कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते।वे सन् 1398,विक्रमी संवत् 1455 में,काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमलके पुष्प पर शिशु रूपमें सशरीर प्रकट हुए थे।यह कोई सामान्य जन्म नहीं,बल्कि साक्षात् परमात्मा का प्राकट्य था।
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा#KabirParmatma_PrakatDiwas
वेद कहते हैं, परमात्मा सशरीर आता है!
ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 के अनुसार परमात्मा सशरीर पृथ्वी पर आता है, वही साक्षात् रूप कबीर साहेब का है, जिनका जन्म नहीं हुआ बल्कि सशरीर प्राकट्य हुआ।
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"कबीर साहेब प्रकट दिवस" वह पावन दिन है,
जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
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"कबीर साहेब प्रकट दिवस"वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर,हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्त्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया।
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#परमात्मा_का_पृथ्वी_पर_आगमन#KabirParmatma_PrakatDiwas
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⚡ कबीर साहेब का कलयुग में पप्राकट्य
शिशु कबीर परमेश्वर द्वारा कुंवारी गाय का दूध पीने का वर्णन परमेश्वर जब पृथ्वी पर शिशु रूप में प्रकट होते हैं तो उनकी परवरिश कुंवारी गाय के दूध द्वारा होती है।
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अजन्मा परमेश्वर, जन्म-मृत्यु से परे कबीर साहेब
कबीर साहेब के न कोई माता-पिता हैं, न उनका जन्म-मृत्यु का कोई बंधन है। वे अविनाशी और सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा हैं,जो हर युग में जीवों के उद्धार हेतु सशरीर धरती पर प्रकट होते हैं
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अजन्मा परमेस्वर जन्म मृत्यु से परे कबीर साहेब के न कोई माता पिता है न उनका जन्म मृत्यु का कोई बंधन है वे अविनाशी और सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा है जो हर युग में जीवों के उद्धार हेतु सशरीर धरती पर प्रकट होते हैं।
"कबीर साहेब प्रकट दिवस" वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्त्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया।
जीव उदारन तुम को तारन, सीधा जग म
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Neither my birth, nor my pregnancy, showed me as a child.
The weaver found camp on the water lotus in Kashi Nagar.
It is clearly mentioned in Rigveda Mandal 10, Sukt 4, Mantra 3 that God is not born,
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कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते।
वे सन् 1398 में काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर शिशु रूप में प्रकट हुए थे।
प्रमाण: ऋग्वेद मण्डल 10,सूक्त 4, मंत्र 3 जिसमें स्पष्ट है कि पूर्ण परमात्मा का जन्म नहीं होता, वह सशरीर प्रकट होता है।
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जिनका न जन्म हुआ और न कोई प्रमाण है, वे स्वयं कबीर भगवान हैं। आज से 600 वर्ष पूर्व काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर उनका सशरीर प्राकट्य हुआ था, जिसके जीवंत साक्ष्य आज भी मौजूद हैं।
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गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ, जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु रूप में प्रकट
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कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते।
वे सन् 1398 विक्रमी संवत् 1455 में काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमल के पुष्प पर शिशु रुप में प्रकट प्रकट हुए थे।यह सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात परमात्मा का प्राकट्य था।
कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते।वे सन् 1398,विक्रमी संवत् 1455 में,काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमलके पुष्प पर शिशु रूपमें सशरीर प्रकट हुए थे।यह कोई सामान्य जन्म नहीं,बल्कि साक्षात् परमात्मा का प्राकट्य था।
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ऋग्वेद मण्डल 10, सूक्त 4, मंत्र 3 में स्पष्ट है कि परमात्मा का जन्म नहीं होता वह सशरीर प्रकट होता है, और वही परमेश्वर कबीर जी हैं।
जिनका जन्म नहीं, सशरीर प्राकट्य हुआ था।
इसी सत्य के प्रमाण स्वरूप 629वां कबीर साहेब प्रकट दिवस,
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♦️ ना मेरा जन्म, ना गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा तहाँ जुलाहे ने पाया।
ऋग्वेद मण्डल 10, सूक्त 4, मंत्र 3 में स्पष्ट उल्लेख है कि परमात्मा का जन्म नहीं होता वह सशरीर प्रकट होता है, और वही परमेश्वर कबीर जी सशरीर प्राकट्य हुए थे
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In Kaliyuga,he appeared physically in the Lahartara pond of Kashi,on a lotus flower,on the Jyeshtha Purnima of Vikrami Samvat1455(1398and the evidence of this is still present in Kashi.Which has been exposed by SantRampalJiMaharaj 🙏🙏
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा ना मेरा जन्म, ना गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया। काशी नगर जल कमल पर डेरा तहाँ जुलाहे ने पाया।
ऋग्वेद मण्डल 10, सूक्त 4, मंत्र 3 में स्पष्ट उल्लेख है कि परमात्मा का जन्म नहीं होता वह सशरीर प्रकट होता हैl
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