कनाट प्लेस के व्यापारियों के साथ खेल हो गया!
कनाट प्लेस पर अपना व्यवसाय चलाने वाले एक व्यापारी मित्र टकरा गए। उन्होंने जो बताया वो चौंकाने वाली बात है!
बहुत से व्यापारियों के पास पुलिस अधिकारियों समेत कईयों के फोन आए कि प्रोटस्ट के ख़िलाफ़ बयान दो। बताओ कि बिज़नेस मारा जा रहा है। व्यापारी मित्र रूपी सूत्र के मुताबिक़ जो नहीं कर रहे थे ऐसा उनको बार फ़ोन किया गया। मित्र-सूत्र का कहना है कि व्यापार प्रभावित हुआ है इसमें शक नहीं लेकिन वो इसलिए हुआ है क्योंकि सरकार ने जंतर मंतर बंद कर दिया और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग कनाट प्लेस के इलाक़े में कर दी गई। और ये भी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से व्यापारियों को डर नहीं था और न है बल्कि उन ‘हुड़दंगी तत्वों’ से डर था और आगे भी होगा जिनके हुड़दंग पर भी पुलिसवालों मूकदर्शक बने नज़र आए।
मेरे इस पोस्ट के ख़िलाफ़ भी पुलिस/मोदी सरकार का इकोसिस्टम फ़ोन कर व्यापारियों से बाइट दिला दे तो आश्चर्य मत करिएगा!
यही वोट चोरी का मामला है। जब वोट चुराने वाले अपने खेल में व्यस्त थे, तब विपक्ष ने और कुछ ईमानदार पत्रकारों ने बाहर से शटर गिराकर उन्हें अंदर ही बंद कर दिया।
वोट चोर फँस गए, तो बाहर निकलते ही कहानी पलट दी! आरोप लगा दिया कि विपक्ष ने उन्हें ज़बरदस्ती अंदर बंद किया था। मीडिया भी इसी कहानी को लेकर बैठ गया। जाँच एजेंसियों ने जाँच से इनकार कर दिया और अदालतें भी बगलें झाँकने लगीं।
जब विपक्ष ने CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की माँग की, तो वोट चोरी में घिरे लोगों ने कानून ही बदल दिया, ताकि फुटेज सार्वजनिक न करनी पड़े।
अतीक अहमद को माफिया बताने वाली पुलिस
उमर खालिद को देशद्रोही कहने वाली पुलिस
मुख्तार अंसारी को गैंगस्टर बताने वाली पुलिस
लॉरेंस बिश्नोई को "साहब" बताती है।
लोकतंत्र है जी लोकतंत्र।
सीधी बात! दो लोगों को मौत की सज़ा गलत है! जो लोग यह जायज ठहरा रहे हैं- उनकी सोच शर्मनाक है! यह सज़ा अत्याधिक है. जगह की गरिमा को भंग करने के लिए आप किसी को मौत की सज़ा नहीं दे सकते! ये वही लोग हैं जो अफगानिस्तान में तालिबान की बर्बरता और महिलाओं पर जुल्म को सही ठहराने का बहाना ढूंढते हैं!
कुछ दिन पहले गैस सिलेंडर और पेट्रोल की किल्लत हुई थी तब पत्रकारों के पूछने पर जैकी श्रॉफ कह रहे थे
"खाना मिल रहा है तुम लोंगो को"
आज टाइगर श्रॉफ पर हमला हुआ तो समझ आया होगा सिर्फ खाना जरुरी नही होता लोगों के लिए
कमाल के दावे किए जा रहे हैं।
पति-पत्नी नहीं थे, इसलिए चुंबन पर मौत की सज़ा सही साबित हो गई?
