प्रिय छात्रों और अभिभावकगण,
जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की युवाओं और उनके अभिभावकों की मुहिम में, हम सब पूरी तरह से आपके साथ हैं।
बदले की भावना में जल रही भाजपा सरकार जौहर यूनिवर्सिटी को अपनी संकीर्ण राजनीति का शिकार बनाने की कोशिश न करे। इस दुर्भावनापूर्ण पक्षपाती फ़ैसले के ख़िलाफ़, हमारे साथ हमारा छोटे-से-छोटा कार्यकर्ता, समर्थक, बड़े-से-बड़ा नेता और वो सब हज़ारों बच्चे व उनके मेहनतकश माता-पिता भी हैं जिनके सपने पर बुलडोज़र चलाने की निकृष्ट कोशिश भाजपा सरकार कर रही है।
हर विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर होता है, हम ‘शिक्षा के मंदिर’ को बचाने के लिए देश भर से अपील करते हैं कि वो हमारे साथ आएं। विश्वविद्यालय में हर समाज के बच्चे पढ़ते हैं, क्या भाजपा अब हर समाज के युवाओं के विरुध्द हो गई है। भाजपा का अहंकार ही ये सब गलत काम करा रहा है। अगर कहीं कुछ काग़ज़ी कमी है भी तो उसके काग़ज़ पूरे करके यूनिवर्सिटी को बचाया जाए और स्टूडेंट्स के भविष्य को भी। यहाँ ग़रीबों के बच्चे पढ़ते हैं, जिनके पास इतना पैसा नहीं होता कि वो भाजपाइयों की तरह अपने बच्चों को महँगे विश्वविद्यालय या विदेशों में पढ़ा सकें। जिनके न परिवार हैं न बच्चे,वो परिवारवालों का दर्द क्या जानें। अगर भाजपा के मन में बच्चों, युवाओं, उनके परिवार-परिजनों व समाज के लिए रत्ती भर भी सहानुभूति होती तो वो ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी से भरी इस विध्वंसक कार्रवाई का तत्काल कोई विकल्प ढूँढती।
सच तो ये है कि भाजपा शिक्षा के ही विरुद्ध है क्योंकि शिक्षित लोग जागरूक और प्रगतिशील होते हैं , वो अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ भी उठाते हैं और सवाल भी, जो दक़ियानूसी सोचवाली दमनकारी भाजपा की सत्ता को जरा भी रास नहीं आता है। इसीलिए भाजपाई और उनके संगी-साथी, गाँव-गाँव में प्राथमिक विद्यालय तथा अन्य स्थानों पर विश्वविद्यालय तक बंद करवाने की भूमिगत योजना बनाते रहते हैं। भाजपाई जानते हैं कि पढ़-लिखकर लोग नौकरी-रोज़गार माँगेंगे, जो भाजपा सरकार देना ही नहीं चाहती है। नौकरी-भर्ती भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं। जब हमारे प्राइमरी स्कूल बंद किये गये तो हमारे सजग शुभचिंतकों ने ‘पीडीए पाठशाला’ खोलकर, भाजपाई साज़िश नाकाम कर दी थी, इसीलिए अब उनके निशाने पर यूनिवर्सिटी आ गई है।
जौहर यूनिवर्सिटी पर हो रहा ये हमला, हर समाज के विद्यार्थियों के विरुध्द भाजपाई संगी-साथियों की एक बेहद घिनौनी साज़िश है। उन अपंजीकृत लोगों के अपने सभी स्कूल-विद्यालय चल रहे हैं लेकिन दूसरों पर प्रतिशोध की भावना से एकतरफ़ा कार्रवाई का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
अति निंदनीय!
