#किसको_मिले_कबीरभगवान
धर्मदास जी को कबीर परमात्मा पहली बार मथुरा में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे। इसके बाद वे अनेक बार विभिन्न रूपों में मिले, उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया और पुनः संसार में भेजा।
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तैमूरलंग को परमात्मा का साक्षात्कार 'जिंदा महात्मा' के रूप में उस समय हुआ, जब वह जंगल में भेड़-बकरियों की देखभाल कर रहा था। उस दिव्य मिलन ने उसके जीवन की दिशा ही बदल दी।
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संत गरीबदास जी (गाँव - छुड़ानी, जिला- झज्जर, हरियाणा) को कबीर परमेश्वर सन् 1727 में खेतों में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले और उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया।
इस पर संत गरीबदास जी ने कहा हैः
गरीब, परमेश्वर एक कबीर है, दूजा नहीं आधार।
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9 मार्च 1997 को सुबह के 10 बजे
कबीर साहेब संत रामपाल जी महाराज को मिले और अपने तत्व ज्ञान को फैलाने का आदेश दिया।
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💢💢कबीर परमेश्वर, सतगुरु के रूप में विश्नोई पंथ के संस्थापक संत जंम्भेश्वर जी को समराथल (राजस्थान) में मिले थे।
जम्भसागर (शब्द 90) में उल्लेख है:
जां जां पवन आसण, पाणी आसण, चंद आसण।
सूर (सूर्य) आसण गुरु आसण संमरा थले ।
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तैमूर लंग को कबीर परमात्मा ने 'जिंदा महात्मा' के रूप में तब दर्शन दिए थे, जब वह भेड़-बकरियाँ चरा रहा था। संत गरीबदास जी ने कहा है:
गरीब, तैमूरलंग को तालिब मिले, एक रोटी की चाहय।
जिंदा रूप कबीर धरहीं, सुनी तैमूरलंग की माय।।
गरीब, हिंद जिंद सब ही दी,
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सामान्यतः स्वामी रामानंद जी को कबीर जी का गुरु माना जाता है, परंतु मर्यादा बनाए रखने के लिए कबीर जी ने गुरु-शिष्य की लीला की थी।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण के अनुसार, स्वामी रामानंद जी ने स्वयं कबीर साहेब की समर्थता को स्वीकार किया था।
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🍀👇🍀🍀 त्रेता युग में दुखी हनुमान जी को मुनींद्र रूप में कबीर परमात्मा मिले और असली राम का ज्ञान दिया।
सतभक्ति ही कल्याण का मार्ग।
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#GodMorningMonday
फसल ही नहीं नस्ल भी बचा दिया
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उजड़े थे गाम के गाम सुंदर बस्ती बसा दिया
संत रामपाल जी महाराज धरती पर आया वो फरिश्ता, जिसने लाखों की तकदीर संवार दी।
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संत गरीबदास जी महाराज को सन् 1727 में 10 वर्ष की आयु में गांव छुड़ानी के नला नामक स्थान पर कबीर परमेश्वर जिंदा महात्मा के वेश में मिले और सतभक्ति देकर पार किया।
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#GodNightTuesday
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मानव शरीर प्राप्त प्राणी को अपना उद्देश्य याद रखना चाहिए।
भक्ति करके अपना कल्याण करवाना चाहिए।
जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज
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संत मलूक दास जी को भी कबीर परमात्मा के दर्शन हुए थे। उन्होंने अपने पद में कबीर साहेब की महिमा का गान किया है-
जपो रे मन सतगुरु नाम कबीर।।
जपो रे मन परमेश्वर नाम कबीर।
चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर।
दास मलूक सलूक कहत हैं, खोजो खसम कबीर।।
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त्रेता युग में कबीर परमेश्वर मुनींद्र नाम से प्रकट हुए तथा नल व नील को शरण में लिया।
उनकी कृपा से ही समुद्र पर पत्थर तैरे।
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गुरु नानक देव जी को कबीर परमात्मा बेई नदी के किनारे 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे इसके बाद गुरु नानक जी ने कबीर प्रभु के विषय में कहा:
यक अर्ज गुफतम पेश तो दर गोश कुन करतार।
हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार।।
🌼 पूर्ण संत की पहचान शास्त्रों के अनुसार होती है। Sant Rampal Ji Maharaj जी तत्वज्ञान देकर मानव समाज को अंधविश्वास से बाहर निकाल रहे हैं। 📚
#दुर्लभ_दर्शन_संत_के करलो किस्मत वालों
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