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मुसलमान-मुसलमान के शोर में हिन्दुओं की चीखें सिसकियां , आहें , कहीं दब सी गई हैं।
देश में हो हल्ले से ऐसा माहौल बनाया गया कि जैसे मुसलमान बहुत दुरूह ज़िन्दगी जी रहे हैं।
लेकिन हकीकत इसके उलट है ,
आम हिन्दू की स्थिति मुसलमानों से भी बद्तर है ,
आपने शायद ही कभी सुना या देखा हो कि किसी मुसलमान की डेड बॉडी को हिन्दू संगठन वालों ने दफनाया हो।
या कोई मुसलमान गरीबी की वजह से अपने परिजन की डेड बॉडी को सायकिल , ठेले या कंधे पर लादकर ले जाने पर मजबूर हो ,
या अंतिम संस्कार के पैसे ना होने की वजह से अपने किसी परिजन की डेड बॉडी को कहीं फैंक आया हो।
अलहम्दुलिल्लाह , मुसलमानों में ग़रीबी है लेकिन इतनी नहीं कि संवेदना ही मर जाए।
ताज़ा मामला जबलपुर का है जहां ठंड के कारण अज्जू पटेल नामक व्यक्ति की मौत हो गई ,
पुलिस ने खोजबीन करके उसके चाचा पूरन पटेल को जानकारी दी तथा मौके पर बुलाया गया
किन्तु चाचा एवं अन्य परिजनों के पास इतने पैसे नहीं थे कि अज्जू पटेल का अंतिम संस्कार कर पाएं।
लिहाज़ा लोगों एवं पुलिस ने एक मुस्लिम समाज सेवी संस्था को इसकी सूचना दी ,
मुस्लिम समाज सेवी संस्था के सदस्यों ने मृतक के परिजनों की उपस्थिति में हिन्दू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार कराया।
ऐसा तो नहीं हुआ होगा कि सबसे पहले मुस्लिम समाज सेवी संस्था को ही सूचना दिया होगा।
संभव है इससे पहले अपने उन संगठनों को सूचना दी गई होगी जो बात बात में हिन्दू मुस्लिम पर उछल कूद करते हैं।
अमौर की जनसभा में बैरिस्टर @asadowaisi साहब के बयान को आधा-अधूरा दिखाकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। न तो किसी गठबंधन की बात हुई है और न ही सरकार में शामिल होने की। मजलिस कभी भी ऐसी किसी सरकार का साथ नहीं दे सकती जिसमें भाजपा की शिरकत हो।
ओवैसी साहब ने केवल इतना कहा था कि —
अगर नीतीश सरकार सीमांचल के विकास, शिक्षा, रोज़गार और इंसाफ़ के मुद्दों पर ठोस कदम उठाती है, तो ऐसे काम में AIMIM पूरा सहयोग देगी — क्योंकि पार्टी की लड़ाई सीमांचल के इंसाफ़ की लड़ाई है।
AIMIM सत्ता के लिए समझौते नहीं करती। AIMIM जनता के हक़, इंसाफ़ और विकास के लिए राजनीति करती है।
इसलिए गुज़ारिश है कि बयान को पूरा दिखाया जाए। आधी लाइन दिखाकर लोगों को गुमराह करना ठीक नहीं है।
बिजनौर देहात क्षेत्र के रायपुर के एक ट्यूशन में #BhgwaLoveTrap का रैकेट चलाने का आरोप।
युवकों ने एक हिजाब धारण युवती को कई बार संदिग्ध स्थिति में दूसरे धर्म के नामेहरम के साथ बाइक पर घूमते हुए देखा जिसके बाद एक रोज ट्यूशन से लौटते समय इन लोगों को रोक कर पूछताछ की गई जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर ऐसी हिजाबी लड़कियों के माता पिता को सतर्क रहने कहा गया है।
असद ओवैसी साहब कोई B टीम नहीं है , ये चुनावी जुमला है जो उनपर लगता है !
UP के पूर्व मंत्री आज़म ख़ान साहब लल्लन टॉप को एक इंटरव्यू में असद ओवैसी पर बोलते है की ,
“ ये इल्ज़ाम ग़लत है की असद ओवैसी बीजेपी की B टीम है ! और में ये भी जानता हूँ की उनकी कोई मीटिंग नहीं होती है ! “
तो अब ये सेक्युलर पार्टी का तमगा लगाकर जो पार्टी चुनाव लड़ती है ये उनपर सवाल उठाता है , की कब तक ऐसे ही जनता को ओवैसी के नाम पर बेवक़ूफ़ बनाओगे की हम इसलिए गठबंधन नहीं कर रहे है ???? की ओवैसी ये है वो है ???
आपको क्या लगता है ओवैसी से गठबंधन ना करने का क्या कारण था आरजेडी का ?????
Video नीचे है 👇👇👇👇 !
