे है ऐसे बिना किसी जनप्रतिनिधि के अपनी बात नौकर शाह को समझाना मुश्किल है
दूसरी ओर उन्होंने बताया कि दिल्ली आकर न्याय की गुहार लगाना भी बहुत मंहगा है
पोर्ट ब्लेयर से दिल्ली हवाई जहाज से आने पर एक तरफ़ से दोनों साथियों का टिकट 61000 रुपये का मिला है और यदि हवाई जहाज़ से न आकर दूसरा रास्ता अपनाये ,तो पानी के जहाज़ से कलकत्ता या चेन्नई तक पहुँचने में 3-4 दिन लगते हैं तथा किराया 18 हज़ार उसके बाद ट्रेन से दिल्ली तक का किराया एवं दो दिन का सफ़र ।इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट में बहुत महंगी पैरवी एवं राज्य में चुने हुए विधायक या एमएलसी न होने पर जब इस प्रकार का पत्र आया तो शिक्षक अवसाद में आ गये ।
उन्होंने बताया कि बहुत कठिन परिस्थिति में अंडमान निकोबार द्वीप समूह में शिक्षा का अलख जगा रहे हैं उन्होंने बताया कि पोर्ट ब्लेयर के पास अन्य द्वीप पर विद्यालय संचालित है बहाँ आने जाने का एक मात्र साधन छोटी नाव है कई बार ऐसा होता है विद्यालय पहुँचने के बाद मौसम ख़राब होता है तो लौटने हेतु नाव नहीं मिल पाती है और दो तीन दिन विद्यालय वाले द्वीप पर ही रहना पड़ता है ।
उनका कहना है कि नौकरी जाने पर बहाँ कोई फैक्टरी या उद्योग भी नहीं है जहाँ प्राइवेट नौकरी की जा सके ।
अंडमान निकोबार में शिक्षक साथियों ने 4 अप्रैल को रामलीला मैदान की रैली के फोटो और वीडियो देखे तो उन्हें आशा की किरण दिखाई दी और उन्होंने टीएफआई से संपर्क का मन बनाया ।
17 अप्रैल को दोनों शिक्षक नेता अपने क्षेत्र के भाजपा सांसद श्री विष्णु पद रे के दिल्ली आवास पर पहुँचें और उनके साथ मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी से मुलाक़ात की ।मा पाल साहब ने हमें इन साथियों से मुलाकात करवाई ।
दोनों साथी पूरे दिन हमारे एवं श्री राधे रमण त्रिपाठी जी के साथ रहे और हमने आश्वस्त किया कि आप अकेले नहीं हैं टीएफआई आपके साथ है
अब टीएफआई का नारा “कश्मीर से कन्याकुमारी तक “न होकर
“कश्मीर से अंडमान निकोबार द्वीप समूह तक “होगा ।
दोनों साथियों को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही अगली बैठक पोर्ट ब्लेयर में होगी ।
विद्यालय की साफ़ सफ़ाई के सम्बन्ध में @DmSambhal के स्पष्ट एवं सराहनीय निर्देश ।शिक्षकों के साथ यह कार्य हम सबने विद्यार्थी जीवन में किया है जोकि शिक्षा का ही एक हिस्सा है परंतु वर्तमान में छात्रों द्वारा अपने स्वयं के भोजन किए वर्तन धोने या अपने कक्षा कक्ष में कोई सफाई करने जैसी खबरों पर अनेक शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है ।अब इससे राहत मिलेगी ।जिलाधिकारी महोदय को धन्यवाद 🙏
उत्तर प्रदेश के 1.86 लाख सहित देश में लगभग 20 लाख ऐसे शिक्षक जो आरटीई लागू होने से पूर्व में नियुक्त हुए हैं उन पर टेट उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त करने हेतु 4 अप्रैल को रामलीला मैदान दिल्ली में हुई रैली के बाद आज टीएफआई के प्राधिनिधि मण्डल की पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी के साथ श्री पंकज चौधरी जी प्रदेश अध्यक्ष भाजपा उ प्र एवं मा वित्त राज्यमंत्री भारत सरकार से विस्तृत वार्ता हुई ।सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देश के लाखों शिक्षकों पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचाने हेतु कानून बनाने की पूरी पैरवी की गई ।मा प्रदेश अध्यक्ष जी ने शीघ्र ही शीर्ष नेतृत्व से वार्ता एवं समाधान हेतु आश्वस्त किया ।प्रतिनिधि में टीएफआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री संजय सिंह एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री राधेरमण त्रिपाठी जी उपस्थित रहे ।
@jagdambikapalmp@mppchaudhary@narendramodi@AmitShah@TFI4India@UPPSS1921
#NoTetBeforRteAct
महाराष्ट्र के दो दो शिक्षक संघ भी आये @TFI4India के साथ
