@reliancejio VILLAGE me jio ka network dustbin 🗑 jaisa hai, 150 rs ka recharge 350 de rhe ho ,modern technology h jo kam rupye m hi chal jati h phir bhi loot machaye ho
@bstvlive@baghpatpolice@Uppolice@BagpatDm Itni Gandi aur jalim mahila ko police station me same treatment Dena chahiye Aur 10 saal ki jail honi chahiye.. cruel crime Hai..ye
प्रश्न : लोकतंत्र क्या होता है?
उत्तर: जब सरकारी अस्पताल में ५५ सफाईकर्मी होने के बाद भी, हर महीने उनकी तनख्वाह पर लाखों खर्च होने केबावजूद ... बीमार बच्चे की लाचार मां से अस्पताल का फर्श साफ करवाया जाये
📍दमोह ,मध्य प्रदेश
BIG BREAKING | यूपी में SIR पर बड़ा विवाद, मुख्य निर्वाचन अधिकारी की सफाई भी सवालों के घेरे में
85,854 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए सॉफ्टवेयर से फॉर्म-7 जनरेट होने की पुष्टि, लेकिन बिना कारण दर्ज आवेदन, डिजिटल हस्ताक्षर और समयसीमा के बाद आए 1.10 लाख अनुरोधों पर गंभीर सवाल।
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण
(SIR) को लेकर सामने आई खोजी रिपोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की सफाई के बाद विवाद और गहरा गया है। निर्वाचन कार्यालय ने आरोपों को भ्रामक और निराधार बताया है, लेकिन अपनी प्रेस विज्ञप्ति में यह स्वीकार किया है कि 85,854 मतदाताओं को अपात्र घोषित किए जाने के बाद उनके नाम हटाने के लिए सॉफ्टवेयर में फॉर्म-7 जनरेट करने की व्यवस्था थी।
मामला सिर्फ फॉर्म-7 जनरेट होने का नहीं, बल्कि बिना कारण दर्ज किए मतदाताओं के नाम हटाने, अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर, आवेदन की कानूनी समयसीमा और एक ही व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश से जुड़ा है।
खोजी पत्रकारिता संस्थान द रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध 4.3 लाख से अधिक फॉर्म-7 का विश्लेषण कर दावा किया कि निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की ओर से दर्ज 87,127 विलोपन अनुरोधों में से 85,854 में नाम हटाने का कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था। यानी अधिकारियों से जुड़े करीब 98.5 प्रतिशत अनुरोधों में कारण का विवरण नहीं मिला।
रिपोर्ट में एक और गंभीर आरोप है कि चुनाव आयोग के ERONET सॉफ्टवेयर से ये फॉर्म अपने आप जनरेट हुए और उन पर संबंधित अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर भी मौजूद थे। रिपोर्ट के अनुसार, चार निर्वाचन अधिकारियों ने बताया कि सुनवाई के दौरान किसी मतदाता को अपात्र घोषित करते ही सॉफ्टवेयर उनके नाम से फॉर्म-7 तैयार कर देता था।
इससे एक बुनियादी सवाल उठता है कि जब अधिकारी ही किसी मतदाता की पात्रता का फैसला कर रहा था, तो उसी अधिकारी के नाम से मतदाता को हटाने का आवेदन भी क्यों तैयार हो रहा था? क्या निर्णय लेने वाला अधिकारी ही आपत्ति दर्ज करने वाला भी बन गया था?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस प्रक्रिया को कानूनी बताते हुए कहा है कि संबंधित अधिकारियों ने स्वतः संज्ञान लेकर जांच की, नोटिस जारी किए और सुनवाई के बाद अपात्रता का निर्णय लिया। इसके बाद फॉर्म-7 केवल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जनरेट किया गया, ताकि भविष्य में पता चल सके कि मतदाता का नाम कब और क्यों हटाया गया।
लेकिन इसी सफाई से एक महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आता है। यदि फॉर्म-7 बनाने का उद्देश्य नाम हटाने का कारण सुरक्षित रखना था, तो खोजी रिपोर्ट में सामने आए 85,854 फॉर्म में कारण दर्ज क्यों नहीं था? क्या अपात्रता के कारण अलग आदेशों में दर्ज हैं और क्या वे आदेश सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे?
