माननीय प्रधानमंत्री जी, @PMOIndia
ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में म.प्र. भवन विकास निगम में सहायक महाप्रबंधक (Scheduled Caste officer) के पद पर कार्यरत रहते हुए, मुझे लगभग डेढ़ साल तक ऑफिस में बैठने के लिए कुर्सी-टेबल तक नहीं दी गई और सुनियोजित तरीके से HO भोपाल के अधिकारियों द्वारा मुझे जमीन पर बिठलवाकर कार्यालय का काम करने के लिए मजबूर किया गया। एक Scheduled Caste officer के साथ यह भेदभाव और बुनियादी अधिकारों से वंचित रखना मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय पर सीधा प्रहार है। दुखद यह है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) द्वारा बार-बार नोटिस और रिमाइंडर भेजने के बावजूद, Addl. DGP (Anusuchit Janjati Kalyan, Bhopal, MP) द्वारा इस मामले में बिल्कुल भी संतोषजनक काम नहीं किया जा रहा है और कोई रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। आयोग द्वारा अब तक निम्नलिखित तिथियों पर पत्र/रिमाइंडर जारी किए जा चुके हैं:
• 31 अगस्त 2025 (प्रथम नोटिस)
• 29 सितंबर 2025 (प्रथम रिमाइंडर)
• 04 नवंबर 2025 (द्वितीय रिमाइंडर)
• 24 दिसंबर 2025 (तृतीय रिमाइंडर)
• 28 जुलाई 2026 (कस्टम लेटर - रिपोर्ट न मिलने पर सख्त चेतावनी)
लंबे समय से कोई भी ठोस कार्रवाई या जवाब न देना यह साबित करता है कि संबंधित पुलिस अधिकारी अपने दायित्वों का सही से पालन नहीं कर रहे हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने और कड़ा रुख अपनाने के लिए आभार।
कार्यस्थल पर समानता और गरिमा हमारा संवैधानिक अधिकार है। इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के साथ-साथ गैर-जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता हूँ!
माननीय प्रधानमंत्री जी, @PMOIndia
ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में म.प्र. भवन विकास निगम में सहायक महाप्रबंधक (Scheduled Caste officer) के पद पर कार्यरत रहते हुए, मुझे लगभग डेढ़ साल तक ऑफिस में बैठने के लिए कुर्सी-टेबल तक नहीं दी गई और सुनियोजित तरीके से HO भोपाल के अधिकारियों द्वारा मुझे जमीन पर बिठलवाकर कार्यालय का काम करने के लिए मजबूर किया गया। एक Scheduled Caste officer के साथ यह भेदभाव और बुनियादी अधिकारों से वंचित रखना मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय पर सीधा प्रहार है। दुखद यह है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) द्वारा बार-बार नोटिस और रिमाइंडर भेजने के बावजूद, Addl. DGP (Anusuchit Janjati Kalyan, Bhopal, MP) द्वारा इस मामले में बिल्कुल भी संतोषजनक काम नहीं किया जा रहा है और कोई रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। आयोग द्वारा अब तक निम्नलिखित तिथियों पर पत्र/रिमाइंडर जारी किए जा चुके हैं:
• 31 अगस्त 2025 (प्रथम नोटिस)
• 29 सितंबर 2025 (प्रथम रिमाइंडर)
• 04 नवंबर 2025 (द्वितीय रिमाइंडर)
• 24 दिसंबर 2025 (तृतीय रिमाइंडर)
• 28 जुलाई 2026 (कस्टम लेटर - रिपोर्ट न मिलने पर सख्त चेतावनी)
लंबे समय से कोई भी ठोस कार्रवाई या जवाब न देना यह साबित करता है कि संबंधित पुलिस अधिकारी अपने दायित्वों का सही से पालन नहीं कर रहे हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने और कड़ा रुख अपनाने के लिए आभार।
कार्यस्थल पर समानता और गरिमा हमारा संवैधानिक अधिकार है। इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के साथ-साथ गैर-जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता हूँ!
माननीय प्रधानमंत्री जी, @PMOIndia
ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में म.प्र. भवन विकास निगम में सहायक महाप्रबंधक (Scheduled Caste officer) के पद पर कार्यरत रहते हुए, मुझे लगभग डेढ़ साल तक ऑफिस में बैठने के लिए कुर्सी-टेबल तक नहीं दी गई और सुनियोजित तरीके से HO भोपाल के अधिकारियों द्वारा मुझे जमीन पर बिठलवाकर कार्यालय का काम करने के लिए मजबूर किया गया। एक Scheduled Caste officer के साथ यह भेदभाव और बुनियादी अधिकारों से वंचित रखना मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय पर सीधा प्रहार है। दुखद यह है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) द्वारा बार-बार नोटिस और रिमाइंडर भेजने के बावजूद, Addl. DGP (Anusuchit Janjati Kalyan, Bhopal, MP) द्वारा इस मामले में बिल्कुल भी संतोषजनक काम नहीं किया जा रहा है और कोई रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। आयोग द्वारा अब तक निम्नलिखित तिथियों पर पत्र/रिमाइंडर जारी किए जा चुके हैं:
• 31 अगस्त 2025 (प्रथम नोटिस)
• 29 सितंबर 2025 (प्रथम रिमाइंडर)
• 04 नवंबर 2025 (द्वितीय रिमाइंडर)
• 24 दिसंबर 2025 (तृतीय रिमाइंडर)
• 28 जुलाई 2026 (कस्टम लेटर - रिपोर्ट न मिलने पर सख्त चेतावनी)
लंबे समय से कोई भी ठोस कार्रवाई या जवाब न देना यह साबित करता है कि संबंधित पुलिस अधिकारी अपने दायित्वों का सही से पालन नहीं कर रहे हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने और कड़ा रुख अपनाने के लिए आभार।
कार्यस्थल पर समानता और गरिमा हमारा संवैधानिक अधिकार है। इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के साथ-साथ गैर-जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता हूँ!