श्री श्रीकांत देशपांडे जी पूर्व एमएलसी एवं संस्थापक अध्यक्ष शिक्षक अघाड़ी विदर्भ प्रदेश
तथा
श्री दत्तात्रेय सावंत पूर्व एमएलसी एवं महासचिव महाराष्ट्र शाला क्रुती समिति महाराष्ट्र से कल दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में टेट की अनिवार्यता को समाप्त करने के आंदोलन पर विस्तार से चर्चा हुई,दोनों ही नेताओं ने टीएफआई के प्रयास की सराहना की एवं टीएफआई से संबद्ध होने की इच्छा व्यक्त की ।महाराष्ट्र के दोनों संगठन शीघ्र ही टीएफआई के सदस्य होंगे ।
आज पूरे देश का शिक्षक जान चुका है कि शिक्षकों की सेवा शर्तों और सम्मान की लड़ाई पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अगर कोई लड़ रहा है तो सिर्फ आप ही लड़ रहे हैं । आपके नेतृत्व में शिक्षकों ने स्वयं को सुरक्षित महसूस किया इसीलिए विपरीत परिस्थितियों में भी इस ऐतिहासिक आंदोलन का हिस्सा बने ।
📍 रामलीला मैदान में शिक्षकों की ऐतिहासिक हुंकार
नई दिल्ली का रामलीला मैदान आज शिक्षकों की एकजुटता का गवाह बना। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर तले देशभर से आए शिक्षकों ने अपनी ताकत और एकता का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया।
🔴 रैली का मुख्य मुद्दा रहा सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का विरोध, जिसमें शिक्षा का अधिकार लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी TET अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षकों ने इसे अपने भविष्य और आजीविका पर सीधा प्रहार बताया।
🗣️ टी.एफ.आई. के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चन्द्र शर्मा ने स्पष्ट कहा—
"शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों के लिए यह लड़ाई सड़क से संसद तक जारी रहेगी।"
🤝 मुख्य अतिथि जगदम्बिका पाल ने भी शिक्षकों को पूरा समर्थन देते हुए उनकी आवाज़ को प्रधानमंत्री तक पहुँचाने का भरोसा दिलाया।
देश के कोने-कोने से उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि शिक्षक अब चुप नहीं बैठेंगे — यह सिर्फ रैली नहीं, बल्कि अधिकारों की निर्णायक लड़ाई का आगाज़ है।
✊ एकता ही ताकत है, और आज शिक्षक शक्ति ने देश को यह दिखा दिया।
#TeachersUnity #TFI #EducationRights #RamlilaMaidan #TeacherProtest #NewDelhi #शिक्षक_एकता @basicshiksha_up@DrDCSHARMAUPPSS@UPPSS1921@bstvlive@DainikBhaskar@aajtak@AmarUjalaNews@JagranNews@INCIndia@RahulGandhi
#04AprilMarchToDelhi#NoTetBeforeRteAct@DrDCSHARMAUPPSS
Teachers Federation of India के बैनर तले राष्ट्रीय अध्यक्ष @DrDCSHARMAUPPSS के एक आव्हान पर दिल्ली की 4 अप्रैल की सुबह आज साधारण नहीं थी —
राजधानी की हवा में एक बेचैनी आज भी है, एक पुकार है, एक प्रतीक्षा है।
देश के अलग-अलग हिस्सों से आए शिक्षक केवल इकट्ठा नहीं हुए,
वे अपने भीतर वर्षों से दबे प्रश्न, उपेक्षाएँ और उम्मीदें साथ लेकर पहुँचे।
सड़कों पर उमड़ी यह संख्या महज़ जनसमूह नहीं,
यह उन आवाज़ों का संगम है जिन्हें लंबे समय से सुना जाना बाकी था।
जो हाथ अब तक बच्चों के भविष्य को आकार देते रहे,
वही हाथ अपने वर्तमान के सम्मान के लिए उठे।
जो स्वर कक्षाओं में ज्ञान बाँटते थे,
वही स्वर व्यवस्था से उत्तर माँग रहे।
“No TET before RTE” अब केवल एक पंक्ति नहीं रही,
यह उन शिक्षकों की सामूहिक पीड़ा और अधिकार का उद्घोष बन चुकी है।
दिल्ली उस धैर्य की साक्षी बनी
जो वर्षों तक संयम में रहा,
और अब न्याय की प्रतीक्षा में सड़क पर उतर आया।
यह संघर्ष किसी टकराव की इच्छा नहीं,
बल्कि उस सम्मान की माँग है
जो शिक्षा देने वालों को सहज मिलना चाहिए था।
अब समय की ओर सबकी निगाह है—
क्या संवेदनाएँ निर्णय बनेंगी,
या फिर यह आंदोलन अपनी अगली, और अधिक तीव्र धड़कन लिखेगा।
धन्य हैं अनुशासित शिक्षक वर्ग 🙏