Rehabilitation Professional (Prosthetist and Orthotist) registered with Rehabilitation Council of India, Member of ISWP and ISPO, Life member OPAI ,Columnist
When a soldier runs for India, history follows. 🇮🇳
Heartiest congratulations to Indian Army athlete Sawan Barwal on ending India’s 44-year wait for an Asian Games marathon medal with a historic Silver!
With a phenomenal 2:11:37 and a new National Record in the Men’s Marathon, he has exemplified the grit, discipline and indomitable spirit that define our Armed Forces.
A proud moment for the Indian Army. A proud moment for Bharat.
Congratulations, Sawan! The nation salutes your remarkable achievement.
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री राम गोविंद चौधरी जी का निधन, अत्यंत दुःखद !
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि !
ना कांटा दिख रहा है और ना लडा़ई दिख रही है,हवाबाजी से चुनाव नहीं जीते जाते
राष्ट्रवादी पत्रकारिता के क्षेत्र में @23pradeepsingh जी को भीष्म पितामह माना जाता है
इनके तार्किक विश्लेषण बेहद सटीक और तथ्यपूर्ण होते हैं
#यूपी_चुनाव को लेकर इन्होनें जो विश्लेषण किया है वो लाजवाब है
बड़ी खबर-
योगी को दिल्ली हराना चाहता है?
लखनऊ बनाम दिल्ली की लड़ाई अपने सबसे रोमांचक दौर में।
योगी इकोसिस्टम इधर लगातार यही माहौल बना रहा है।
मगर प्रदीप सिंह ने पहली बार इसे ‘On record’ कर दिया है।
प्रदीप सिंह योगी आदित्यनाथ की ‘Voice’ कहे जाते हैं।
कभी जेपी नड्डा को गड्डा कहना,
कभी ब्रजेश पाठक को आस्तीन का सांप कहना,
कभी भूपेन्द्र चौधरी पर हमला, कभी केशव से बदला…….!
संक्षेप में यूँ समझिए कि जिसकी भी योगी से नहीं बनी, उस पर प्रदीप सिंह ने आग उगली!!
अब प्रदीप सिंह के निशाने पर दिल्ली है!
माना जा रहा है कि टीम योगी का संदेश एकदम साफ है!
इस बार की tally पिछले से half है?
और इसके लिए दिल्ली को नहीं करना माफ़ है!!!
राजनीति कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है, वो तो चल-संपत्ति है। जब तक है खर्च होती रहेगी और एक दिन आपको भी खर्च करके चली जाएगी। आज जिसका सूरज उगा है वो पूरे आकाश की यात्रा करके शाम को अस्त हो जाएगा।
कांग्रेस की गलती थी कि उसने ख़ुद को नेहरू की खूँटी पर टाँग लिया, और जब नेहरू नहीं रहे तो संस्थागत पार्टी का भरोसा असंस्थागत गांधी परिवार की खूँटी पर टिक गया। और जो हश्र हुआ वो आप जानते ही हैं।
पर आपकी स्थिति कांग्रेस से भी ज़्यादा नाज़ुक है। आपने एक नेता के इर्द गिर्द अपनी पूरी राजनीति को परिभाषित कर लिया। उस नेता ने राजनीति के सभी मानदंड तोड़ दिए, गला-काट प्रतिस्पर्धा और अस्तित्ववादी घमासान को जन्म दे दिया, जिससे सामने की पार्टियों ने भी हार्ड रेडिकल पोजीशन पकड़ लिया। सामने वाले का मुक़ाबला करने के लिए आपने उनके सारे एजेंडे को अपना एजेंडा बना लिया और पैदा कर लिया अपने लोगों में विरोधाभास, जिसे संभालना अब आगे आने वाले दूसरे नेताओं के बस में नहीं। यानी, एक व्यक्ति पर आपकी राजनीति टिक गई और एक व्यक्ति के भरोसे आप अपना भविष्य गिरवी रखने को मजबूर हो गए।
अब यहाँ से फिसलने का आशय है सरकार, पार्टी और विचारधारा तीनो में बवाल। यह सब कई बार बता चुका, पर ज़रूरी है कि आपको कई बार अलग अलग तरीकों से इसे फिर से बताया जाए।
इस लेखनी का पूज्य भगवत जी क्या बोल रहे हैं, उससे कोई लेना देना नहीं है। लेकिन बात उनकी भी ठीक है। कांग्रेसी तो नेहरू के बाद गांधी परिवार पर आश्रित हो गए, पर आपका क्या होगा। आप तो संघ परिवार पर भी आश्रित होने की स्थिति में नहीं हैं।