विवाद यहीं समाप्त नहीं होता। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी व्यक्तियों द्वारा दाखिल 1,10,476 मतदाता विलोपन अनुरोध स्वीकार किए गए। इसके अतिरिक्त अधिकारियों से जुड़े 87,127 अनुरोध 15 मार्च से 2 अप्रैल के बीच दर्ज होने की बात सामने आई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी का पक्ष है कि आवेदन दाखिल करने की समयसीमा और पहले से लंबित मामलों की सुनवाई तथा निस्तारण की समयसीमा अलग-अलग हैं। लेकिन व्यक्तिगत आवेदकों के 1,10,476 अनुरोधों में से कितने समयसीमा से पहले दाखिल हुए थे और कितने बाद में, इसका स्पष्ट विवरण सामने आना आवश्यक है।
सबसे संवेदनशील आरोप समुदाय विशेष के मतदाताओं को निशाना बनाए जाने का है।
खोजी रिपोर्ट के मुताबिक तरबगंज और पीलीभीत विधानसभा क्षेत्रों में फॉर्म-7 के जरिए नाम हटवाने के अनुरोधों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा मुस्लिम मतदाताओं से संबंधित था। तरबगंज में 'रेशमा' नाम से एक ही दिन, एक ही बूथ के 188 मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दाखिल किए जाने का दावा किया गया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में रिपोर्ट में उल्लिखित सभी संबंधित फॉर्म-7 निरस्त कर दिए गए थे। यह महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण है, लेकिन सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी संख्या में एक ही नाम से आवेदन किसने और किस आधार पर दाखिल किए? क्या आवेदकों की पहचान की जांच हुई और गलत या दुर्भावनापूर्ण आवेदन पाए जाने पर क्या कार्रवाई की गई?
रिपोर्ट में 198 ऐसे मामलों का उल्लेख है जिनमें एक व्यक्ति के नाम से 10 से अधिक फॉर्म-7 दाखिल हुए और कुल 4,740 मतदाताओं के नाम हटवाने का प्रयास हुआ। निर्वाचन कार्यालय ने इन आंकड़ों को सीमित बताते हुए तर्क दिया है कि प्रदेश में लाखों आवेदनों के मुकाबले ऐसे मामलों की संख्या बहुत कम है।
लेकिन सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ऐसे मामले कितने थे। सवाल यह है कि जिन 4,740 मतदाताओं के नाम हटवाने की कोशिश हुई, उन आवेदनों की प्रामाणिकता और उनके पीछे की मंशा की क्या जांच हुई?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अपनी सफाई में खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पत्रकारों ने 8 अक्टूबर को दोपहर 3:32 बजे सवाल भेजकर शाम 7 बजे तक जवाब मांगा और अगले दिन सुबह खबर प्रकाशित कर दी। निर्वाचन कार्यालय ने इसे आयोग की छवि खराब करने की कोशिश बताया है।
लेकिन पत्रकारों को जवाब देने के लिए पर्याप्त समय न मिलने का मुद्दा और मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया की वैधता दो अलग प्रश्न हैं। पत्रकारों की मंशा पर सवाल उठाने से रिपोर्ट में सामने आए डिजिटल रिकॉर्ड, आवेदन की तारीखों और फॉर्म में दर्ज कारणों की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता समाप्त नहीं होती।
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि निर्वाचन कार्यालय ने फॉर्म-7 जनरेट करने की प्रक्रिया स्वीकार की है, जबकि खोजी रिपोर्ट उस प्रक्रिया की वैधता, पारदर्शिता और दुरुपयोग की आशंका पर सवाल उठा रही है।
उत्तर प्रदेश में 3.26 करोड़ मतदाताओं को नो-मैपिंग और तार्किक विसंगतियों के आधार पर नोटिस जारी किए गए थे। इतने व्यापक पुनरीक्षण के दौरान प्रत्येक मतदाता को सुनवाई का अवसर मिलना, अपात्रता के कारणों का रिकॉर्ड उपलब्ध होना और विलोपन संबंधी निर्णयों का सत्यापन संभव होना बेहद महत्वपूर्ण है।
अब आवश्यक है कि चुनाव आयोग 85,854 मामलों के अपात्रता आदेश, संबंधित फॉर्म-7, सॉफ्टवेयर लॉग, डिजिटल हस्ताक्षर की प्रक्रिया और समयसीमा के बाद दर्ज बताए गए अनुरोधों का पूरा विवरण सार्वजनिक करे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पूरी प्रक्रिया को कानूनसम्मत बताया है। हालांकि उपलब्ध खोजी रिपोर्ट और निर्वाचन कार्यालय की सफाई के बीच मौजूद तथ्यात्मक विवादों का अंतिम समाधान मूल रिकॉर्ड और स्वतंत्र सत्यापन से ही संभव होगा।
सवाल है कि जब मामला लाखों मतदाताओं के संवैधानिक मतदान अधिकार और मतदाता सूची की विश्वसनीयता का है, तो क्या चुनाव आयोग प्रत्येक विवादित विलोपन का कारण और संबंधित आदेश सार्वजनिक करेगा?
