UP मे RTE Act 27 जुलाई 2011 को लागू हुआ।उससे पूर्व नियुक्त सभी शिक्षक विज्ञापन की सभी शर्तों को पूर्ण करने के बाद नियुक्त हुए है। इसलिए इससे पूर्व नियुक्त यूपी के सभी शिक्षक टेट की अनिवार्यता से मुक्त होने चाहिए। @SocialistLeadr@RahulGandhi@SanjayAzadSln@myogiadityanath@ANI
#NoTETbeforeRTEact
कुछ लोग टीईटी प्रकरण के जजमेंट को शिक्षामित्रों के जजमेंट से तुलना करते हैं तो उनको समझना चाहिए कि
"शिक्षामित्र साथियों का मामला और सेवारत शिक्षकों का मामला समान नहीं है। वहाँ प्रश्न तत्कालीन सरकार द्वारा दी गई स्पेशल नियुक्ति/भर्ती की वैधानिकता का था, यहाँ प्रश्न वर्षों से तत्कालीन नियुक्ति प्रक्रिया सेवा शर्तों को पूरा करते हुए वैध रूप से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें थोपने का है।
मानता हूँ अनुभव पात्रता का विकल्प नहीं हो सकता, लेकिन वैध नियुक्ति के बाद किसी नए नियम को ले आना, प्राकृतिक न्याय के ख़िलाफ़ है।"
- विपिन उपाध्याय
@DrDCSHARMAUPPSS@TFI4India@UPPSS1921@rajendradev6
IAS(J) परीक्षा होनी ही चाहिए क्योंकि माननीय समय समय पर जो फ़ैसलें देते हैं उनसे भी पलट जाते हैं कभी कुछ करते हैं कभी कुछ करते हैं उदाहरण स्वरूप live in जायज़ ठहराते हैं फिर ग़लत बता देते हैं,कुछविषयों पर स्वतः संज्ञान में लेते हैं और जो पीछे पीछे घूम रहे हैं उनकी महीनों तारीख़..
#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@dpradhanbjp@myogiadityanath@RahulGandhi@yadavakhilesh@priyankagandhi@Aamitabh2@bstvlive
UP मे RTE Act 27 जुलाई 2011 को लागू हुआ।उससे पूर्व नियुक्त सभी शिक्षक विज्ञापन की सभी शर्तों को पूर्ण करने के बाद नियुक्त हुए है।इसलिए इससे पूर्व नियुक्त यूपी के सभी शिक्षक टेट की अनिवार्यता से मुक्त होने चाहिए। @SocialistLeadr@RahulGandhi@SanjayAzadSln@myogiadityanath@ANI
उत्तर प्रदेश में आरटीई एक्ट 27 जुलाई 2011 को लागू हुआ। उससे पूर्व नियुक्त सभी शिक्षक विधि एवं विधान के अनुसार जारी विज्ञापन/विज्ञप्ति की सभी शर्तों को पूर्ण करने के बाद नियुक्त हुए हैं। इसलिए इससे पूर्व नियुक्त यूपी के सभी शिक्षक टेट की अनिवार्यता से मुक्त होने चाहिए।
@yadavakhilesh विभागीय नियमों के अनुकूल 25-30 वर्ष पूर्व में नियुक्त शिक्षकों से वर्तमान में एक और परीक्षा उत्तीर्ण कराने की अनिवार्यता शिक्षकों के साथ अन्याय है ।
CJI Dipankar Dutta Direct Bar Quota से यहाँ तक पहुँचे हैं l
क्या किसी और सरकारी पद के लिए आप ऐसे इतने Most Favourable & Dignify Post पर पहुँच सकते हैं?
जब ये 10 साल के एक्सपेयरिंस से यहाँ पहुँच सकते हैं तो क्या 25 साल से अधिक का एक्सपेरिएंस रखते हुए और सभी परीक्षा पास करके शिक्षक बने शिक्षक
शिक्षक क्यों बने नहीं रह सकते?
ये Judgement मानव हित में नहीं है
ये शिक्षक के प्रति कुंठा दर्शाता है l
@timesofindia@IndianExpress
दोहरा मापदंड अपनाने पर क्या लोकतंत्र की मूल भावना का मजाक नहीं हो रहा ?
आदरणीय प्रधानमंत्री जी देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ न्याय करिए।
Narendra Modi Dr Dinesh Chandra Sharma Uttarpradeshiya Prathmik Shikshak Sangh-Jhansi Jhansi Teachers DrDinesh Chandra Sharma Dharmendra Prad
#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@RahulGandhi@dpradhanbjp@myogiadityanath
#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@RahulGandhi@dpradhanbjp@myogiadityanath
ये कैसा कानून है...
बिना परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस की नियुक्ति
लेकिन जो 25 लाख शिक्षक के पद पर पहले से ही नियुक्त हैं उन्हें नई परीक्षा पास न करने पर नौकरी से निकाल दिया जाएगा..
माननीय प्रधानमंत्री जी/मुख्यमंत्री जी 25 लाख शिक्षकों के आश्रित सदस्यों पर भी विचार करें....
#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@RahulGandhi@dpradhanbjp@myogiadityanath
माननीय उच्च न्यायालय एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के जजों पर भी गुणवत्तापूर्ण न्याय करने की जिम्मेदारी है। इसलिए अनुभव के आधार पर नियुक्त होने वाले पूर्व से नियुक्त सभी जजों की भी जेट (ज्यूडिशयरी पात्रता परीक्षा) आयोजित होनी चाहिए एवं उन्हें भी जेट 2 वर्ष के भीतर पास करनी चाहिए।
माननीय उच्च न्यायालय एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के जजों पर भी गुणवत्तापूर्ण न्याय करने की जिम्मेदारी है। इसलिए अनुभव के आधार पर नियुक्त होने वाले पूर्व से नियुक्त सभी जजों की भी जेट (ज्यूडिशयरी पात्रता परीक्षा) आयोजित होनी चाहिए एवं उन्हें भी जेट 2 वर्ष के भीतर पास करनी चाहिए।
बिना किसी परीक्षा के मा सुप्रीम कोर्ट में 5 नये जज नियुक्त कर दिए गए हैं ।
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@RahulGandhi@dpradhanbjp@myogiadityanath