पाकिस्तान में हमारे पुराने 500 रुपये के भारतीय नोट..।।
कागज़ बेचने वाले लड़के अपने कचड़ा ठेले पर इन्हें लहरा रहे हैं।
अब सवाल ये है कि पाकिस्तान में इतने अधिक मात्रा में भारतीय नोट कैसे पहुंचे.??
"किसी मुसलमान को मुख्यमंत्री बनाओ"
2005 बिहार विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। जो बिहार की 75 विधानसभा सीटें जीती थी लेकिन सरकार बनाने के लिए मज़ीद सीटों की ज़रूरत थी। उसी साल पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान की लोकजन शक्ति पार्टी भी पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव लड़ी थी जिस में उसने 29 सीटें जीती थी। तब राम विलास पासवान ने लालू प्रसाद यादव के सामने एक प्रस्ताव रखकर धर्म संकट में डाल दिया था कि किसी मुसलमान को बिहार का मुख्यमंत्री बनाओ तब मैं तुम्हारी पार्टी को समर्थन दूंगा। अब लालू प्रसाद यादव की पार्टी जो ख़ुद को सेक्युलर और जिसकी जीत का समीकरण ही मुस्लिम-यादव वोट पर टिका है वो बहुत बड़ी मुश्किल में फंस गई थी। क्योंकि लालू प्रसाद यादव हर हाल में अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। जबकि लालू प्रसाद यादव उप-मुख्यमंत्री तक किसी मुसलमान को बनाने के ख़िलाफ़ थे। राम विलास पासवान बहुत बड़े लीडर थे। पहली बार इलेक्शन लड़कर उन्होंने बिहार में अपनी पार्टी को स्थापित कर लिया था। पासवान बिहार में एक नए समीकरण (दलित+मुस्लिम) को संगठित करना चाहते थे एक नया समीकरण बनाना चाहते थे। क्योंकि दलित+मुस्लिम बिहार की सबसे बड़ी आबादी है।
लालू प्रसाद यादव ज़िद पर अड़े रहे। राम विलास पासवान अपने एक इंटरव्यू में बताते हैं कि मैंने दो मुस्लिम नाम दिया था कि उनमें से किसी एक को मुख्यमंत्री बना दिया जाए। लेकिन लालू प्रसाद यादव अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री देखना चाहते थे यहां तक कि लालू प्रसाद किसी मुस्लिम के उप-मुख्यमंत्री बनाए जाने के ख़िलाफ़ थे। फिर बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। विधानसभा भंग हुआ और उसी साल नवंबर में दुबारा इलेक्शन हुआ और उस वक़्त से अबतक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने हुए हैं। अगर लालू प्रसाद यादव ने अपनी ज़िद छोड़कर राम विलास पासवान की बात मानकर किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री बना दिया होता तो आज बिहार की सत्ता पर नीतीश कुमार क़ाबिज़ न हुए होते और न बिहार में बीजेपी इतनी मज़बूत हुई होती।
आज उसी लालू प्रसाद यादव का बेटा AIMIM सुप्रीमो असदउद्दीन ओवैसी को बीजेपी का एजेंट और AIMIM को बीजेपी की बी टीम कह रहा है। कोई तेजश्वी यादव से पूछे अगर तुम्हारी पार्टी मुस्लिम हितैषी होने का दावा करती है तो 2005 में क्यों तुम्हारी पार्टी और तुम्हारे बाप किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री बनाने के ख़िलाफ़ थे? क्यों बीजेपी की सरकार बनवाना क़बूल था लेकिन किसी मुसलमान को मुख्यमंत्री बनाना क़बूल नहीं था? यही इनका मुस्लिम प्रेम है। ये हमेशा से मुसलमानों की अपनी लीडरशिप से खौफ़ज़दा रहे हैं। इन्हें ये डर सताता है कि अगर मुसलमान अपनी लीडरशिप के साथ खड़ा हुआ तो इनकी सियासी बुनियाद हिल जायेगी।
#BiharElections
ये संसद भवन में उप राष्ट्रपति चुनाव के दृश्य हैं। इसे लेकर मेरे दो सीधे सवाल हैं:
पहला सवाल: चुनाव आयोग देश की माँ-बहनों के मतदान की फुटेज सार्वजनिक क्यों होने दे रहा है?
दूसरा सवाल: चुनाव आयोग उपराष्ट्रपति चुनाव EVM से क्यों नहीं करवा रहा है?
इस मुद्दे पर आप सरकार और चुनाव आयोग से क्या कहना चाहेंगे?