पिता का दावा है उसके कि नहीं थे, कई खबरें पति-पत्नी भी बता रही हैं। पति-पत्नी हों, प्रेमी-प्रेमिका हों, आपको अगर यह सही लगता है कि उनके 'अपराध' की सज़ा मौत है, तो फिर आपको दुनिया में कहीं और जम्हूरियत वगैरह की बात करने का कोई हक़ नहीं है।
बांग्लादेश सरकार को बताया तक नहीं गया। होती ये हिम्मत अगर वे अमरीकी या इंग्लिस्तानी होते? आप यहाँ वकालत किए जा रहे हैं वहाँ आपको दोयम दर्जे का समझा जा रहा है।
दावा है - क़ानून वैसा ही था।
यहाँ भी क़ानून बदला जा रहा है। उमर खालिद 'क़ानूनन' ही पाँच साल से अंदर रखा गया है। इजरायल में भी 'क़ानून' की आड़ में ही फलस्तीनीयों के साथ हर मुमकिन ज़ुल्म हो रहा है।
क़ानून है तो सवाल उठेगा कि ऐसा क़ानून क्यों है जिसमें एक जोड़े के लिए मौत के अलावा कोई सज़ा नहीं होती?
इंसानियत और जम्हूरियत की बात करिए तो इलाक़ा देखकर मत करिए, इंसानी हकूक दुनिया के हर खित्ते में हैं।
मैं ऐसे हर क़ानून को ग़ैर क़ानूनी मानता हूँ जो एक जोड़े के लिए मौत के अलावा कोई सज़ा नहीं दे सकता।
This is from Assam.
Over 1,100 Muslim families evicted in just two days across Nagaon, Hojai & Golaghat. Homes demolished, mosques reportedly razed, and families left facing an uncertain future.
Where is the rehabilitation plan?
अंकिता भण्डारी, इकरा हसन और रेखा आर्य से नेहा सिंह राठौर तक: महिला होने का दंश पीछा क्यों नहीं छोड़ता? — The Credible News पर @dr_chayanika का लेख
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नेता जी अब क्या ऑटो रिक्शा को ठोकने के बाद गरीब पर भी अपना पुष्पक विमान चढ़ा दोगे ?
किसी गरीब का नुकसान किए जो भरपाई करके मांफी मांग लो क्या चला जाएगा -
ये वीडियो प्रतापगढ़ जिले का है राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल का झंडा लगी गाड़ी ने एक ऑटो रिक्शा को टक्कर मारकर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया।
ऑटो ड्राइवर बेचारा कार सवार को रोकने का प्रयास करता रहा लेकिन कार में बैठे नेता जी उसे धमकाकर मौके से फरार हो गए।
कोई मदद को नहीं आया..पता है क्यों..?
जंगल की ज़मीन पर "कब्ज़ा" करने के आरोप में 59 मुस्लिम परिवारों के घरों पर चला बुलडोजर!
असम और नागालैंड सरकारों ने बॉर्डर इलाके मेरापानी में मिलकर 17 अक्टूबर को बुलडोजर अभियान चलाया, जिसमें 59 बंगाली भाषी मुस्लिम परिवारों को निशाना बनाया गया, जिन पर दयांग रिज़र्व्ड फ़ॉरेस्ट की ज़मीन पर "कब्ज़ा" करने का आरोप था!
अगस्त 2025 में बेदखली अभियान के पहले फ़ेज़ के दौरान, 205 मुस्लिम परिवारों में से 146 के घर गिरा दिए गए थे!
इंसानियत मर गयी।
यूपी के मैनपुरी जिले, एक गांव में पांच साल की एक बच्ची खेलते-खेलते अनजाने में पड़ोसी के खेत में चली गई। इस पर खेत मालिक सुधीर कुमार ने अपने साथियों के साथ मिलकर मासूम को रस्सी से बांध दिया और लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा। बेटी की चीख-पुकार सुनकर उसकी असहाय गर्भवती मां बीच-बचाव करने पहुंची, तो आरोपियों ने उसे भी लात-घूसों से बेरहमी से पीट डाला।
पीड़ित मां किसी तरह कोतवाली पहुंची और पुलिस को आपबीती सुनाई। मां के पास इस पूरी हैवानियत का एक वीडियो सबूत भी मौजूद था, जिसे उन्होंने पुलिस अधिकारियों को सौंप दिया है। वीडियो में आरोपियों की बर्बरता साफ दिख रही है।