यूपी में पढ़ना एक जुर्म है, साबित कर दिया है यूपी सरकार ने!
जब PanchayatSahayak और केयरटेकर दोनों का वेतन 9000 ही है, तो पढ़ाई का क्या फायदा? 📚#सचिवालय_शौचालय_एक_सामान
#सचिवालय_शौचालय_एक_समान ?
माननीय मुख्यमंत्री जी @myogiadityanath
कभी-कभी अन्याय तब भी महसूस होता है, जब अलग योग्यता, अलग जिम्मेदारी और अलग प्रकृति के कार्यों का मूल्यांकन एक ही तराजू पर कर दिया जाए।
"उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में सचिवों की कमी और ग्राम सचिवालयों के नियमित संचालन की आवश्यकता के बीच PanchayatSahayak की व्यवस्था सामने आई। उद्देश्य था कि गांव का सचिवालय केवल भवन बनकर न रह जाए, बल्कि वहां बैठने वाला कोई ऐसा व्यक्ति हो जो ग्रामीणों को पंचायत की डिजिटल और ऑनलाइन सेवाओं से जोड़ सके।
'पंचायत सहायक' इसी व्यवस्था की कड़ी बने।
समय बीतता गया। काम और अनुभव बढ़ते गए, लेकिन पंचायत सहायक की सेवा-स्थिति अस्थायी संविदा व्यवस्था से आगे नहीं बढ़ी। पाँच वर्ष बाद भी उसके सामने स्थायी सेवा संवर्ग, स्पष्ट सेवा भविष्य और जिम्मेदारियों के अनुरूप वेतनमान का प्रश्न खड़ा है। मानदेय ₹9,000 निर्धारित किया गया।
इसी बीच एक ऐसी तुलना सामने आई, जिसने पंचायत सहायकों के भीतर एक गहरा सवाल पैदा किया।
ग्राम सचिवालय संचालित करने वाले पंचायत सहायक के लिए ₹9,000 और सामुदायिक शौचालय की देखरेख करने वाले केयरटेकर के लिए भी ₹9,000 की राशि। पंचायत सहायक भी तो अपनी तरफ से ग्राम सचिवालय में जरूरते पूरी करता है उनको प्रताड़ित कर रखा जा रहा ??
यहीं से जन्म लेता है
#सचिवालय_शौचालय_एक_समान
इस नारे का अर्थ केयरटेकर के कार्य को छोटा बताना या उसके मानदेय का विरोध करना नहीं है। हर श्रम का अपना सम्मान है और प्रत्येक कर्मी को सम्मानजनक पारिश्रमिक मिलना चाहिए।
लेकिन प्रश्न यह है कि यदि दो पदों की शैक्षिक योग्यता, चयन प्रक्रिया, कार्य की प्रकृति, तकनीकी दक्षता, उत्तरदायित्व और कार्यक्षेत्र अलग हैं, तो उनके मूल्यांकन का आधार क्या है?
पंचायत सहायकों की पीड़ा इसी तुलना में छिपी है।
वे यह नहीं पूछ रहे कि
“केयरटेकर को ₹9,000 क्यों मिले?”
“पंचायत सहायक की योग्यता, पाँच वर्षों के अनुभव और ग्राम सचिवालय की जिम्मेदारियों का स्वतंत्र मूल्यांकन क्यों नहीं हुआ?”
यह अंतर बहुत महत्वपूर्ण है।
क्योंकि किसी दूसरे कर्मचारी का मानदेय कम कर देना न्याय नहीं हो सकता। न्याय तब होगा जब प्रत्येक पद को उसकी प्रकृति, योग्यता, उत्तरदायित्व और कार्यभार के आधार पर उचित स्थान मिले।
आज पंचायत सहायकों के सामने इसलिए केवल ₹9,000 का आर्थिक प्रश्न नहीं है। उनके सामने अपने पद की पहचान और भविष्य का प्रश्न भी है।
पाँच वर्ष की सेवा के बाद उनका सवाल है
क्या PanchayatSahayak हमेशा एक अस्थायी व्यवस्था ही रहेगा, या उसके अनुभव और निरंतर आवश्यकता को देखते हुए सरकार उसके लिए राज्यकर्मी घोषित कर स्पष्ट सेवा नियम, सेवा संवर्ग और उचित वेतनमान की दिशा में भी विचार करेगी?
यही #सचिवालय_शौचालय_एक_समान के पीछे का वास्तविक मुद्दा है।
यह लड़ाई किसी दूसरे कर्मी से बराबरी तोड़ने की नहीं,बल्कि अपने काम का अलग और न्यायसंगत मूल्यांकन मांगने की है।
और शायद किसी भी कर्मचारी के लिए सबसे बड़ी पीड़ा कम वेतन से पहले यह होती है कि
उसके काम की प्रकृति, उसकी योग्यता और उसकी जिम्मेदारी को पहचान ही न मिले।
@myogiadityanath@BJP4UP@mppchaudhary@mediacellsp@yadavakhilesh@uppanchayatiraj@INCUttarPradesh@RahulGandhi@BhimArmyChief@bspindia@mayawati@SanjayAzadSln@AnilYadavmedia1@ranvijaylive@NaveenSirRWA
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नीति आयोग श्री परमेश्वन अय्यर जी की अध्यक्षता में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक में योजनाओं की प्रगति पर विस्तृत जानकारी साझा की (11.02.2023)
#UttarPradesh@MoRD_GoI@UPGovt@CMOfficeUP@NITIAayog
अन्याय अन्याय और सिर्फ अन्याय
पंचायत सहायको के साथ प्रथम कार्यदिवस से अभद्रता,शोषण,अलग अलग रुख अख्तियार कर किया जा रहा है।
आखिर इसका कोई अंत है या सभी महिला पंचायत सहायक अपनी जॉब छोड़ दें।
मेधावी है सम्मान से समझौता न किया है न करेंगे!
#पंचायत_सहायक_का_मानदेय_बढ़ाओ@PragyaLive
#पंचायत_सहायक_का_मानदेय_बढ़ाओ
1.पंचायत सहायक के मानदेय में बढ़ोत्तरी की जाए
2.ग्राम निधि के बजाय मानदेय राज्य के द्वारा डीबीटी के माध्यम से अंतरित किया जाए