नीतीश-भाजपा सरकार ने 8000 विशेष सर्वेक्षण अधिकारियों की नौकरी छीन ली। जिन हाथों से बिहार की जनता के लिए काम कराया गया, उन्हीं हाथों को आज बेरोजगारी थमा दी गई। मजबूर होकर ये सभी कर्मचारी बुद्धा पार्क, पटना में धरना देने पर उतर आए हैं।
सवाल सीधा है—युवाओं और कामगारों का हक छीनकर सरकार किसका भला कर रही है?
खाने और दिखाने के अलग दांत! एनडीए की डबल इंजन सरकार ने एक करोड़ नौकरी देने की जगह हज़ारों युवाओं को पहले ही अलग-अलग नौकरियों से निकाल दिया है। आज उनके बीच गर्दनीबाग धरना स्थल पहुँची हूँ। आप दोनों को मैं बिहार में चल रहा सरकारी तमाशा एक-एक कर दिखाती हूँ। @narendramodi@NitishKumar
आज गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पर विशेष सर्वेक्षण संविदा कर्मियों से मिली और उनके साथ हुए अन्याय के विरोध में उनका साथ देने का वचन दिया। बर्खास्त कर दिए गए कर्मियों को सरकार तुरंत बहाल करे और इन कर्मियों की सेवा नियमित हो, इसके लिये मैं प्रतिबद्ध हूँ। @narendramodi@NitishKumar
पटना की सड़कों पर युवा सर्वेक्षणकर्मी अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं। महागठबंधन उनके साथ है।
भाजपा-जदयू सरकार ने जायज़ माँगों को लेकर आंदोलन कर रहे इन कर्मियों को बर्ख़ास्त कर दिया है। यह सिर्फ़ नाइंसाफी नहीं, बल्कि नौजवानों के भविष्य पर बेरहमी से किया गया हमला है।
मोदी-नीतीश की डबल बुलडोज़र की सरकार बेरोज़गार नौजवानों से रोज़गार छीनने और आंदोलनकारियों को लाठियों से पीटने और युवाओं की आवाज़ दबाने पर तुली हुई है। लेकिन नौजवान चुप नहीं बैठेंगे।
उनकी आवाज़ सड़क से सदन तक गूंजेगी। इनकी नौकरी लौटानी होगी। इनकी माँगे माननी होंगी।
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