हरियाणा में मस्जिद के सामने ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ के दौरान बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने ‘तेल लगाकर डाबर का, नाम मिटा दो बाबर का’ जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए। इस जगह पुलिस भी मौजूद है।
आख़िर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या हमारे मज़हब का पालन करने की आज़ादी हमे संविधान देता है तो फिर #ILOVEMOHAMMADﷺ से सिस्टम को क्या तकलीफ़ है? गिरफ्तारी क्यों?
संसद में आग लगाने का मतलब है कि लोकतंत्र से मोह खत्म हो चुका है। बंदूकें केवल हाथ बदलती हैं अपना कैरेक्टर नहीं। नेपाल को समझना होगा कि हिंसक विद्रोह लोकतांत्रिक उद्देश्य के ख़िलाफ़ साबित होता है। उसे शांति की राह पर लौट आना चाहिए। आक्रोश और हिंसा के फर्क को हासिल करना होगा वरना कोई तीसरा फ़ायदा उठाएगा। दूसरी तरफ़ अभिव्यक्ति को दबाने का यह खेल ज़्यादा नहीं चलने वाला। सोशल मीडिया अख़बार या चैनल नहीं है कि संपादक और मालिक के ज़रिए गला घोंट दिया। बांग्लादेश से तुलना की जाएगी लेकिन उससे पहले प्रदर्शन के कारणों को नेपाल में ही देखना होगा। भ्रष्टाचार और दमन का तरीक़ा जनता सहन नहीं करेगी।चुप रह जाती है इसका मतलब यह नहीं कि जनता भी शामिल हो गई है।