#UttarPradesh #SIRControversy #ElectionCommission @ECISVEEP@ceoup@samajwadiparty@INCIndia@INCUttarPradesh@BJP4UP@AamAadmiParty@SanjayAzadSln
@Satyend87769041 नमस्ते,
आपके अच्छे शब्दों के लिए धन्यवाद! आपका फ़ीडबैक हमारे लिए ज़रूरी है। हमें खुशी है कि आपकी समस्या अब हल हो गई है। अगर आपको भी अभी कोई समस्या आ रही है, तो बेझिझक हमसे संपर्क करें।
सादर,
BSNL केयर (दिनेश)
@bsnl_care Meri 2g network ki problem aaj bahut dino tak mehnat karne ke baad thik ho gyi hai,full 2g network aur 4g network bhi full hain ab......thanks
मोदी सरकार ने शेयर बाजार को लेकर बड़े-बड़े दावे किए।
लोगों से कहा गया कि शेयर मार्केट में पैसा लगाइए, जितना हो सके निवेश कीजिए। देशवासियों ने इन दावों पर भरोसा किया और अपना पैसा शेयर बाजार में लगा दिया।
जिस दिन इन्होंने कहा था कि शेयर मार्केट ऊपर जाएगा, उस दिन सेंसेक्स 85,836 पर था, लेकिन 29 सितंबर 2026 को सेंसेक्स गिरकर 72,500 के करीब पहुंच गया।
मतलब, जनता ने जो पूंजी लगाई थी, उसकी कीमत गिर गई और ऊपर से टैक्स भी देना पड़ा।
वहीं, मनमोहन सिंह जी जब प्रधानमंत्री थे और सोनिया गांधी जी UPA की चेयरपर्सन थीं, तब पूरी दुनिया में मंदी आई थी, लेकिन उन्होंने इसका असर भारत पर नहीं पड़ने दिया।
UPA के कार्यकाल में, दुनिया में मंदी रहने के बावजूद सेंसेक्स में करीब 398% की बढ़ोतरी हुई थी।
: @shaktisinhgohil जी
📍 दिल्ली
Trigger Warning.
"Brutality against a dalit woman." 💔
A caste Hindu family, including women, held a Dalit housemaid captive in Hardoi, UP and brutally assaulted her on suspicion of theft.
Casteist women even tried to choke her with a stick and tied her to a rope. Terrible!
@Satyend87769041 नमस्ते,
आपका दिन शुभ हो!
आपको हुई असुविधा के लिए हम माफ़ी चाहते हैं। हमारी टीम इस पर तेज़ी से काम कर रही है; जैसे ही हमें कोई अपडेट मिलेगा, हम आपको सूचित कर देंगे।
सादर,
BSNL-केयर (निशुका)
@BSNLCorporate@CMDBSNL Dear sir mere area me kal evening 30 SEPTEMBER 2026 se BSNL me koi bhi network nahi hain,bar bar ye problem ho Rahi hai , bsnl office me light Jane par Sabse Mobile tower ko band kar Diya jata hai , Genarator bekar pada Hai,2g Network 30 days se card fault se nhi aa rhe Hain..
@BSNLCorporate@CMDBSNL@robertravi21 Mere area me 25 days se BSNL me 2g network nahi hain, Sirf Bsnl 4g Aur 3g ke network hain wo bhi regular nhi rahte hain jabki 25 days pahle 2g 3g 4g sabhi network available rahte the, bahut baar complain ki gyi hai Magar 2g network nhi aa rahe hain jabki light 22 Hr. rahti.
@thewirehindi ISRO ka privatisation nhi hona chahiye ,kyu ki scientist day ,night apni mehant se new technology banate hain Aur sarkar private Walon ko scientist ki mehant de rahi hai,agar private Walon ko Kuch Karna hai to apni khud ki mehant se banaye na ki ISRO ke sahare..
केला सिर्फ स्वाद नहीं, पोषण का भी खज़ाना है!
कच्चे केले से लेकर पूरी तरह पके केले तक, हर अवस्था की अपनी अलग पोषण विशेषता होती है। इसलिए अगली बार केला चुनते समय, सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि अपनी पोषण सम्बंधित ज़रूरतों का भी ध्यान रखें।
Banana Nutrition | Healthy Diet | Balanced Nutrition | Prebiotic Fiber | Antioxidants
#BananaNutrition #HealthyDiet #BalancedNutrition #NHMUP #NutritionAwareness
@IndianTechGuide Use Bsnl save BSNL from private companies against MONOPOLY of PRIVATE COMPANIES.. private companies are regularly increasing price with worst network like jio Airtel vi... only BSNL 4g is faster than AIRTEL jio vi 5g network with cheap prices....
@bsnl_care Aap sabhi BSNL employees aur customers ka kartyava hai ki aap log private companies ki daily price hiking Aur BSNL ko sajis ke tuar par Sarkar ko ya Kuch officers ko ghus dekar bsnl ke network ko weak karke band karne se bachaye aur apni jobs bhi bachaye.. #USE BSNL SAVE BSNL.