आपका
अखिलेश
श्री सोनम वांगचुक जी से हमारा अति विनम्र आग्रह और सविनय अपील है कि वो अपना अनशन तोड़ दें। उनका जीवन समस्त विश्व के लिए अनमोल है क्योंकि उसमें मानवता और पर्यावरण के लिए उतनी ही प्रतिबद्धता है जितनी की लोकतंत्र के लिए।
जिस भाजपा सरकार को जगाने के लिए वो आमरण अनशन पर हैं वो तो एक सिद्धांतहीन, भ्रष्ट तंत्र है, उसकी असंवेदनशीलता और हृदयहीनता में किसी के भी त्याग का कोई महत्व नहीं है अत: भाजपाइयों से सदाचार और हृदय-परिवर्तन की कोई भी अपेक्षा निरर्थक है। भाजपाइयों के लिए किसी के जीवन का कोई भी मोल नहीं है। उनके लिए धन ही प्रधान है। वो भ्रष्टाचार से कमाए पैसों के घमंड में चूर हैं। उनमें बदलाव की आशा करना ही व्यर्थ है। जिनमें अहंकार होता है उनमें परिष्कार नहीं होता। ‘सत्याग्रह’ का महत्व वो क्या जानें जो ‘सत्ताग्रह’ के लालच में मंदिर तक लूट ले रहे हैं। उन्हें न युवाओं के भविष्य से कुछ लेना-देना है, न उनके माता-पिता और अन्य परिजनों के सपनों से, वो तो ख़ुदगर्ज़ लोग हैं।
लोकतंत्र का गला घोंटनेवाली महापापी-अधर्मी भाजपा और उसके भूमिगत अपंजीकृत संगी-साथियों के गिरोह को हराने और सदैव के लिए हटाने के लिए आपके मनोबल और नैतिकता की महाशक्ति हर सच्चे भारतीय की प्रेरणा बनती रहे और आप देशवासियों, युवाओं, लोकतंत्र और पर्यावरण के संघर्ष के लिए नकारात्मक ताक़तों के ख़िलाफ़ सदैव प्रकाश स्तंभ बने रहें, यही हम सबकी चाह है और प्रार्थना भी।
@Wangchuk66
सूरत के नासिर नगर में सैकड़ों मुस्लिम परिवारों के घरों पर हुई रहस्यमयी तोड़फोड़ ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारी पुलिस बल और मशीनों की मौजूदगी में 100 से अधिक घरों को ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन अब नगर निगम, पुलिस और जनप्रतिनिधि सभी इस कार्रवाई से पल्ला झाड़ रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि बिना उचित नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के उन्हें बेघर कर दिया गया। इस बीच आरोप लग रहे हैं कि निजी निर्माण परियोजना को रास्ता देने के लिए यह कार्रवाई की गई। मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन भीषण गर्मी में बेघर हुए परिवार अब भी न्याय और जवाबदेही का इंतजार कर रहे हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने ईद उल अज़हा के रोज़ परीक्षा रख दी है। हालांकि ईद उल अज़हा की गजेटेड छुट्टी रहती है, फिर भी इस रोज़ परीक्षा रख दी। जब छात्रों ने सवाल किया तो उनसे @UniofDelhi ने कि हाईकोर्ट चले जाइए। शिक्षा मंत्री @dpradhanbjp इसका संज्ञान लीजिए।
दिल्ली विश्वविद्यालय में ईद उल अज़हा के दिन परीक्षाओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों के साथ की बर्बरता, प्रदर्शनकारी छात्रा अनन्या ने कहा- जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं हो जाती संघर्ष जारी रहेगा.
#DU#Eid#Exam#Protest#Delhi
एक फ़िलिस्तीनी बच्चे को इज़राइली बस्तियों में रहने वालों ने प्रताड़ित किया 💔💔
और फिर उसे कार से रेतीले ढलानों पर घसीटा गया, मानो वे मुस्लिम दुनिया को यह संदेश दे रहे हों: '
तुमने तो बस बातें कीं, जबकि हम सबसे ताकतवर हैं।'
क्या आप इसे 10000 बार रीपोस्ट कर सकते हैं?
"We are Hindus.
I hate Muslims."
During a live stream, 'Janjua Talk' exposed three 🇮🇳 Hindu nationalists who were supporting the killing of children by 🇮🇱 Israel in 🇮🇷 Iran—and who themselves wish to wipe out Muslims worldwide.
ये कौन सी पत्रकारिता है भाई
महिला पत्रकार- सिलेंडर की किल्लत से परेशान लोगों से बात करने पहूंची।
तभी एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का पत्रकार आता है और कहने लगते हैं कि यहां कोई किल्लत नहीं है सब मिल रहा है।
राजकुमार भाटी और विपक्ष के एक और प्रवक्ता लाइव डिबेट मे धरने पर बैठने लगे गुल्लू के शो मे,
विपक्ष बदनाम करने मे लगी है माहौल बनाने मे लगी है गैस सिलेंडर और डीजल पेट्रोल को लेकर,
संकट आया है तो लाया कौन बनाइए खाना अब नाली के गैस से एंजॉय करिए अब,
गुल्लू को फिर रेला गया आज 😂🔥
एक भाई ख़ुद गैस के लिए लाइन में लगकर ज्ञान बाँच रहे थे
“जब गैस नहीं थी तो क्या खाना नहीं बनता था?”
वहीं एक लड़के ने सही इलाज कर दिया
“तो तुम यहां क्यों खड़े हो, घर जाओ और चूल्हे पर लकड़ी से खाना बनाओ”
🤣😂🤣😂
वर्दी नागरिकों की सेवा के लिए मिली है या उनको धमकाने के लिए?
नागरिकों के अधिकार पुलिस विभाग के अधिकारी
तय करेंगे तो सुप्रीम कोर्ट क्या करेगा?
संविधान की प्रस्तावना याद है या भूल गए?
ये देश अभी भी संविधान से चलता है. याद रहे!