जो मुस्लिम लड़किया सनातन पर्व पर विश्वास रखती है उनका मित्र अगर हिंदू है तो हम उनकी शादी करवायेगें उनका खर्चा उठाएंगे और उन्हें संरक्षण देने का काम करेंगे ।
कुंवर अजय तोमर प्रदेश अध्यक्ष योगी ब्रिगेड मुस्लिम लड़कियों के धर्मांतरण का खुला आवाहन करते हुए।
#bhagwalovetrap
जब दिल्ली में मुस्लिम नौजवान बाढ़ पीड़ितों की सेवा में लगा था, तब दिल्ली के ही जमुना बाज़ार इलाक़े में सिद्धार्थ शर्मा उर्फ़ काकू अपनी कुंठा, सांप्रदायिकता और घृणा का परिचय दे रहा था। सिद्धार्थ नामी उस युवक ने अपने दादा की उम्र के मुस्लिम बुज़ुर्गों के साथ पहले गाली गलौज की, फिर उनसे टोपी उतरवाई और फिर मंदिर में सजदा कराया। घटना का वीडियो वायरल हुआ तो आरोपी ने माफी भी मांग ली। लेकिन सवाल @DelhiPolice पर है कि उसने अभी तक इस नफ़रती चिंटू के खिलाफ कार्रावाई क्यों नहीं की है?
अब कहाँ हैं गौरक्षक?
यूपी के औरैया में पुलिस ने 16 लोगों को पकड़ा है, जो गोवंश चोरी कर कटान के लिए बेचते थे। इनके पास से 14 मृत और 48 ज़िंदा गोवंश बरामद होने कि ख़बर है।
अब ज़रा इनके नाम पढ़िए…
1- रघुबीर बंजारा
2- हैप्पी सेंगर
3- शिवा भदौरिया
4- दीपक जाटव
5- मंजेश यादव
6- राहुल सिंह
7- राहुल चौहान
8- राहुल
9- बबलू
10- विक्रम
11- अर्जुन
12- कल्लू
13- मुकेश
14- नैना
15- कल्लू
16- बच्चू
सभी के सभी ग़ैर–मुस्लिम, अब सवाल उठता है कि जब मुस्लिम पर “गौकशी” का आरोप लगता है, तो भीड़ गौरक्षक बनकर इकट्ठा हो जाती है। मीडिया प्राइम टाइम में चीख-चीख कर पूरे कौम को कठघरे में खड़ा कर देता है।
कहाँ गए वो “गौरक्षक”?
कहाँ गई वो मीडिया जो मुस्लिम नाम आते ही TRP की दुकान सजाती है? क्या अब गोमाता का दर्द कम हो गया, सिर्फ़ इसलिए कि आरोपी उनके मुताबिक नहीं निकले?
इन्हें सख्त सज़ा कि मांग कीजिए, ताकि ऐसा कोई दोबारा ना कर सके…
पंजाब में दो किस्म की बाढ़ आई हैं। एक तो नदियों की बाढ़ और दूसरी मेरे मुसलमान भाई बहनों की तरफ से मुहब्बत और मदद की बाढ़।
मेरा तो पहली वाली बाढ़ का भी शुक्रिया जिसने हम सिख और मुसलमान भाइयों के सांझे चूल्हे जला दिए। मुझे पूरा विश्वाश है कि ये सब ऊपरवाले के हुक्म से हो रहा है।🙏❤️
एक बम है बैग में ले जाएगा पैसा ले लेना...अल्लाह का बंदा है तू...
अभिषेक आनन्द नामी चरमपंथी ने मदरसे के बच्चों को निशाना बनाते हुए उनके बैग में बम रखने की बात कही और वीडियो फेसबुक पर शेयर किया वह डिब्रूगढ़ असम से वीडियो बना रहा है सनद रहे वह खुद कह रहा है उसके पास बम है
( दुआ की दरखास्त )
कल का दिन दिल्ली की सियासत और इंसाफ़ के इतिहास में अहम साबित हो सकता है। हाईकोर्ट में FIR 59/2020 का बेल ऑर्डर आना है। यह वही केस है जिसमें दिल्ली दंगे के नाम पर दर्जनों लोगों को गिरफ़्तार किया गया था और पिछले साढ़े पाँच साल से जेल में बंद रखा गया है।
पहले बिहार में घुसे , नाम फोटो सब मार्केट में आ गए...फिर दुबई से नेपाल होते हुए मलेशिया चले गए...🙄
आतंकवादी थे या पर्यटक...??
हमारे देश में सुरक्षा एजेंसी चल रही है या सर्कस??
विशेष समाज के दंगाइ खुलेआम
मुस्लिम लड़कियों बदतमीजी कर रहे हैं
अभी कोई ढेल देगा तो तुरंत खतरे में आ जाएंगे
इस के हाथ में कड़ा और कलावा देख कर ही अंदाजा लगा सकते हैं ये मूत पीने वाला है 😡
मुझे समझ नहीं आता कि AIMIM के समर्थकों को महागठबंधन के सामने क्यों गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। जहाँ तक मुझे लगता है कि AIMIM पिछले विधानसभा चुनाव से और बेहतर करने जा रही है बिहार में। उन्हें ज़मीन पर मेहनत करनी चाहिए, ना कि इस तरह कि फ़िजूल कोशिश…