माननीय प्रधानमंत्री जी, @PMOIndia
ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में म.प्र. भवन विकास निगम में सहायक महाप्रबंधक (Scheduled Caste officer) के पद पर कार्यरत रहते हुए, मुझे लगभग डेढ़ साल तक ऑफिस में बैठने के लिए कुर्सी-टेबल तक नहीं दी गई और सुनियोजित तरीके से HO भोपाल के अधिकारियों द्वारा मुझे जमीन पर बिठलवाकर कार्यालय का काम करने के लिए मजबूर किया गया। एक Scheduled Caste officer के साथ यह भेदभाव और बुनियादी अधिकारों से वंचित रखना मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय पर सीधा प्रहार है। दुखद यह है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) द्वारा बार-बार नोटिस और रिमाइंडर भेजने के बावजूद, Addl. DGP (Anusuchit Janjati Kalyan, Bhopal, MP) द्वारा इस मामले में बिल्कुल भी संतोषजनक काम नहीं किया जा रहा है और कोई रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। आयोग द्वारा अब तक निम्नलिखित तिथियों पर पत्र/रिमाइंडर जारी किए जा चुके हैं:
• 31 अगस्त 2025 (प्रथम नोटिस)
• 29 सितंबर 2025 (प्रथम रिमाइंडर)
• 04 नवंबर 2025 (द्वितीय रिमाइंडर)
• 24 दिसंबर 2025 (तृतीय रिमाइंडर)
• 28 जुलाई 2026 (कस्टम लेटर - रिपोर्ट न मिलने पर सख्त चेतावनी)
लंबे समय से कोई भी ठोस कार्रवाई या जवाब न देना यह साबित करता है कि संबंधित पुलिस अधिकारी अपने दायित्वों का सही से पालन नहीं कर रहे हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने और कड़ा रुख अपनाने के लिए आभार।
कार्यस्थल पर समानता और गरिमा हमारा संवैधानिक अधिकार है। इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के साथ-साथ गैर-जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता हूँ!
माननीय प्रधानमंत्री जी, @PMOIndia
ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में म.प्र. भवन विकास निगम में सहायक महाप्रबंधक (Scheduled Caste officer) के पद पर कार्यरत रहते हुए, मुझे लगभग डेढ़ साल तक ऑफिस में बैठने के लिए कुर्सी-टेबल तक नहीं दी गई और सुनियोजित तरीके से HO भोपाल के अधिकारियों द्वारा मुझे जमीन पर बिठलवाकर कार्यालय का काम करने के लिए मजबूर किया गया। एक Scheduled Caste officer के साथ यह भेदभाव और बुनियादी अधिकारों से वंचित रखना मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय पर सीधा प्रहार है। दुखद यह है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) द्वारा बार-बार नोटिस और रिमाइंडर भेजने के बावजूद, Addl. DGP (Anusuchit Janjati Kalyan, Bhopal, MP) द्वारा इस मामले में बिल्कुल भी संतोषजनक काम नहीं किया जा रहा है और कोई रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। आयोग द्वारा अब तक निम्नलिखित तिथियों पर पत्र/रिमाइंडर जारी किए जा चुके हैं:
• 31 अगस्त 2025 (प्रथम नोटिस)
• 29 सितंबर 2025 (प्रथम रिमाइंडर)
• 04 नवंबर 2025 (द्वितीय रिमाइंडर)
• 24 दिसंबर 2025 (तृतीय रिमाइंडर)
• 28 जुलाई 2026 (कस्टम लेटर - रिपोर्ट न मिलने पर सख्त चेतावनी)
लंबे समय से कोई भी ठोस कार्रवाई या जवाब न देना यह साबित करता है कि संबंधित पुलिस अधिकारी अपने दायित्वों का सही से पालन नहीं कर रहे हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने और कड़ा रुख अपनाने के लिए आभार।
कार्यस्थल पर समानता और गरिमा हमारा संवैधानिक अधिकार है। इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के साथ-साथ गैर-जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता हूँ!
माननीय मंत्री महोदय जी, आपके द्वारा विधान प्रश्न क्रमांक 70 के उत्तर में कहा गया है कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम में प्रतिनुक्ति से सहकारी शक्कर कारखाना से कोई भी व्यक्ति प्रतिनुक्ति में एमपीआरडीसी में नही आ सकता हैं लेकिन एक कंप्यूटर टेक्नीशियन आया है जो डीजीएम एचआर बना है।
शाहपुरा से मानिकपुर रोड पर किए गए गुणवत्ता-विहीन कार्य का त्वरित संज्ञान लेते हुए उपयंत्री श्री गिरधारीलाल चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के साथ ही निर्माण कार्य की विस्तृत जाँच के आदेश दिए हैं। दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
लोक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
@MPRakeshSingh माननीय मंत्री महोदय जी आपके द्वारा विधान सभा प्रश्न क्रमांक 70 के उत्तर में कहा गया है कि एमपीआरडीसी में सहकारी शक्कर कारखाना से कोई भी व्यक्ति प्रतिनुक्ति में नहीं आ सकता हैं लेकिन एक कंप्यूटर टेक्नीशियन आया है जो डीजीएम एचआर भी बन कर कई वर्षों से कार्य कर रहा है। कार्यवाही?