जस्टिस खन्ना, औऱ जस्टिस दत्ता की कलम, इतिहास को रूख देने की दहलीज पर हैं।
EVM पर बहस कई दिनों से जारी थी, आज सुना कि न्यायमूर्तियों ने फैसला सुरक्षित कर लिया।
●●
बरसो से, EVM को लेकर संदेह का वातावरण रहा।तमाम फैक्ट्स और तर्क के साथ वकीलों, जनसंगठनों और राजनीतिक दलों ने याचिकायें लगाई।
जो हरि इच्छा से, सुनवाई की रौशनी न देख सकी। बडी देर से, जब जनरल इलेक्शन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी, उन्हें सुना जा रहा है।
●●
चुनावी प्रोसेस की कई लेक्यूना, EVM मे मालवेयर डालने की ओपरच्यूनटीज, कुतर्को के माध्यम से भाजपा नेताओ द्वारा मशीन को सही ठहराने की कोशिश.. ऐसी बाते हैं जो जनमानस में संशय, गहरा अविश्वास पैदा करती है।
जिसका दोषी खुद चुनाव आयोग है। उसने इन संशय को दूर करने के लिए कुछ नही किया। उल्टे हैक करने की चुनौती दी।
बिना छुए..
●●
आयोग स्वीकारने को तैयार नही कि निर्माण से उपयोग तक, हर कर्मचारी मशीनों को हाथ से छूता है, ऑपरेट करता है, खोलता, बन्द करता है, "मेंटेनेंस" करता है।
तब कुछ भी हो सकता है।
चुनाव के ठीक पहले, उसमे लैपटॉप भी कनेक्ट करता है, सिम्बल इंस्टाल करता है, प्रि फॉर्मेंटेड प्रोग्राम इंजर्ट करता है।
तब भी कुछ हो सकता है।
उस चिप में क्या है?? विविपेट केलिब्रेशन में क्या होता है? जो प्रोग्राम धड़ल्ले से डाला जाता है, उसमे क्या कोडिंग है?? क्या एल्गोरिदम है??
उसमे कुछ भी हो सकता है। क्या है, उस कर्मचारी को नही पता। चुनाव आयोग के शीर्ष अफरसान को भी नही पता।
●●
किसी प्रक्रिया में आस्था सवालों के उत्तर से जगाई जा सकती है। बेफिक्री, अहंकार, चुनौती और हेकड़ी से कतई नही।
परसों मॉक पोलिंग के दौरान, केरल में मशीन ने वाम, कांग्रेस और दूसरे किसी को एक वोट देने पर बीजेपी को मुफ्त में 2 वोट दिए, ऐसी खबर पढ़ी। कोर्ट ने इसकी जांच के आदेश दिये, यह भी पढ़ा।
ठीक उसी समय चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट को बता रहा था कि वह विश्व की एकमात्र नोबल, और भरोसेमंद संस्था है, इसलिए पब्लिक आंख मूंद कर भरोसा करे।
●●
आयोग को वोटर के हाथ मे विविपेट पर्ची दिया जाना, लोकतन्त्र को खतरा लगता है।
100% पर्ची गिनना, उसे समय की बरबादी लगती है। किसी भावी वाद (litigation) के समय पेश करने के लिए पर्चियां सबूत की तरह सुरक्षित रखना, स्पेस और समय की बर्बादी लगता है।
हर सुधार टालने के लिये समय और खर्च का हवाला दिया गया। ठीक वैसे ही, जैसे इलेक्टोरल बांड के केस में स्टेट बैंक, उल जलूल हीला हवाला करता रहा। बहस के दौरान कई चौकाने वाले खुलासे हुए। चुनाव आयोग के हास्यास्पद जवाब आये।
चुनाव आयोग के अफसरों की जीतोड़ कोशिश है, जो प्रि प्लान है, सब कुछ उसके मुताबिक हो। विविपेट की पर्ची न गिननी पड़े, प्रक्रिया पारदर्शी न करनी पड़े।
●●
ECI ने पिछले कुछ बरसों में अपनी
क्रेडिबिल्टी की धज्जियां उड़ा ली हैं।
उदाहरणों की लंबी श्रृंखला है, जिससे वह बीजेपी का पिट्ठू, और सरकार का मातहत लगने लगा है।
कोर्ट ने उसके बहानो को कितना सुना, माना, ये तो फैसले से पता चलेगा।लेकिन जनता को उसकी बातों पर लेशमात्र भी यकीन नही।
●●
इस केस में सबसे लॉजिक की बात यही है कि ईवीएम बनी रहे, ताकि वोट इनवैलिड होने, या जोड़ घटाव में गलत होने की संभावना शून्य रहे।
मगर विविपेट की हर पर्ची, व्यक्ति के हाथ में आने दी जाए। वह दस्तखत या अंगूठा लगाकर डब्बे में डाल दे।
डब्बे और मशीनें, स्ट्रांग रूम में रहे, और वहां कैंडिडेट्स के एजेंटों को पहरे की इजाजत दी जाए। मतगणना के बाद, उसका 100% मिलान, छपी पर्चियों से हो।
जहां डेढ़ माह में चुनाव सम्पन्न हो रहे हैं, परिणाम आने में 12 घण्टे और सही।
●●
चुनाव आयोग को इसमे कोई समस्या होनी नही चाहिए। और अगर होती है, तो उसकी नीयत में खोट होने का इससे बड़ा सबूत नहीं।
जो पार्टी इस बात का विरोध करे, उसकी भी नीयत खोटी मानी जाए। जज साहबान ऐसा निर्णय दे, ताकि कोर्ट की नीयत भी शको शुबहे से ऊपर रहे।
●●
2024 में चुनाव परिणाम अप्रत्याशित होने जा रहे हैं। पर्ची मिलान 100% हो, तो एक तरह का, और पर्ची मिलान के बगैर हो,
तो दूसरी तरह का..
मगर मिलान के बगैर आयी सरकार की क्रेडिबिल्टी शून्य होगी। अपना इकबाल बनाये रखने के लिए उसे संविधानेत्तर तरीके अपनाने होंगे।
क्योकि 400 पार की गूंज के साथ, सम्विधान की छाती पर भाला, साध दिया गया है। तो जस्टिस खन्ना और जस्टिस दत्ता, इस भाले को हटाकर, न्यायपालिका पर आस्था स्थापित करेंगे, या चूक जाएंगे?
यह इस सदी का सबसे बड़ा सवाल है।
●●
पर फैसला चाहे जो हो,आज की डेट में ये दो शख्स, इतिहास की धारा को दिशा देने की दहलीज पर हैं। देश दम साधे, उनके फैसले का इंतजार कर रहा है।
जो अब तलक आ जाना चाहिए था।
EVM पर बटन कोई दबाइये वोट BJP को जाता है. केरल में यह मामला सामने आया है.
यही वजह है कि हम कहते हैं- 'राजा की आत्मा EVM में है.'
हमारी मांग रही है कि 👇
* VVPAT की पर्चियां मतदाताओं को सौंपी जाएं
* मतदाता उन VVPAT पर्चियों को एक अलग पेटी में डालें
* फिर उन VVPAT पर्चियों की 100% गिनती की जाए
इन मुद्दों को लेकर हमने चुनाव आयोग से कई बार मिलने का वक्त मांगा, लेकिन चुनाव आयोग इसपर बात करने को तैयार नहीं है.
किसान सड़क पर BJP स्टार प्रचारक मुख्तियार सिंह का विरोध कर रहे थे, पूछ रहे थे की शहीद किसान शुभकरण सिंह को गोली क्यों मारी, वादे अनुसार अभी तक MSP गारंटी कानून क्यों नहीं बनाया; जवाब तो क्या देना था, BJP कार्यकर्ताओं ने किसान पर ईंटें दागी, जवाब के बदले ईंटें, ये है असली चेहरा !
ये तस्वीरें असम के लखीमपुर की है जहां से आज भारत जोड़ो न्याय यात्रा गुजर रही है।
देर रात भाजपा के गुंडों ने पूरे लखीमपुर में पुलिस के संरक्षण में उत्पात मचाया, हमारी गाड़ियों पर हमला किया।
पूरे रुट पर पोस्टर, बैनर फाड़े और पुलिस तमाशा देखती रही।
एक यात्रा से इतना डर?
The British stole an estimated $45 trillion from India 🇮🇳 between 1765 and 1938.
Economist Utsa Patnaik explains how British colonizers drained India of its former wealth. Dont ever buy the lie that colonialism was good for India.
The British stole $45 trillion dollars in 79 years from India. Then, with the resistance fighters of India they became independent. Does anyone know how much died fighting England?
After political houndings, 2 elderly Dalit farmers– who subsist on a Rs 1,000 monthly pension, who had Rs 450 in their account, who were fighting a case against TN BJP leaders, were summoned by ED. After hue & cry E.D took back the summons, but the point is that how BJP uses ED !
हम फिर आ रहे हैं अपनों के बीच,
अन्याय और अहंकार के विरुद्ध - ‘न्याय की ललकार’ लेकर।
सत्य के इस पथ पर मेरी शपथ है, यात्रा जारी रहेगी, न्याय का हक़, मिलने तक।
#BharatJodoNyayYatra
Jobs कहां हैं?
युवा हताश हैं - हमें इस मुद्दे पर focus करना है, युवाओं को नौकरी देनी है।
सुरक्षा चूक ज़रूर हुई है, मगर इसके पीछे का कारण है देश का सबसे बड़ा मुद्दा - बेरोज़गारी!
प्रधानमंत्री जी "Money Heist" की बात कर रहे हैं,
तो लगे हाथ, ये बता दें कि -
1) 16,663 Wilful Defaultes ने बैंको को ₹3.35 लाख करोड़ का चूना कैसे लगाया ?
2) क्या कारण है कि 2014-15 के बाद से बैंकों द्वारा Corporate loan Write-offs था - ₹10.42 लाख करोड़, पर वास्तविक ऋण वसूली ₹1.61 लाख करोड़ ही क्यों रही ?
3) क्यों सरकारी लूट के कारण आज खुदरा महंगाई दर 5.5% पर है, और 74% भारतीय पौष्टिक आहार से वंचित हैं ?
जो भाजपाई वॉशिंग मशीन में नहीं गए , वो तो भ्रष्टाचारी,
जो उसमें स्नान कर लिए, वो बने आज्ञाकारी !!
[स्त्रोत: संसदीय उत्तर व FAO रिपोर्ट]
क़तर की अदालत ने भारत के 8 पूर्व नेवी अधिकारियों को मौत की सज़ा सुना दी और भारत सरकार का अधिकृत बयान है कि उसे ‘शॉक’ लगा।
इस लिजलिजे बयान का क्या मतलब है ?
ये नौसैनिक एक साल से ज़्यादा समय से क़तर की जेलों में सड़ रहे हैं।
भारत की संसद में विपक्षी सदस्यों ने यह विषय लगातार उठाया और विदेश मंत्रालय से एक्शन लेने की माँग की।
विदेश मंत्री विपक्षी नेताओं पर टीका-टिपण्णी करने में व्यस्त रहे।
क़तर जैसे छोटे-से देश के सामने भारत का यूँ निरुपाय खड़ा रहना शर्मनाक है।
हमारी सरकार को दो टूक बात करनी चाहिए और हर हाल में अपने नागरिकों को बचाना चाहिए।
#Qatar
यह वीडियो आज का है। भारतीय रिज़र्व बैंक, दिल्ली के बाहर लोग घंटों क़तार में खड़े हैं। तीन-तीन घंटे। दिल्ली के बाहर से भी लोग आए हैं। दो हज़ार का नोट बदलवाने। यहाँ से रोज़ पत्रकार गुजरते होंगे फिर भी दो हज़ार के नोट की लाइन मीडिया से ग़ायब है। तब भी ग़ायब कर दी गई और अब भी ग़ायब है।
https://t.co/iXVeC4V1ED
' गली मोहल्ले का कोई कुत्ता- बिल्ली भी खड़ा हो जाए तो वोट दे देना लेकिन मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार को वोट मत देना '
ऐसे भी कोई टीचर भला बोलता है क्या ?