@ICAR_CISH@ChouhanShivraj@PIB_India@icarindia I am trying to reach CISH nursery, to book the plants, but there is no way,
- Website is down from long time.
- No one replies to the email.
- No phone number works
Can you pls help me by just giving the contact number so the farmers
Can call.
में असंख्य हूँ में अविनाशी हूँ
में दुर्लभ दुर्गम भरत- भासी हूँ..
लहू से रंजित न पन्द्रहवें का पाक्षिक हूँ
में सत्य उदंड हूँ ,में सुपथगामी हूँ..
में गिरिराज,गीर, असाध्य हूँ दिनकर
का काव्य हूँ सरल धीर सत-असत का
गिरि के रज का में भरत- भासी हूँ..
में असंख्य हूँ में अविनाशी हूँ !
कुल के मूल की तरह...
जब सांख्य दर्शन का एक तत्व
खिन्न होके दमक उठता हैं तब
सैलाब के साथ वर्षारंभ स्तर का मान
दुर्गम होता है तब धरा तुल्य नहीं होती,
अंध:प्रवृत्ति तीव्र वेग से झुलस रही होती हैं
किसी कुल के मूल की तरह !
हरीश चन्द्र उपाध्याय _
निर्वाण अतीत-युग! मृत धड़कन
जग-जरूरत, शब्द 'दम-नुकसान
टूटा तारा, दिन की आखिरी आभा
अंधेरी जाति दिल का कालापन है
किरण का स्कूल चुपचाप बंद हो गया
आपके घर पर हंसी ठिठोली
भारत को मिश्रित विघटन मिला है
सना हुआ रंग किसके बस में
यह पुनर्मिलन सुबह जल्दी होगा
अनन्त जलप्रपात अनन्त में हैं