कैप्टन स्मित मच्छार। चाकू से गोदे गए, खून बहता रहा, जहाज एक मिनट में 16,000 फीट नीचे गिरा। उन्होंने दरवाजा खोला और 174 लोग जिंदा घर पहुंचे। इनमें 27 बच्चे थे।
दुनिया ताली बजा रही है। और हमारे यहां कुछ लोग पूछ रहे हैं कि इसमें इस्राइल का खेल क्या है, अमेरिका का एंगल क्या है।
पहले तथ्य देख लीजिए।
दु���ई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड 1073 में ओमानी सह पायलट ने कैप्टन पर चाकू से हमला कर जहाज गिराने की कोशिश की। जहाज 33,000 से 17,400 फीट पर आ गया। घायल स्मित ने हमलावर का मुकाबला क��या, दरवाजा खोला और यात्रियों ने हमलावर को दबोच लिया। जहाज सऊदी अरब के ताबुक में सुरक्षित उतरा।
इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इसे 9/11 जैसा खतरा बताया। उनके मुताबिक हमलावर कट्टरपंथ की राह पर था और आत्मघाती मानसिकता में था। यूएई खुद जांच कर रहा है कि इसके पीछे आतंकी साजिश थी या नहीं। यानी जिस देश की एयरलाइन है, वह भी इसे हल्के में नहीं ले रहा।
सोचिए, 150 इस्राइली नागरिकों से भरा जहाज और कॉक���िट पर कब्जे की कोशिश। स्मित न होते तो आज की सुर्खी कुछ और होती और शायद पूरा पश्चिम एशिया आग में होता।
प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत में स्मित ने बताया कि वे 11 साल से पायलट हैं, दर्द में हमेशा हनुमान चालीसा पढ़ते हैं और उस वक्त भी लगातार पढ़ते रहे। उसी से ताकत जु��ाई और दरवाजा खोला। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्मित ने दुनिया को दिखा दिया कि भारतीय जान बचाते हैं, जान लेते नहीं।
अब उस सोच की बात।
जो लोग स्मित पर सीधे उंगली नहीं उठा पा रहे, वे पूरे मामले पर शक की स्याह चादर डाल रहे हैं। अफसोस कि इनमें एक पूर्व मुख्य संपादक और एक पूर्व बड़े अफसर की पत्नी भी हैं।
सवाल सीधा है। अगर हमलावर भारतीय होता और बचाने वाला ओमानी, तब भी क्या यही थ्योरी चलती। अगर जहाज लाहौर ���ा रहा होता, तब भी क्या इस्राइल दिखता। जवाब आप जानते हैं।
यह शक तथ्य से नहीं, नफरत के चश्मे से पैदा होता है।
हां, सवाल पूछे जाने चाहिए। जिस सह पायलट को एयरलाइन में आए साल भर भी नहीं हुआ था, वह इस्राइल जाने वाली उड़ान पर कैसे तैनात हुआ। सुरक्षा में चूक कहां हुई। ये जायज सवाल हैं।
पर जायज सवाल व्यवस्था से पूछे जाते हैं, उस इंसान की नीयत पर नहीं जो ��ून से लथपथ होकर 174 जानें बचा रहा था। जो यह फर्क नहीं समझते, वे सवाल नहीं पूछ रहे, जहर बो रहे हैं।
इस्राइल का प्रधानमंत्री सलाम कर रहा है। भारत का प्रधानमंत्री फोन कर रहा है। जहाज यूएई का, लैंडिंग सऊदी अरब में। अरब दुनिया भी इस आदमी की कर्जदार है। और कुछ भारतीय अपने ही हीरो पर गर्व करने में हिचक रहे हैं।
यह संकोच नहीं, मानसिक दिवालियापन है।
हीरो को हीरो कहने के लिए किसी विचारधारा की इजाजत नहीं चा���िए। कैप्टन स्मित मच्छार, देश आपके साथ है।
#कैप्टन_स्मित_मच्छार #असली_नायक #भारत_का_गौरव
@journosaurav आप @mrahul999 और @vijaitrivedi से पूछे कि अगर सरकार तीनो चुनाव आयुक्त को बदल दे तो क्या ये दोनो साहब और विपक्ष नए चुनाव आयुक्त पर विश्वास करेंगे?
कहानी कुर्सी की में किसी पेनेलिसट के धीरे बोलने और रूक के बोलने से वे बहुत ज्ञानी नही हो जाते। हर दोपहर उनकी कुंठा को देखना आपके दर्शको की मजबूरी नही है। साथी पेनेलिसट की बात को कुतर्क कहना कुंठा की ही स्थिति है।
@journosaurav@MediaHarshVT
@journosaurav " कहानी कुर्सी की", मै रोज देखता हूँ। इस प्रोग्राम से अपडेट रहने में मदद मिलती है। @vijaitrivedi जी के कटाक्ष पहले चुटीली लगते थे पर अब बोझिल लगते है। कटाक्ष करने से उनकी राय साफ साफ हमारे सामने नही आ पाती।
@MediaHarshVT और @semeerc जी स्पष्ट और शानदार बोलते है।
Oh C’mon! Stop harassing Ladakh Police and Indian Army. Let them do their job. If at all she is GenZ, she is bringing bad name to GenZ as well as tourists who are enjoying their visit to J&K UT and Ladakh UT. Elitism and privilege tone in voice.
No need the so called pressure groups. If you are genuine, your cause is genuine & your intention is genuine. You will be successful.
Congratulations.
#WATCH | Ranchi, Jharkhand: JPSC-JSSC aspirants get emotional as they celebrate after the state government accepted their demands. The JSSC CGL exam and all exams conducted on behalf of TDPL have been cancelled.
Smriti Irani’s comeback is a lesson in politics: win, lose, wait, return. After a huge win & a crushing defeat, she kept her head down. Now the BJP has handed her its biggest battlefield: Uttar Pradesh.
My take: