https://t.co/vU6dTcT5og नेशनल दस्तक के अकाउंट को इनकम टैक्स ने फ्रीज किया। ना नोटिस दिया गया। ना जवाब का मौका ना ही कोई सुनवाई। पहले भी चैनल बंद करने का नोटिस आया था। बहुजन आवाज को क्यों बंद करना चाहती है सरकार । या फिर सिस्टम में बैठे मनुवादी हैं जिम्मेदार।
नोएडा के सेक्टर 74 में हमारी सोसाइटी में लाइट चली गई. पॉवर बैकअप भी काम नहीं कर रहा. हर फ्लोर पर घुप अंधेरा है. लिफ्ट में एक आदमी 22वें फ्लोर पर फँस गया था, लिफ्ट के अंदर अंधेरे में उनका क्या हाल हुआ होगा, समझा जा सकता है. फ़िलहाल उन्हें निकाला जा चुका है.
लेकिन हर महीने मेंटेनेंस के नाम पर मोटा पैसा लेने वाली सोसाइटी में इंतज़ाम किस क़दर है गर्मी और पॉवर बैकअप को लेकर, तस्वीरें देखिये.
नोएडा अथॉरिटी ऐसी सोसाइटी को इंतज़ाम करने को कहें, वरना लोगों की जान भी जा सकती है. @CeoNoida
आप इस देश के मूलनिवासी और सबसे पुरानी द्रविड़ भाषा और सभ्यता को देश तोड़ने वाली कह रही हैं। मुझे पता है जाति बनानेवाले और जातिवाद के लाभार्थी दूसरे लोगों से नफरत करते हैं। जो लोग अपनी जाति, भाषा और धर्म को श्रेष्ठ और दूसरे को कमतर कहते हैं उनसे और क्या उम्मीद है।
उत्तर भारतीयों के प्रति घृणा, हिंदी भाषा से नफ़रत, सनातन के खिलाफ ओछी मानसिकता के साथ लगातार टिप्पणी. ये व्यक्ति तमिलनाडु में कुछ साल और बना रहता तो वहां भारत के खिलाफ मानसिक फलती फूलती.
नफ़रती व्यक्ति का हारना बेहद जरुरी था.
एक भारत श्रेष्ठ भारत की बात करने की बजाय, देश को तोड़ने वाला बयान देता रहा.
कर्म का फल ईश्वर ने दे दिया…
एक मंगल पांडे समाज हो गए तो फिर बीरबल कौन था। शिवाजी की मुखबिरी किसने की। दोनों साहेबजादे की मुखबिरी किसने की। भगत सिंह की फांसी की पैरवी किसने की। आजाद जी की मुखबिरी किसने की।
मंगल पांडे ना होते तो 1857 का विद्रोह नहीं होता,
मंगल पांडे ना होते तो ईस्ट इंडिया कंपनी का विघटन ना होता,
अंग्रेजो को पता था ब्राह्मणों से ग़द्दारी नहीं करवा सकते,
लिहाज़ा अग्रेजों ने तमाम तरह के प्रतिबंध लगा दिये.
…..
वैसे ये आदमी जबसे चुनाव हारा है मानसिक रुप से विक्षिप्त है. ईश्वर इसे ठीक करें. जातिगत कुंठा से बाहर निकालें.
मंगल पांडे ना होते तो 1857 का विद्रोह नहीं होता,
मंगल पांडे ना होते तो ईस्ट इंडिया कंपनी का विघटन ना होता,
अंग्रेजो को पता था ब्राह्मणों से ग़द्दारी नहीं करवा सकते,
लिहाज़ा अग्रेजों ने तमाम तरह के प्रतिबंध लगा दिये.
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वैसे ये आदमी जबसे चुनाव हारा है मानसिक रुप से विक्षिप्त है. ईश्वर इसे ठीक करें. जातिगत कुंठा से बाहर निकालें.
महाराष्ट्र में अगले महीने होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी है. कोर्ट ने कहा कि राज्य किसी भी परिस्थिति में 50% आरक्षण सीमा पार नहीं कर सकता. कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि आरक्षण की सीमा का उल्लंघन किया जाता है, तो वह चुनावों पर रोक लगा देगी.
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि चुनाव केवल उसी स्थिति में कराए जा सकते हैं, जो 2022 की जे.के. बांठिया आयोग रिपोर्ट से पहले लागू थी. इस रिपोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) वर्ग के लिए 27% आरक्षण की अनुशंसा की थी और वर्तमान में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.
पूरी खबर: https://t.co/eL4J1VijL1
#Maharashtra #SupremeCourt #Elections #Reservation
EVM के रहते विपक्ष अब हिंदी पट्टी के किसी बड़े राज्य का चुनाव नहीं जीत सकता है,
दिल्ली, हिमाचल और उत्तराखंड जैसा कोई एक स्टेट जीत जाएगा विपक्ष,
सिर्फ लोकतंत्र का भ्रम बनाए रखने के लिए,
देहरादून की कड़ाके की ठंड में, खुले आसमान के नीचे बैठकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे उपनल कर्मचारी आज आठवें दिन भी धरने पर डटे हुए हैं। इस संघर्ष के बीच महिला उपनल कर्मी नीलम डोभाल जी की दुखद मृत्यु ने हम सभी को गहरे शोक और स्तब्धता में डाल दिया है। उनकी इस असमय मृत्यु ने उत्तराखंड भाजपा सरकार की संवेदनहीनता को भी सामने ला दिया है। नीलम जी का जाना केवल एक परिवार का दर्द नहीं—यह ‘समान काम-समान वेतन और नियमितीकरण’ की अनसुनी पुकार का परिणाम है।
‘समान काम-समान वेतन और नियमितीकरण’—वर्षों से यह हमारे आंदोलन की प्रमुख और मूल माँगों में शामिल रही है जब काम एक जैसा है, तो वेतन और पद में भेदभाव क्यों?
माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी कहा है कि—
“Equal Pay for Equal Work” हर कर्मचारी का मौलिक हक़ है।
संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 39(d) इस अधिकार की गारंटी देते हैं। फिर भी उपनल, संविदा और अस्थायी कर्मचारियों को आज भी स्थायी कर्मचारियों से कम वेतन देना सीधा-सीधा अन्याय है।
मैं @ukcmo से आग्रह करता हूँ—
1. उपनल कर्मचारियों की मुख्य माँग — समान काम, समान वेतन — पर तत्काल निर्णय लिया जाए।
2. ‘समान काम-समान वेतन और नियमितीकरण’ को लागू करने के लिए स्पष्ट और प्रभावी राष्ट्रीय नीति तैयार की जाए।
3. नीलम डोभाल जी के परिवार को उचित मुआवज़ा और सुरक्षा दी जाए।
4. आंदोलनरत कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील वार्ता शुरू हो।
भीम आर्मी—आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) कर्मचारियों के हक़, अधिकार और सम्मान की इस लड़ाई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
“समान काम-समान वेतन और नियमितीकरण” हमारे आंदोलन की प्रतिबद्धता है और इसे किसी भी हालत में दबने नहीं दिया जाएगा।
@pushkardhami
#समान_काम_समान_वेतन_समान_सम्मान
#EqualPayForEqualWork
#UPNL_Employees
मथुरा में दक्ष चौधरी, अक्कू पंडित, अभिषेक ठाकुर जैसे हिंदूवादी उपद्रवियों ने शराब की दुकानों पर धावा बोला।
धीरेंद्र शास्त्री द्वारा मथुरा में शराब बिक्री पर रोक लगाने की अपील के बाद ये उपद्रवी गुंडई पर उतारू हो गए हैं।
BJP राज में न इन्हें कानून में विश्वास है और न ही कोई डर।
Hello Mr. @RahulGandhi जी कर्नाटक सरकार बैंगलोर की सड़क को साफ़ करने के लिए
613 करोड़ ₹ खर्च करने जा रही है,
जबकि यही काम 23 करोड़ की मशीन और 60-70 करोड़ के दूसरे खर्चो के साथ लगभग 100 करोड़ में कराया जा सकता है,
प्रथम दृष्टया ही इस सौदे में गड़बड़ी की बू आ रही है,
अगर आपको लगता है कि हम लोग यहाँ सिर्फ BJP के घपले घोटाले पर ही बोलने के लिए बैठे हैँ,
तो ये गलतफहमी दूर हो जानी चाहिए,
इस पूरे मामले पर आपको कर्नाटक सरकार से जवाब तलब करना चाहिए,
UPSC टॉपर IAS टीना डाबी को वर्षा जल संरक्षण में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया है। इस सम्मान में ₹2 करोड़ की प्रोत्साहन राशि भी शामिल है।
इससे पहले भी टीना डाबी कई नवाचारों और प्रभावी पहलों के लिए पुरस्कृत होती रही हैं—यह उनके समर्पण, क्षमता और नेतृत्व का प्रमाण है।
सोचिए, अगर मनु आज ज़िंदा होता तो क्या करता? महिलाओं की यह तरक्की देखकर स्वयं ही जलकर भस्म हो जाता।
तुम जलन ज़िंदा रखो, हम अपना जलवा बरक़रार रखेंगे। जय भीम ✊🏾
दिल्ली से वृन्दावन तक पदयात्रा कर रहे धीरेन्द्र शास्त्री के साथ पदयात्रा में राजपाल यादव, शिल्पा शेट्टी और एकता कपूर शामिल हुए।
शिल्पा शेट्टी - एक व्यवसायी से 60 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप है।
राजपाल यादव - मुख्य रूप से चेक बाउंस और लोन न चुकाने से जुड़े मामलों के आरोपी हैं।
एकता कपूर - इन पर सैनिकों के अपमान का आरोप और पॉक्सो मामला है।
पदयात्रा में शामिल इन लोगों के भक्तिभाव से ज्यादा तो इनके केसों की विविधता चमक रही है।😀
77 साल के बुजुर्ग नेता आज़म खान साहब 55 दिनों पहले जेल से रिहा होकर घर आए थे.
उन्होंने कहा जेल में खाना जो खाना दिया जा रहा था उसे कोई कुत्ता भी खा सकता. आज़म खान ने कहा अब पहले मैं अपना इलाज कराना चाहता हूँ, क्यों कि मैं काफी बीमार हूँ.
लेकिन डबल पैनकार्ड बनाने के आरोप में आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को सात साल की सज़ा सुनाकर जेल भेज दिया गया.
योगी आदित्यनाथ जी अपने ऊपर लगे सभी मुकदमों को सीएम बनते ही बर्खास्त कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी डिग्री मिल नही रही है. स्मृति ईरानी को अपनी डिग्री दिखानी चाहिए.
सत्ता में बैठकर खुद को यह लोग बचा रहे हैं. एक बीमार बूढ़े नेता को जेल भेजा जा रहा है. क्या सच में देश में लोकतंत्र है ?
एक लड़की जातिवादियों की करतूतें बता रही है, अगल बगल की दर्जनों लड़कियां हंसी उड़ाकर वही हरकत दिखा रही हैं।
खैर कोई फ़र्क नहीं पड़ता कौन क्या कह रहा है।
लड़की की आंखों में देखो, सच्चाई झलक रही है।
वो एक एक बात सच बता रही है।
खट्टर-खुल्लर के खिलाफ आंदोलन शुरू!
हरियाणा में जगह-जगह SC समुदाय का विरोध प्रदर्शन जारी है। IPS पुरन कुमार को न्याय देने की बजाए भाजपा सरकार उनके परिवार का दमन करने पर उतारू हो गई है।
दलित IPS की सांस्थानिक हत्या पर भाजपा का क्रूर रवैया उसे बिहार व बंगाल चुनाव में महंगा पड़ेगा।